7 अगस्त 2018 को है कामिका एकादशी,जानिए व्रत की कथा एवम इतिहास

devotional nirjala ekadashi story

कामिका एकादशी का व्रत श्रावण माह के कृष्ण पक्ष के एकादशी दिन मनाई जाती है। तदनुसार इस वर्ष कामिका एकादशी 7अगस्त 2018 को मनाई जाएगी। इस व्रत के प्रभाव से जीवात्मा को पापो से मुक्ति मिलती है। इस एकादशी की कथा सर्वप्रथम भगवान श्री कृष्ण जी ने धर्मराज युधिष्ठिर को सुनाई थी। इस कथा स्वरण से उन्हें समस्त पापों से मुक्ति एवम मोक्ष प्राप्त हुआ था।

कामिका एकादशी कथा

प्राचीन काल में किसी गाँव में एक ठाकुर रहा करता था। ठाकुर बड़ा ही क्रूर तथा क्रोधी स्वभाव का व्यक्ति था। एक बार आवेश में आकर ठाकुर ने एक ब्राह्मण की हत्या कर दी। किन्तु क्रोध कम होने के पश्चात ठाकुर अपने अपराध हेतु ब्राह्मणो से क्षमा याचना करने लगा। किन्तु ब्राह्मण समज ने उसके क्षमा याचना को स्वीकार नही किया।

देवशयनी एकादशी की कथा एवम इतिहास

तत्पश्चात ठाकुर ने गाँव से दूर स्थित भगवान विष्णु जी के मंदिर पुजारी से अपनी व्यथा सुनाई। पुजारी ने ठाकुर के विनम्र भाव को सहजता स्वीकार कर कहा, जो हो गया सो हो गया। किन्तु यदि तुम अब अपने पाप का प्रायश्चित करना चाहते हो तो कामिका एकादशी का व्रत विधि पूर्वक करों।

भगवान विष्णु जी की कृपा से तुम्हें इस पाप से अवश्य मुक्ति मिलेगी। मंदिर के पुजारी के वचनानुसार ठाकुर कामिका एकादशी का व्रत विधि पूर्वक करता है। ठाकुर जब एकादशी की रात्रि में मंदिर में सोया रहता था तभी उसे स्वप्न में भगवान श्री हरि विष्णु जी दर्शन देते है तथा उसके पापो को दूर करने का क्षमा दान देते है।

कामिका एकादशी के दिन भगवान श्री विष्णु जी की पूजा करने से अमोघ फलों की प्राप्ति होती है। इस एकादशी की कथा सुनने मात्र से यज्ञ करने के समान फल प्राप्त होता है। जो व्रती कामिका एकादशी के दिन भगवान विष्णु जी की पूजा तुलसी पत्र से करता है उसके जीवन भर के पाप का नाश होता है। इस दिन दान करने का भी प्रावधान है। जो मनुष्य इस दिन दान-पुण्य करता है। उसे मोक्ष की प्राप्ति होती है एवम उनके पितरो को कष्ट दूर होते है।

कामिका एकादशी पूजा-विधि

कामिका एकादशी के दिन स्नान आदि से निवृत होने के पश्चात व्रत का संकल्प करें। भगवान विष्णु की पूजा फल, फूल, तिल, पंचामृत आदि से करना चाहिए। इस दिन निराहार उपवास करें। संध्या आरती के पश्चात फलाहार करें।
द्वादशी के दिन ब्राह्मणो को भोजन कराने के पश्चात उपवास व्रत को खोले। इस प्रकार कामिका एकादशी की कथा सम्पन्न हुई। प्रेम से बोलिए भवन श्री हरी विष्णु जी की जय।

( प्रवीण कुमार )

You may also like...