7 फरवरी 2018 को है कालाष्टमी,जानिए व्रत की कथा एवं इतिहास

devotional kalashthmi masik vrat





वेदों, पुराणों एवम शास्त्रों के अनुसार वर्ष के प्रत्येक माह में कृष्ण पक्ष की अष्ठमी को कालाष्टमी मनाई जाती है। तदनुसार, शनिवार 7 फरवरी 2018 को कालाष्टमी है। कृष्ण पक्ष की अष्टमी को कालाष्टमी या भैरवाष्टमी के रूप मनाया जाता है। इस दिन लोग भगवान भैरव जी की पूजा व व्रत करते है। devotional kalashthmi masik vrat 

कालभैरव जयंती की कथा

एक समय की बात है, जब भगवान विष्णु और भगवान ब्रह्मा के बीच महज छोटी सी बात को ले विवाद उत्पन्न हो गया की उन दोनों में श्रेष्ठ कौन है ? समय के साथ विवाद और बढ़ता गया और अंततः भगवान शिव जी की अधयक्षता में एक सभा बुलाई गयी। devotional kalashthmi masik vrat 

जिसमे ऋषि मुनि और सिद्ध संत उपस्तिथ हुए, और सभा ने निर्णय सुनाया की भगवन ब्रह्मा, भगवान विष्णु और भगवान शिव जी एक ही है, मानव जाति के उत्थान और सृष्टि की भलाई के लिए अनेक रूप में प्रकट हुए है। जिसे भगवान विष्णु ने स्वीकार कर लिया परन्तु भगवान ब्रह्मा जी इस निर्णय से संतुष्ट नही हुए और भगवान ब्रह्मा ने इस निर्णय के लिए भगवान शिव जी का अपमान किया। devotional kalashthmi masik vrat 

भगवान शिव जी की लीला अपरम्पार है , जब ध्यान में रहते है तो कैलाश पर्वत मानो शांति का सागर बन जाता है पर जब महादेव क्रोधित होते है तो पूरा ब्रह्मांड कापने लगती है। अपमानित होने पर महादेव क्रोध में प्रलय प्रकट करते नजर आने लगे तथा महादेव के इसी रूप से भगवान भैरव प्रकट हुए। devotional kalashthmi masik vrat 

भगवान भैरव कुत्ते पर सवार हाथ में दंड धारण किये हुए थे। भगवान के इस रूप को दण्डाधिपति भी कहा जाता है। भगवान शिव के इस रूप को देख उपस्तिथ जनो ने हाथ जोड़ प्रणाम किया, तब भगवान ब्रह्मा जी को गलती का एहसास हुआ। तत्पश्चात देव गण, ऋषि मुनि तथा भगवान ब्रह्मा के वंदना करने पर भगवान भैरव शांत हुए। devotional kalashthmi masik vrat 




कालभैरव जयंती व्रत पूजा विधि

ऐसा माना गया है की जो भक्त कालभैरव जयंती के दिन भगवान भैरव की आराधना करते है, इस व्रत को करने से भक्त के सारे दुःख एवं कष्ट दूर हो जाता है तथा उनकी सारी मनोकामन पूर्ण होती है। भैरव जी की उपासना मार्गशीर्ष के कृष्ण पक्ष की अष्टमी के दिन किया जाता है। devotional kalashthmi masik vrat 

शबरी जयंती की कथा एवं इतिहास

इस दिन प्रत्येक प्रहर में भैरव नाथ जी की पूजा व जलाभिषेक करना चाहिए। मार्गशीर्ष महीने में कृष्ण पक्ष की अष्टमी के रात में जागरण करके माता पार्वती और भोले शंकर की कथा भजन कीर्तन एवं उनका धयान करना चाहिए। व्रत वाली रात के मध्य में भगवान भैरव की आरती व् अर्चना करनी चाहिए। devotional kalashthmi masik vrat 

भगवान भैरव नाथ का सवारी कुत्ता है अतः इस दिन भैरव जी की सवारी को उत्तम भोजन देना चाहिए। मान्यता है की इस दिन पितरों का श्राद्ध व तर्पण भी किया जाता है। मार्गशीर्ष के कृष्ण पक्ष की अष्टमी को भैरव जी का व्रत करने से आयु में वृद्धि होती है। ऐसा भी कहा गया है की भगवान भैरव की उपासना से भूत, प्रेत, जादू टोना सभी तरह के विघ्न दूर हो जाते है। devotional kalashthmi masik vrat 

जितिया व्रत की कथा एवं इतिहास

भगवान शिव जी की पूजा करने के साथ इस दिन माँ पार्वती जी की भी पूजा करने का प्रावधान है। ऐसा माना गया है की महीने की हर कृष्ण पक्ष की अष्टमी को माँ काली की विशेष पूजा करनी चाहिए ।  इस दिन माँ काली की पूजा उसी ध्यान से करना चाहिए जिस तरह दुर्गा पूजा के उपलक्ष्य में सप्तमी की रात को माँ काली की पूजा की जाती है। इससे माँ पार्वती और भगवान शिव जी की कृपा भक्तो पर सदा बनी रहती है।इस प्रकार कालाष्टमी की कथा सम्पन्न हुई। तो प्रेम से बोलिए भगवान शिव जी और माँ पार्वती की जय हो। devotional kalashthmi masik vrat 

( प्रवीण कुमार )

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