मधु सूदन मंदिर बौंसी का इतिहास history-of-madhu-sudana-mandira-baunsi

madhusudan-mandir-ka-itihasबांका जिला अंतर्गत मन्दार गिरी के मध्य भाग में मनोरम प्राकृतिक वातावरण में बसा मधु सूदन मंदिर आदि काल से श्रद्धा और आस्था का केंद्र बना हुआ है। मार्कण्डेय पुराण , दुर्गा सप्तसती के अलावा कई अन्य धर्म ग्रंथो में इस स्थान से जुडी कथा पढ़ने और सुनने को मिलती है। कहा जाता है महाप्रलय के बाद जब भगवान विष्णु क्षीर सागर में शेष सय्या पर योग निद्रा में लीन थे, उसी समय उनके कानो के मैल से मधु व कैटभ नाम के दो भयानक, महा शाक्तिशाली दैत्य उतपन्न हुआ। इन दोनों बलशाली दत्यों ने तीनो लोक में हाहाकार मचाया हुआ था ।

यहाँ तक की उन्होंने ब्रह्मा जी को मारने की तैयारी शुरू कर दिया। मदु कैटभ के भय से भयभीत होकर ब्रह्माजी ब्रह्म लोक छोड़ कर शिवजी के पास पहुंचे। वहां से दोनों मिलकर भगवान विष्णु के पास गए और प्रार्थना पूर्वक उन्हें योग निद्रा से जगाया।

भगवान विष्णु ने उनके आने और उन्हें जगाने का कारण पूछा। फिर दोनों देवों ने विस्तार पूर्वक उन्हें मधु कैटभ के जन्म और उत्पात की कथा सुनाई और संसार को उससे मुक्ति दिलाने के लिए आग्रह किया

 

फिर भगवान विष्णु ने मधु कैटभ को युद्ध के लिए ललकारा। इस प्रकार मधु और कैटभ से हजारो साल तक भगवान विष्णु की लड़ाई हुई। मधु कैटभ को मारना भगवान विष्णु के लिए कठिन हो गया। तब भगवान विष्णु ने मधु और कैटभ से कहा हम आप दोनों से बहुत प्रसन्न है।
वैसे तो आप बलशाली है ही फिर भी अगर कुछ वरदान माँगना चाहो तो मांग लो। इस पर अहंकारी दैत्य मधु कैटभ ने आक्रोश करते हुए कहा की वरदान और वो भी तुम से मांगेंगे। अरे प्रसन्न तो हम दोनों भाई तुम से है जो तुम चाहो वो मुझसे मांग लो। इसपर भगवान मुसकराये और बोले अगर आप सचमुच मुझ पर प्रसन्न है तो आप दोनों की मृत्यु मेरे हाथो हो ऐसा मुझे वरदान दीजिये। फिर क्या था अहंकार में अँधा और अपने वचन से विचलित नही होने वाले दोनों दैत्यों ने अट्हास करते हुए कहा ऐसा ही होगा हम दोनों अपने आप को आप के हवाले करते है।

आप हमें मार कर हमारे वचन को पूर्ण करे। फिर भगवान ने मधु कैटभ का वध किया तदोपरांत मधु कैटभ ने भगवान से हर वर्ष दर्शन पाने की इच्छा जाहिर की। तभी से भगवान विष्णु मधुसूधन के नाम से माने जाने लगे और आज भी मकर सक्रांति के वक़्त मधुसूधन मंदिर से भगवन की प्रतिमा को मधु कैटभ का सर जहाँ गिरा था वहां लेजा कर दर्शन करवाया जाता है। इस अवसर पर पूरे एकमाह तक भव्य मेला का आयोजन भी होता है जिसमें देश विदेश के लाखों श्रद्धालु यहाँ आते है भगवान का कृपापात्र बनते है। सच्चे मन से बोलिए भगवान मधुसूदन जी की जय।

भगवान मधुसूधन के मंदिर पहुँचने के लिए रेल मार्ग से भागलपुर और भागलपुर से लिंक रेलवे से मंदार स्टेशन जा सकते है। स्टेशन से टैक्सी या ऑटो लेकर या १५ मिनट पैदल चल कर भी मंदिर पहुंचा जा सकता है। यहाँ आस पास दर्शन करने योग्य अन्य तीर्थ स्थलो में पाप हरणी लक्ष्मी नारायण मंदिर, विष्णु दिगम्बर महावीर जैन मंदिर , मंदार महादेव नर्सिंग मंदिर, कामधेनु, सीताकुंड आदि प्रमुख है। यहाँ ठहरने के लिए धर्मशाला है एवं छोटे बड़े गेस्ट हाउस व होटल बने है आप अपने सुविधा अनुसार जहाँ चाहे रह सकते हैं। मधु सूदन मंदिर बौंसी का इतिहास history-of-madhu-sudana-mandira-baunsi

 

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