29 जनवरी 2018 को है प्रदोष व्रत जानिए व्रत की कथा एवं इतिहास

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वेदों, पुराणों एवम शास्त्रों के अनुसार वर्ष के प्रत्येक माह के दोनों पक्षों की त्रयोदशी को प्रदोष व्रत मनाया जाता है। तदनुसार, फाल्गुन माह में शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी सोमवार 29 जनवरी 2018 को प्रदोष व्रत मनाया जाएगा। कलयुग में प्रदोष व्रत का अतुल्य महत्व है, भगवान शिव जी के भक्त श्री सूत जी का कहना है की जो भक्त प्रदोष व्रत के दिन उपवास रख कर शिव जी की आराधना व् पूजा करते है, उनकी सारी मनोकामना पूर्ण होती है तथा सभी प्रकार का दोष दूर हो जाता है एवं परिवार में मंगल ही मंगल होता है।  devotional pradosh vrat 

माघ पूर्णिमा की कथा एवं इतिहास

प्रदोष व्रत प्रत्येक महीने के दोनों पक्ष की त्रयोदशी को पड़ता है । भक्तगण सप्ताह के सातो दिन व्रत रख सकते है। ऐसी मान्यता है की प्रदोष व्रत को करने से सप्ताह के सातो दिन भिन्न -भिन्न प्रकार की मनोकामनाएँ पूर्ण होती है।  devotional pradosh vrat 

रविवार को प्रदोष व्रत करने से शरीर निरोग रहता है, सोमवार को प्रदोष व्रत करने से इच्छित फल मिलता है , मंगलवार को प्रदोष व्रत करने से रोग से मुक्ति मिलती है , बुधवार को प्रदोष व्रत करने से सभी प्रकार की मनोकामना सिद्ध होती है । गुरुवार को प्रदोष व्रत करने से शत्रु का नाश होता है , शुक्रवार को प्रदोष व्रत करने से सौभाग्य में वृद्धि होती है , तथा शनिवार को प्रदोष व्रत करने से पुत्र की प्राप्ति होती है।  devotional pradosh vrat 



प्रदोष व्रत की महिमा

धार्मिक ग्रंथो एवं पुराणों के अनुसार गंगा नदी के तट पर भगवान शिव जी के भक्त श्री सूत जी ने प्रदोष व्रत की महिमा सनकादि ऋषियों को सुनाया था। भगवान शिव जी के भक्त श्री सूत जी ने कहा कलयुग में अधर्म की प्रधानता रहने वाली है और मनुष्य धर्म की राह छोड़ अधर्म की राह पर चलेगा।  devotional pradosh vrat 

कलयुग में चारो तरफ अशांति, अन्याय और आतंक होगा। मनुष्य अत्याचारी और अनाचारी बन अपने कर्तव्य से विमुख हो नीच कर्म में प्रयत्ननशील हो जायेगा जिसके कारण धर्म का पतन होने लगेगा। कलयुग में जो भक्त प्रदोष व्रत के दिन श्रद्धा और निष्ठा से भगवान शिव जी की पूजा व् आराधना करेगा उस पर भगवान शिव जी का स्नेह उमड़ेगा, भक्त की मनोकामना यथाशीघ्र पूरी होगी ।  devotional pradosh vrat 

भगवान शिव जी की कृपा से भक्त को मृत्यु उपरांत स्वर्गलोक की प्राप्ति होगी। भगवान शिव जी के भक्त श्री सूत जी ने सनकादि ऋषियों से कहा हे, ऋषि गण यह कथा पुर्व में पहली बार भगवान शिव जी के द्वारा माँ सती को सुनाया गया था आज यह पावन व्रत की महिमा और कथा मैंने आपको सुनाया है।  devotional pradosh vrat 

प्रदोष व्रत करने की विधि

भगवान भक्त सूत जी ने कहा है महीने की दोनों पक्ष अर्थात कृष्ण पक्ष तथा शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी के दिन को प्रदोष व्रत कहते हैं। इस दिन सूर्य अस्त के उपरांत तथा निशा पूर्व का समय प्रदोष काल कहलाता है। प्रदोष व्रत में गौरी पति महेश की पूजा की जाती है। प्रदोष व्रत के दिन जो भक्त भगवान शिव जी की उपासना एवं व्रत करते है उन्हें इस दिन निर्जल रहकर व्रत रखना होता है। प्रदोष व्रत के दिन भगवान शिव जी की प्रातःकाल और संध्या में बेल पत्र, गंगाजल, अक्षत, धूप, दीप से पूजा व् अर्चना करना चाहिए ।  devotional pradosh vrat 

प्रदोष व्रत के करने से महादेव प्रसन्न होते है और उनकी कृपा से भक्त के सारे दुःख व् कलेश दूर हो जाता है तथा भक्त मृत्यु उपरांत स्वर्गलोक प्राप्त करता है। इस तरह प्रदोष व्रत की कथा संपन्न हुयी प्रेम से बोलिए भगवान भोले शंकर की जय, माता पार्वती की जय।   devotional pradosh vrat 
( प्रवीण कुमार )

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