जानिए मैहर वाली माता शारदा की कथा एवं इतिहास

maihar vali mata sharda ki katha




माँ दुर्गा ममता का सागर है। जो भिन्न भिन्न रूप में हमारे समक्ष अदृश्य रूप में उपस्थित रहती है। धार्मिक मान्यता अनुसार, जहाँ माँ प्रत्यक्ष रूप में उपस्थित रहती है उस स्थान का विशेष महत्व है। भारत के विभिन्न शहरों में माँ का डेरा है। जिसमें मध्य प्रदेश का मैहर धाम भी है। इस स्थान पर माँ दुर्गा, माँ शारदा के रूप में अवस्थित है। maihar vali mata sharda ki katha

दुनिया भर के कोने कोने से श्रद्धालु माँ शारदा के दर्शनार्थ हेतु मैहर पहुँचते है। हालांकि, हर रोज मैहर धाम पर हजारों की तादात में श्रद्धालु पहुँचते है लेकिन नवरात्रि के अवसर पर यहाँ श्रद्धालु भारी संख्या में आते है। जैसे कई पहाड़ों को लांघ कर श्रद्धालु माँ वैष्णो देवी के दर्शन हेतु उनके धाम पर पहुंचते है। ठीक उसी प्रकार मध्यप्रदेश स्थित मैहर धाम में स्थित माँ शारदा के दर्शन के लिए श्रद्धालु 1063 चढ़कर माँ के दरबार पहुँचते है। maihar vali mata sharda ki katha

मंदिर का इतिहास

मैहर धाम के इतिहास के बारे में भिन्न भिन्न मत है। जिसमें आल्हा, उदल की कथा सबसे प्रसिद्ध है। धार्मिक ग्रंथों के अनुसार आल्हा और उदल माँ के अनन्य भक्त थे। सर्वप्रथम आल्हा और उदल ने ही घने जंगलों में माता की खोज की थी। तदोउपरांत, आल्हा ने इस मंदिर में 12 वर्षों तक कठिन तपस्या की । आल्हा की भक्ति को देखकर माँ प्रसन्न हुई थी और आल्हा को दर्शन देकर अमरत्व का आशीर्वाद दिया था। आल्हा, माँ को शारदा माई कहकर पुकारता था। maihar vali mata sharda ki katha

उसी समय से यह मंदिर माता शारदा के नाम से प्रसिद्ध हो गया। ऐसा मत है कि आज भी प्रातःकाल में मंदिर में पूजा करने के लिए आल्हा और उदल आते है। जो मंदिर के पुजारी से पहले ही माँ की पूजा कर चले जाते है। इसलिए रात्रि में 2 बजे से लेकर सुबह 5 बजे तक मंदिर का पट बंद रहता है. मंदिर के पुजारी का कहना है कि जब हम मंदिर में पूजा करने जाते है उससे पूर्व मंदिर में पूजा हो जाती है। maihar vali mata sharda ki katha

जानिए कैसे मैहरधाम नाम पड़ा

धार्मिक मान्यता अनुसार, जब भगवान शिव जी माता सती के पार्थिव शरीर को लेकर विलाप करते हुए एक स्थान से दूसरे स्थान पर विक्षिप्त की भांति विचरण कर रहे थे। उसी समय माता सती के गले से हार निकल कर मैहर के घने वन में गिर गया। जिस स्थान पर माता सती का हार गिरा,वह स्थान कालांतर में माईहार कहलाया। जो समय के साथ बदलते बदलते मैहर हो गया। आज के समय में माईहार, मैहर के नाम से जाना जाता है। maihar vali mata sharda ki katha

मंदिर की कथा

धार्मिक ग्रंथों के अनुसार, मध्यप्रदेश के मैहर में महाराज दुर्जन सिंह जूदेव राज करते थे। उनकी प्रजा में सभी प्रसन्न रहते थे। सभी महाराज दुर्जन की जयकारे लगाते थे। वे महाराज दुर्जन सिंह से कुछ नहीं छिपाते थे। एक बार की बात है जब गाँव का एक चरवाहा गाय चराने के लिए मैहर के घने वन में पहुंच गया। जहाँ चरवाहा ने एक अनोखी गाय देखी जो ग्वाले की गाय के साथ चर रही थी। जब संध्याकाळ का समय हुआ तो गाय अंतर्ध्यान हो गई। चरवाहा असमंजस में पड़ गया कि आखिरकार गाय कहाँ गई ? maihar vali mata sharda ki katha

