4 फरवरी 2019 है माघ अमावस्या, जानिए कथा एवं इतिहास

devotional Magha Amavasya history




माघ अमावस्या को ही मौनी अमावस्या कहा जाता है। धार्मिक मान्यताओ के अनुसार यह योग पर आधारित व्रत है और इस दिन पवित्र नदियों और संगमो में देवताओ का निवास होता है। अतः इस दिन गंगा, यमुना और सरस्वती स्नान का अति विशेष महत्व है। माघ स्नान का महत्व कार्तिक गंगा स्नान के समान है। मौनी अमावस्या के दिन भक्त गण पवित्र नदियों और सरोवर में आस्था की डुबकी लगाते है।devotional Magha Amavasya history 

माघ अमावस्या की कथा

एक बार देवत्व काल के समय में सागर मंथन से भगवान विष्णु अमृत कलश लेकर प्रकट हुए तथा इस अमृत कलश के लिए देव और असुर गण में खींचा तानी शुरू हो गयी। देवता लोग अमृत को प्राप्त करना चाहते थे तो वही दूसरी ओर असुर गण इसे प्राप्त करने में लग गया। नभ में यह खींचा-तानी होने लगा तथा खींचा-तानी के क्रम में अमृत की कुछ बुँदे छलक कर गंगा-यमुना के संगम में आ गिरा। जिससे यह संगम अति पवित्र हो गया। आदिकाल में गंगा-यमुना के संगम स्थान पर स्नान करने से अमृत स्नान का पुण्य प्राप्त होता है। devotional Magha Amavasya history 

माघ अमावस्या का महत्व सनातन धर्म के अनुसार यदि माघ अमावस्या सोमवार को पड़े तो इसका महत्व कई गुना बढ़ जाता है जबकि यदि माघ अमावस्या सोमवार को पड़े तथा इस दिन महाकुम्भ स्नान का भी योग बने तो इसका महत्व अनंत गुना फलदायी होता है। शास्त्रो में कहा गया है की सत युग में तप से पुण्य का फल मिलता है, त्रेता में ज्ञान से पुण्य मिलता है, जबकि द्वापर में हरि भक्ति तथा कलियुग में दान से पुण्य की प्राप्ति होती है। अतः कलियुग में माघ, वैसाख और कार्तिक स्नान का विशेष महत्व है। devotional Magha Amavasya history 

मौनी अमवस्या पूजा विधि और फल

मौनी अमवस्या या माघ अमावस्या योग पर आधारित पर्व है चूकि इस दिन व्रती को बोलने की व्यवधान नही है। अतः व्रती को मौन व्रत का पालन करना चाहिए। वेदो, पुराणो और शास्त्रानुसार होठो से भगवान का उच्चारण करने से जो यश की प्राप्ति होती है उससे लाख गुना यश और पुण्य की प्राप्ति भगवान को मन के मनके से जपने से मिलता है। इस तिथि को व्रती को संत की तरह मौन व्रत का पालन करना चाहिए। इस दिन भगवान शिव तथा विष्णु जी की पूजा की जाती है। devotional Magha Amavasya history 

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अतः व्रती को पवित्र नदियों और सरोवरो में स्नान कर सूर्य देव तथा पीपल वृक्ष में जलाभिषेक और पूजन करें। पूजन समाप्ति के पश्चात ब्राह्मणो, और गरीबो को दान दे। जिन व्रती के लिए दिन भर उपवास करना संभव ना हो उन्हें दिन में मीठा भोजन ग्रहण करना चाहिए। भगवान श्री हरि विष्णु और महादेव की कृपा से व्रती के जीवन में सुख और वैभव की प्राप्ति होती है। इस तरह मौनी अमावस्या की महत्व तथा कथा सम्पन्न हुआ। व्रती जन प्रेम से बोलिए भगवान शिव और विष्णु जी की जय। devotional Magha Amavasya history 
( प्रवीण कुमार )



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