12 फरवरी 2019 को है रथ आरोग्य सप्तमी, जानिए कथा एवं इतिहास

devotioanal rath saptami history

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हिन्दू धर्म के ग्रंथो के अनुसार माघ माह के शुक्ल पक्ष की सप्तमी को रथ सप्तमी मनाया जाता है। तदनुसार, 12 फरवरी 2019 को  रथ सप्तमी मनाया जायेगा। हिन्दू धार्मिक मान्यताओ के अनुसार इस दिन से भगवान सूर्यदेव ने सारे जगत को अपने प्रकाश से आलोकित करना प्रारम्भ किया था इसलिए माघ माह शुक्ल पक्ष की सप्तमी को सूर्य जयंती के रूप में भी जाना जाता है। रथ सप्तमी के दिन जो श्रद्धालु भगवान सूर्य देव की पूजा विधिवत करते है उन्हें संतान प्राप्ति, धन और मनोवांछित फल प्राप्त होता है। आदिकाल में भी सूर्य देव जीवन चक्र के लिए परम सत्य है। समस्त ब्रह्माण्ड के पालन हार भगवान सूर्य देव है इनके प्रभाव से समस्त जीव लोको को पोषण प्राप्त होता है। devotioanal rath saptami history 

सूर्य सप्तमी के अन्य नाम
सूर्य सप्तमी या रथ सप्तमी को अन्य नाम से भी जाना जाता है जिसे अचला सप्तमी, सूर्यरथ सप्तमी, आरोग्य सप्तमी भी कहते है। वेदो, पुराणो और शास्त्रो ने इसका उल्लेख किया है।

रथ सप्तमी या सूर्य सप्तमी की कथा

माघ माह के शुक्ल पक्ष की सप्तमी अर्थात रथ सप्तमी से संबंधित कथा का उल्लेख हिन्दू ग्रंथो में मिलता है। कथानुसार, एक बार द्वापर युग में भगवान श्री कृष्ण के पुत्र शाम्ब को अपने शारीरिक बल और उत्कृष्टता पर अत्यधिक अभिमान हो गया था। जब दुर्वाशा ऋषि भगवान श्री कृष्ण जी से मिलने गए तब भगवान श्री कृष्ण जी के पुत्र शाम्ब ने दुर्वाशा ऋषि के कमजोर तन को देख कर हसने लगे। devotioanal rath saptami history 

इस बात पर दुर्वासा ऋषि क्रोधित हो गए और क्रोध की ज्वाला में जल रहे ऋषि दुर्वासा ने भगवान श्री कृष्ण के पुत्र शाम्ब को श्राप दे दिया की तुम कुष्ठ रोग से ग्रसित हो जाओगे और तुम्हारा यह बलिष्ठ तन कुरूप हो जायेगा। ऋषि दुर्वासा के श्राप से तत्काल प्रभाव दिखने लगा और भगवान श्री कृष्ण जी के पुत्र शाम्ब कुष्ठ रोग से ग्रसित हो गया। शाम्ब के शरीर की प्राकृतिक उपचारो से उपचार किया गया परन्तु ऋषि दुर्वासा के श्राप के प्रभाव को कम ना कर सका। devotioanal rath saptami history 

तत्पश्चात, भगवान श्री कृष्ण जी ने अपने पुत्र शाम्ब को भगवान सूर्य भगवान की उपासना करने के लिए कहा। पिता के आज्ञा का पालन करते हुए शाम्ब भगवान सूर्य देव की उपासना करने लगे। कुछ समय पश्चात शाम्ब कुष्ठ रोग से मुक्त हो गया। प्राचीन काल में राजा हर्षवर्धन के दरबारी कवि मयूर भट्ट कुष्ठ रोग से ग्रसित हो गए थे। उन्होंने भी सूर्य देव की आराधना कर इस रोग से मुक्ति पाई थी। राजा हर्षवर्धन के दरबारी कवि मयूर भट्ट ने सूर्य सप्तक ग्रन्थ की रचना की है। devotioanal rath saptami history 

रथ आरोग्य सप्तमी व्रत विधि

रथ सप्तमी के दिन प्रातःकाल जल्दी उठे, स्नानादि से निवृत होकर भगवान सूर्य देव को सर्वप्रथम अर्ध्यदान (चावल, तिल, दूर्वा, चंदन जल में डालकर ) तथा उनकी आराधना करे। तत्पश्चात शुद्ध घी के दिए जलाकर ऊँ घृणि सूर्याय नम:” अथवा “ऊँ सूर्याय नम:” मंत्रो उच्चारण कर उनका आह्वान करे। पूजन समाप्ति के पश्चात अपने सामर्थ्य अनुसार दान करे। दान में वस्त्र, भोजन तथा अन्य उपयोगी वस्तुए भी ब्रह्मणो और गरीबो को दे सकते है। devotioanal rath saptami history 

रथ सप्तमी का महत्व

रथ सप्तमी के दिन उपासक भगवान सूर्य देव की उपासना करते है और अपनी श्रद्धा तथा भक्ति से उन्हें प्रसन्न करते है। धार्मिक ग्रंथो के अनुसार सूर्य देव की उपासना से शरीर में अरोयगता प्राप्त होती है तथा यह व्रत आरोग्यकारक माना जाता है। रथ सप्तमी के उपासना से संतान की पप्ति होती है तथा उपासक के जीवन में धन, सुख और वैभव की प्राप्ति होती है। वैज्ञानिक तौर पर भी सूर्य की किरणे सभी जीवो को लिए लाभकारी है। devotioanal rath saptami history 

सूर्य की किरणों से विटामिन डी प्राप्त होती है जिससे शरीर को ऊर्जा प्राप्त होती है। चिकित्सा पद्धति में भी सूर्य किरणों को उपयोग किया जाता है। जिन व्यक्तियों को शारीरिक दुर्बलता होती है उन्हें भगवन सूर्य देव की उपासना करना चाहिए। उनकी आराधना से साधक को रोग से मुक्ति मिलती है। चर्म रोग से ग्रसित व्यक्ति को सूर्य देव की दिशा में मुख कर सूर्य देव की स्तुति करने से शारीरिक चर्म रोग से मुक्ति मिलती है। संतान प्राप्ति के लिए यह व्रत अति मत्वपूर्ण है तथा इस व्रत के करने से पिता-पुत्र में स्नेह और प्रेम बना रहता है। इस तरह रथ सप्तमी की कथा सम्पन्न हुआ। प्रेम से बोलिए भगवान सूर्य देव की जय।  devotioanal rath saptami history 
( प्रवीण कुमार )



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