8 अप्रैल 2019 को मत्स्य जयंती मनाई जाएगी,जानिए व्रत की कथा एवं इतिहास


devotional Matsya Dwadashi history
हिंदी पंचांग के अनुसार मार्गशीर्ष शुक्ल पक्ष की एकादशी के उपरांत द्वादशी को मत्स्य द्वादशी मनाई जाएगी। मत्स्य द्वादशी के दिन भगवान श्री हरि विष्णु जी ने मत्स्य रूप धारण कर दैत्य हयग्रीव का वध कर वेदो की रक्षा की थी। जिस कारण मार्गशीर्ष माह में शुक्ल पक्ष की द्वादशी को भगवान विष्णु जी के मत्स्य अवतार की पूजा-आराधना की जाती है। संसार के रक्षक भगवान विष्णु जी की उपासना से भक्त के सारे संकट दूर हो जाते है। 8 अप्रैल 2019 को मत्स्य द्वादशी मनाई जाएगी।  devotional Matsya Dwadashi history

मत्स्य अवतार की कथा। devotional Matsya Dwadashi history

सनातन धर्म के धार्मिक ग्रंथो के अनुसार एक बार ब्रह्मा जी की असावधानी से दैत्य हयग्रीव ने वेदो को चुरा लिया। हयग्रीव द्वारा वेदो को चुरा लेने के कारण ज्ञान लुप्त हो गया। समस्त लोक में अज्ञानता का अंधकार फ़ैल गया। तब भगवान विष्णु जी ने धर्म की रक्षा के लिए मत्स्य अवतार धारण कर दैत्य हयग्रीव का वध किया और वेदो की रक्षा की तथा भगवान ब्रह्मा जी को वेद सौप दिया। devotional Matsya Dwadashi history

मत्स्य अवतार का महत्व।  devotional Matsya Dwadashi history

धार्मिक पंडितो के अनुसार सृष्टि का आरम्भ जल से हुआ है और वर्तमान कल में भी जल ही जीवन है। अतः मत्स्य द्वादशी का विशेष महत्व है। भगवान विष्णु जी के 12 अवतार में प्रथम अवतार मत्स्य अवतार है जिस कारण मत्स्य द्वादशी पृथ्वी वासी के लिए अति शुभ व्रत है। मत्स्य द्वादशी के दिन  भगवान श्री विष्णु जी भक्तो के संकट दूर करते है तथा भक्तो के सब कार्य सिद्ध करते है। devotional Matsya Dwadashi history

 मत्स्य द्वादशी की पूजा विधि

स्नान-ध्यान से निवृत हो इस दिन भगवान श्री हरी विष्णु जी के नाम से उपवास रख पूजा-अर्चना व् आराधना करना चाहिए। मत्स्य द्वादशी के दिन जलाशय या नदियों में मछली को चारा डालना चाहिए।

मोक्षदा एकादशी की कथा एवं इतिहास

अगर संभव हो तो 5 गोल्ड फिश को घर में किसी उचित स्थान पर रख कर, चारा खिलाएं।  भगवान विष्णु जी की व्रत करने से हर सिद्धि पूर्ण होती है। इस तरह भगवान विष्णु जी  के मत्स्य अवतार की कथा, महत्व व् पूजा विधि की महिमा सम्पन्न हुयी। प्रेम से बोलिए भगवान श्री हरि विष्णु जी के मत्स्य अवतार की जय।

 ( प्रवीण कुमार )

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