21 जनवरी 2019 को चंद्र ग्रहण पड़ेगा,जानिए कथा एवं महत्व

devotional chandra grahan historyहिंदी द्रिक पंचांग के अनुसार वर्ष 2019 के पौष माह में चन्द्र ग्रहण का सयोंग बन रहा है। तदनुसार,21 जनवरी 2019 को चन्द्र ग्रहण पड़ेगा। भौतिक विज्ञान के अनुसार जब पृथ्वी और चन्द्रमा के बीच में सूर्य आ जाता है तो सूर्य की ज्योति के कारण चन्द्र अदृश्य हो जाता है। इसी घटना को चन्द्र ग्रहण कहा जाता है। यह घटना पूर्णिमा को घटित होती है। devotional chandra grahan history 




सम्पूर्ण चन्द्र ग्रहण उस समय घटित होती है जब सूर्य पृथ्वी के अत्यधिक समीप रहते हुए पृथ्वी और चन्द्रमा के बीच में आ जाता है। इस स्थिति में सूर्य अपनी छाया से चन्द्रमा को ढक देती है। जिससे चन्द्रमा अदृश्य हो जाता है। इस प्रकार का ग्रहण चन्द्र ग्रहण कहलाता है।आंशिक चन्द्र ग्रहण उस समय घटित होती है जब सूर्य पृथ्वी और चंदमा के बीच में आ जाए तो इस घटना को आंशिक चन्द्र ग्रहण कहते है। devotional chandra grahan history 

चन्द्र ग्रहण की कथा वेदो,पुराणो तथा शास्त्रो में सूर्य ग्रहण एवम चन्द्र ग्रहण का कारण राहु-केतु को बताया गया है। पौराणिक कथा के अनुसार दैविक काल में जब देवताओ को अमृत पान तथा दैत्यों को वारुणी पान कराया जा रहा था तब इस बात की खबर दैत्य राहु को हुआ। दैत्य राहु छुपकर देवता की पंक्ति में जाकर बैठ गया परन्तु अमृत पान के पश्चात इस बात को सूर्य एवम चन्द्र ने उजागर कर दिया। दैत्य के इस कार्य के लिए भगवान विष्णु अति क्रोधित हो गए और उन्होंने तत्काल ही अपने सुदर्शन चक्र से दैत्य राहु का सर धड़ से अलग कर दिया। devotional chandra grahan history 

प्रेम से बोलिए भगवान चन्द्र देव की जय

जिससे दैत्य राहु का सर शरीर से अलग हो गया। परन्तु दैत्य राहु ने अमृत पान कर लिया था अतः वह निष्प्राण होने के बजाय ग्रहो की भांति हो गया। तदुपरांत, ब्रह्मा जी ने दैत्य राहु के दोनों हिस्सों में से एक राहु को चन्द्रमा छाया में जबकि केतु को पृथ्वी की चचाय में स्थान दिया है। अतः ग्रहण के समय राहु-केतु सूर्य और चन्द्रमा के समीप रहता है। इसलिए सूर्य या चन्द्र ग्रहण के समय राहु-केतु की पूजा करना मंगल प्रदान करने वाला है। राहु-केतु केवल सूर्य और चन्द्र ग्रहण के समय दिखाई देता है। devotional chandra grahan history 

नोसल पोलीप्स साइनस नाक के बढ़े हुए हड्डी का इलाज

भारतीय वैदिक काल और चन्द्र ग्रहण ऋग्वेद के अनुसार महान ऋषि वराहमिहिर को इस घटना का ज्ञान प्राप्त था तथा उन्होने परिवार को यह ज्ञान प्रदान किया था।वेदो, पुराणो और शास्त्रो के अनुसार जब राहु चन्द्रमा को और केतु सूर्य को ग्रसता है तो इससे ही सूर्य-चन्द्र ग्रहण पड़ता है। चन्द्र ग्रहण के समय जठरागिन, नेत्र तथा पित्त जैसी बीमारियो का प्रकोप बढ़ता है। गर्भवती स्त्री को सूर्य या चन्द्र ग्रहण का दीदार नही करना चाहिए। इससे ग्रभपत की संभावना बढ़ जाती है। इस दिन स्त्री को चाकू या कैची का प्रयोग नही करना चाहिए। यह धार्मिक मान्यताओ के अनुसार अशुभ है। devotional chandra grahan history

जानिए मैहर वाली माता शारदा की कथा एवं इतिहास

चन्द्र ग्रहण पूजन विधिचन्द्र ग्रहण के पश्चात नदी, तालाबों या घर में उपलब्ध जल से स्नान करके भगवान की पूजा तथा प्राथना करें। मान्यता यह भी है की ग्रहण के समय भजन-कीर्तन करना चाहिए। ऐसा करने से प्रभु की कृपा से साधक के हर कार्य सिद्ध होते है। ग्रहण के पश्चात ब्राह्मणो तथा निर्धनो को अपने सामर्थ्य अनुसार दान दे। दान में वस्त्र, बर्तन, अन्न आदि दिया जाता है। स्नान-ध्यान तथा पूजा करने के पश्चात भोजन पकाये। ग्रहण के पश्चात संभव हो तो डोम जाति को दान दे क्योकि राहु-केतु को डोम जाति का स्वरूप माना गया है। इस तरह चन्द्र ग्रहण की कथा तथा महत्व की गाथा सम्पन्न हुई । प्रेम से बोलिए भगवान चन्द्र देव की जय। devotional chandra grahan history 

( प्रवीण कुमार )



You may also like...