प्रेम से बोलिए माता शारदा की जय

अगले दिन चरवाहा नियमित समय पर पुनः गाय चराने आया। उस दिन भी चरवाहा ने देखा कि अनोखी गाय अन्य गाय के साथ चार रही है। चरवाहा ने सोचा कि आज गाय के बारे में जानकारी लिए बिना घर नहीं जाऊंगा। संध्याकाळ में चरवाहा गाय के साथ चल दिया। गाय एक गुफा के अंदर जाकर अंतर्ध्यान हो गई और गुफा का दरवाजा बंद हो गया। चरवाहा वही द्धार पर बैठ गया। कुछ क्षण पश्चात उस द्धार पर चरवाहा को एक बुढ़िया माँ के दर्शन हुए। तत्पश्चात, चरवाहा ने कहा कि मैं आपकी गाय को चराता हूँ, कृपा कर मुझे खाने को दें। मैं इसलिए आपके द्धार पर हूँ। चरवाहा के कहने के पश्चात बूढी माता गुफा के अंदर गई और लकड़ी के सूप में जौ के दाने चरवाहा को देते हुए बोली इस घने वन में अब कभी नहीं आना। maihar vali mata sharda ki katha

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फिर चरवाहा ने पूछा, ” माँ आपको इस घने वन में डर नहीं लगता है। तो बूढी माता ने कहा कि पुत्र, ये घने वन और ऊँचे पहाड़ ही मेरा घर है, मैं यही पर निवास करती हूँ। इतना कहने के बाद माँ अंतर्ध्यान हो गई। जब चरवाहा ने घर पर आकर जौ की गठरी खोली, तो हैरान रह गया। उस गठरी में जौ की जगह पर हीरे मोती चमक रहे थे। उसी समय चरवाहा ने निश्चय किया कि माता के बारे में वो महाराज दुर्जन सिंह को बताएँगे। तत्पश्चात, अगले दिन चरवाहा ने राज दरबार में जाकर राजा दुर्जन सिंह को आपबीती सुनाई। चरवाहा की आपबीती सुन महाराज दुर्जन सिंह ने कहा कि अगले दिन वो सभी घने वन में माता के गुफा के पास जाएंगे। maihar vali mata sharda ki katha

माता शारदा की कथा

उसी रात्रि को महाराज दुर्जन को स्वप्न में माता शारदा आई और उन्हें सारी बात बताई। माता ने कहा, मेरे दर्शन मात्र से श्रद्धालु की सारी मनोकामनाएं पूर्ण हो जाएँगी। इसके बाद महाराज दुर्जन सिंह ने अगले दिन माता के आज्ञानुसार उस स्थान पर भव्य मंदिर का निर्माण करवाया। जो आज भी अवस्थित है। शीघ्र ही माता की महिमा का गुणगान चारों ओर फ़ैल गया। माता के दर्शन हेतु दूर दूर से श्रद्धालु मैहर धाम पहुँचने लगे और जो भक्त जिस उद्देश्य से आता था उनकी मनोकामना अवश्य पूर्ण होती थी। इसके पश्चात मंदिर के स्थान पर माता का विशाल, भव्य एवं सुन्दर मंदिर बनवाया गया।  maihar vali mata sharda ki katha

प्रेम से बोलिए माता शारदा की जय

मैहर नगर से महज 5 किलोमीटर की दुरी पर माता शारदा देवी का वास है। पहाड़ों के मध्य श्रृंखला में शारदा माता का मंदिर है। पुरे भारत में मैहर वाली माता शारदा का अकेला मंदिर है। माता शारदा के साथ, श्री काल भैरवी, भगवान, हनुमान जी, देवी काली, दुर्गा, श्री गौरी शंकर, शेष नाग, फूलमति माता, ब्रह्म देव और जलापा देवी की भव्य प्रतिमूर्ति है। जिनकी पूजा श्रद्धालु हर्षोउल्लास के साथ करते है। इस प्रकार मैहर वाली माता शारदा की कथा सम्पन्न हुई। प्रेम से बोलिए माता शारदा की जय।  maihar vali mata sharda ki katha

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