मां काली पूजा की कथा एवं इतिहास

devotional maa kali puja history



हिन्दू धार्मिक ग्रंथों के अनुसार कार्तिक माह की अमावस्या की अर्धरात्रि में माँ काली पूजा की जाती है। तदनुसार इस वर्ष दिवाली से एक दिन पूर्व शनिवार 29 अक्टूबर 2016 को काली पूजा की जाएगी। बंगाली समाज में माँ काली पूजा का विशेष महत्व है। मान्यता अनुसार जो व्रती माँ काली की पूजा विधि पर्वक करता है। उसकी हर मनोकामनाएं माँ काली की कृपा से पूर्ण होता है। माँ काली का आह्वान ‘ओम ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चै’ के मंत्र जाप से किया जाता है। devotional maa kali puja history 

कथा devotional maa kali puja history 

पौराणिक कथानुसार जब माँ सती को अपने पिता के द्वारा आयोजित यज्ञ में अपमानित किया गया तो माँ सती यज्ञ कुंड में स्वंय को भस्म कर लिया तो भगवान शिवजी ने तांडव नाच कर तीनों लोक में संकट की स्थिति उतपन्न कर दी। तत्क्षण भगवान विष्णु जी ने सुदर्शन चक्र से माँ सती के शरीर को कई भागों में बाँट दिया। devotional maa kali puja history 

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माँ सती के शरीर के अंश जहां-जहां पर गिरा। उस स्थान पर शक्ति पीठ स्थापित हुआ। माँ सती के पैर के अंगुली हुगली नदी के तट पर जा गिरा। माँ सती के अंगुली धीरे-धीरे पत्थर में तब्दील हो गया। इसी स्थान पर कोलकाता में माँ काली का भव्य मंदिर स्थापित है। जिनकी विशेष पूजा कार्तिक माह की अमावस्या के दिन की जाती है। devotional maa kali puja history 

काली पूजा का महत्व devotional maa kali puja history 

भारत भर में जिस दिन दिवाली का पर्व मनाया जाता है। उस दिन भारत के पूर्व में बंगाल, असम, बिहार और ओडिशा राज्य में इस दिन माँ काली की विशेष पूजा की जाती है। माँ काली के भक्तों में राम कृष्ण परमहंस जी, विवेकानंद आदि थे। जिन्होंने माँ काली के सजीव रूप का दर्शन किया था। बंगाली समाज माँ काली की श्रद्धा-भाव और उत्साह-उमंग से पूजा करते है। माँ काली की कृपा सभी भक्त जनों पर बरसती है। devotional maa kali puja history 

माँ काली की  पूजा विधि devotional maa kali puja history 

इस दिन प्रातः काल ब्रम्ह मुहूर्त में उठें, घर की साफ़-सफाई करें। तत्पश्चात स्नान आदि से निवृत होकर व्रत संकल्प करें। माँ काली की प्रतिमा अथवा चित्र को एक चौकी पर स्थापित करें। माँ को लाल वस्त्र स्थापित कर उनके चित्र के सामने एक घी का दीप प्रज्वलित करें। ततपश्चात माँ काली की पूजा ‘ओम ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चै’ मन्त्र का उच्चारण कर प्रारम्भ करें। devotional maa kali puja history 

माँ काली की पूजा लाल पुष्प, लाल चावल, चन्दन, सिंदूर, दूर्वा, धुप-अगरबत्ती आदि से करें। प्रसाद के रूप मिष्ठान और फल का भोग लगाएं। तत्पश्चात माँ की आरती उतारें। पूजा सम्पन्न होने पर माँ काली से परिवार के कुशल, मंगल की कामना करें। इस दिन निराहार रहें। रात्रि में आरती करके फलाहार करें। इस प्रकार माँ काली की कथा सम्पन्न हुई। प्रेम से बोलिए माँ काली की जय।  devotional maa kali puja history 
( प्रवीण कुमार )




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