पापहरणी लक्ष्मी नारायण मंदिर का इतिहास history-of-papaharani-laksmi-narayaṇa-mandira

paap-harni-hill-imageपापहरणी लक्ष्मी नारायण मंदिर, बिहार प्रान्त के बांका जिला अंतर्गत बौंसी नगर में स्थित है जो प्रसिद्ध मंदार पर्वत की तराई में अस्थित है। पर्वत के तराई में स्थित यह पावन पवित्र तालाब अपने चमत्कारिक गुणों के कारण प्राचीन काल से प्रसिद्ध रहा है। मनोहारी वातावरण में बना यह जलाशय आज भी जनमानस के लिए कष्ट निवारण के कारण आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। इस जलाशय के बीच लक्ष्मी नारायण जी मंदिर का भव्य मंदिर बिराजमान है जिस कारण इस क्षेत्र को पाप हरणी लक्ष्मी नारायण मंदिर कहा जाता है।

कहा जाता है की किसी समय में भारत वर्ष में कांची पुर नामक स्थान में एक चोल राजा रहकर अपना राज काज चलाते थे। देव योग से राजा को कुष्ट रोग हो गया। राजा अपने राजपाट को छोरकर स्वास्थ्य लाभ के लिए देश के विभिन्न भागों में घूमते घामते इस क्षेत्र में पहुंचे, जहाँ आज यह पाप हरणी तलाव है। यहाँ आकर राजा को बहुत जोर की प्यास लगी। राजा ने अपने सहयोगियों से पीने लायक पानी लाने को कहा। लेकिन साथ चल रहे सिपाहियों एवमं मंत्रियों को कही भी पानी दिखाई नहीं दिया। कहा जाता है की किसी समय में भारत वर्ष में कांची पुर नामक स्थान में एक चोल राजा रहकर अपना राज काज चलाते थे।

देव योग से राजा को कुष्ट रोग हो गया। राजा अपने राजपाट को छोरकर स्वास्थ्य लाभ के लिए देश के विभिन्न भागों में घूमते घामते इस क्षेत्र में पहुंचे, जहाँ आज यह पाप हरणी तलाव है। यहाँ आकर राजा को बहुत जोर की प्यास लगी। राजा ने अपने सहयोगियों से पीने लायक पानी लाने को कहा। लेकिन साथ चल रहे सिपाहियों एवमं मंत्रियों को कही भी पानी दिखाई नहीं दिया।

इधर प्यास के मारे राजा का हाल बेहाल हो रहा था। हारकर अंगरक्षकों ने सामने के गढ़े से पानी निकल कर राजा को दिया जैसे ही राजा उस पानी को अपने अंजुली में लिया वैसे ही उनके हाथों का कुष्ठ रोग दूर हो गया। इस चमत्कार को देख कर राजा के ख़ुशी का ठिकाना नहीं रहा। वह ख़ुशी के मारे प्यास को भी भूल गया।

राजा ने उस गढ़े का पानी अपने ऊपर अंजुली मन भर भर कर स्नान करने लगा। जिससे राजा का चर्म रोग ठीक हो गया। उसी समय राजा ने इस चमत्कारिक गढ़े को और बड़ा करने का निर्णय लिया। यहाँ पर उन्होंने विशाल तालाब बनवाया। बाद में यहाँ एक मंदिर का भी निर्वाण करवाया गया।
आज भी प्रति दिन दूर दूर से श्रद्धालु यहाँ आते हैं और इस जलाशय में स्नान कर हर कष्टों से मुक्ति पाते है। लोगों में यह विश्वास प्रचलित है की चर्म रोग के रोगी जो यहाँ स्नान करते हैं उन्हें चरम रोग से मुक्ति मिल जाती है। कहा तो यहाँ तक जाता है की मर्यादा पुरूषोत्तम राजा राम एवं माता जानकी जी ने यहाँ स्नान करके ब्रह्म हत्या के पाप से मुक्ति पायी / इतना ही नहीं भगवान विष्णु मकर संक्रांति के दिन इसमें स्नान करते हैं। इसलिए आज भी श्रद्धा और विस्वास के साथ यात्री यहाँ भाड़ी संख्या में आते हैं और इसमें स्नान करके स्वयं को महापुण्य का भागी समझते हैं।
पाप हरणी लक्ष्मी नारायण मंदिर आने के लिए सड़क तथा रेल मार्ग दोनों ही उपयोगी है। रेलमार्ग से आने के लिए बिहार के भागलपुर से बौसी रेलवे स्टेशन उत्तर कर टेम्पो या टेक्सी लेकर २५- ३० मिनट में पाप हरणी मंदिर पंहुचा जा सकता है। यहाँ ठहरने के लिए धर्मशाला है एवं बौसी में छोटे बड़े गेस्ट हाउस व होटल बने है आप अपने सुविधा अनुसार जहाँ चाहे रह सकते हैं। पापहरणी लक्ष्मी नारायण मंदिर का इतिहास history-of-papaharani-laksmi-narayaṇa-mandira

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