30 मई 2020 को है माँ धूमावती, जानिए कथा एवं इतिहास





हिन्दू धर्म के अनुसार ज्येष्ठ माह में शुक्ल पक्ष की अष्टमी को माँ धूमावती जयंती मनाई जाती है। तदनुसार इस वर्ष 30 मई 2020 को धूमावती जयंती मनाई जाएगी। इस दिन धूमावती देवी के स्त्रोत पाठ व् सामूहिक जाप का अनुष्ठान होता है। इस दिन काले वस्त्र में काला तिल बांधकर माँ को भेँट करने से साधक की समस्त मनोकामनाएँ पूर्ण होती है। माँ धूमावती के दर्शन मात्र से पुत्र तथा पति की रक्षा होती है। dhumavati jayanti history

माँ धूमावती कथा

पौराणिक ग्रंथो के अनुसार एक बार माँ पार्वती को बहुत तेज भूख लगी होती है। परन्तु कैलाश पर उस समय कुछ ना रहने के कारण माँ पार्वती भगवान शिव जी से भोजन की मांग करती है। भगवान शिव जी ध्यान मुद्रा में मग्न रहते है। dhumavati jayanti history

अतः शिव जी कुछ समय के लिए इन्तजार करने को कहते है। परन्तु माँ पार्वती की भूख और तेज़ हो जाती है। माँ पार्वती भूख से व्याकुल हो उठती है। जब माँ पार्वती को खाने की कोई चीज़ नही मिलती है तब माँ पार्वती भगवान शिव जी को निगल जाती है।

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भगवान शिव जी को निगलने के पश्चात माँ के शरीर से धुँआ निकलने लगता है। जब माँ की भूख शांत होती है। तत्पश्चात भगवान शिव जी माया के द्वारा माँ पार्वती के शरीर से बाहर आते है और माँ से कहती है धूम से व्याप्त शरीर होने के कारण आपके इस स्वरूप का नाम धूमावती होगा। अब आप इस वेश में भी पूजी जाएँगी।


देवी धूमावती जयंती महत्व

माँ पार्वती का धूमावती स्वरूप भयंकर तथा मलिन है। माँ धूमावती का वाहन कौवा है, एवम माँ श्वेत वस्त्र धारण करती है, खुले केश रखती है। माँ धूमावती का स्वरूप अत्यंत उग्र है परन्तु माँ अपने संतान के लिए सदैव कल्याणकारी सिद्ध होती है। ऋषि काल में ऋषि दुर्वाशा, भृगु, परशुराम आदि की मूल शक्ति माँ धूमावती थी। माँ की कृपा से व्रती के समस्त पापो का नाश होता है तथा मनोवांछित फल प्राप्त होता है।

माँ धूमावती जयंती पूजन विधि dhumavati jayanti history

माँ धूमावती दस महाविद्याओं में अंतिम विद्या है। गुप्त नवरात्रि में इनकी विशेष पूजा होती है। अतः व्रती को माँ के जयंती अर्थात जन्मदिन पर गुप्त नवरात्री की तरह पूजा करना चाहिए। इस दिन ब्रह्म मुहूर्त में उठे, स्नान आदि से निवृत होकर माँ को नमस्कार करें। तत्पश्चात पूजा स्थल को गंगाजल से पवित्र कर लेना चाहिए। माँ धूमावती की पूजा जल, पुष्प, फल, तांदुल, सिदुर, कुमकुम, धुप-दीप, नैवैद्य आदि से करना चाहिए।

पूजा सम्पन्न होने के पश्चात माँ से अपने मनोकमना की प्रार्थना करें। विधि पूर्वक माँ धूमावती की पूजा करने से माँ धूमावती अति प्रसन्न होकर मनोवांछित फल देती है। इस प्रकार माँ धूमावती की कथा सम्पन्न हुई। प्रेम से बोलिए माँ पार्वती के स्वरूप धूमावती की जय। dhumavati jayanti history