21 सितंबर 2018 को भुवनेश्वरी जयंती जानिए वर्त की कथा एवम इतिहास

devotional bhuvaneshwari jayanti history





हिन्दू धर्म के अनुसार भाद्रपद माह की शुक्ल पक्ष की द्वादशी को भुवनेश्वरी जयंती मनाई जाती है। तदनुसार इस वर्ष रविवार 21 सितंबर 2018 को भुवनेश्वरी जयंती मनाई जाएगी। माँ भुवनेश्वरी भगवान शिव जी की लीला की सहभागी है। इनका स्वरूप कांतिमय एवम सौम्य है। माँ भुवनेश्वरी की साधना से धन, वैभव, शक्ति एवम विद्या प्राप्त होती है। devotional bhuvaneshwari jayanti history 

देवी भुवनेश्वरी स्वरुप devotional bhuvaneshwari jayanti history 

माँ भुवनेश्वरी इस सृष्टि के ऐश्वर्य रूप की स्वामिनी है। माँ भुवनेश्वरी की चेतना में अनुभति का आनंद है। माँ के एकल स्वरूप में एक मुख, चार भुजा तथा चारों भुजा में गदा-शक्ति एवम दंड-व्यवस्था का प्रतीक है। माँ का वर्ण श्याम तथा गौर वर्ण है, इनके नख में ब्रह्माण्ड का दर्शन होता है। माँ सूर्य देव के समान लाल वर्ण युक्त दिव्य प्रकाश धारण किए हुई है।

माँ भुवनेश्वरी मंत्र devotional bhuvaneshwari jayanti history 

माँ भुवनेश्वरी का जाप मंत्र “ऐं हृं श्रीं ऐं हृं” के उच्चारण से करना चाहिए। इस मन्त्र जाप के उच्चारण से साधक को समस्त सुखों एवम सिद्धियों की प्राप्ति होती है।

भुवनेश्वरी जयंती महत्व devotional bhuvaneshwari jayanti history 

माँ भुवनेश्वरी के व्रत से व्रती पर माँ भगवती की कृपा बरसती है। माँ दयालु है और सबका पालन करती है। इनकी कृपा से व्रती को दिव्य दर्शन की अनुभूति प्राप्त होती है। इस अवसर पर मंदिरों में जाप, हवन और भंडारा का आयोजन किया जाता है। माँ की पूजा सभी भक्त गण अति श्रद्धा से करते है। devotional bhuvaneshwari jayanti history 




श्री भुवनेश्वरी पूजा-उपासना devotional bhuvaneshwari jayanti history 

माँ भुवनेश्वरी की साधना के लिए कालरात्रि, महाशिवरात्रि, होली, ग्रहण आदि शुभ माना गया है। इस दिन प्रातः काल उठें, स्नान अादि से निवृत होकर माँ भुवनेश्वरी की प्रतिमा को पूजा स्थल पर लाल रंग के वस्त्र बिछाकर स्थापित करें। devotional bhuvaneshwari jayanti history 

पद्मा एकादशी की कथा एवम इतिहास

माँ भुवनेश्वरी की पूजा लाल रंग के पुष्प, नैवेद्य, चन्दन, कुमकुम, रुद्राक्ष की माला, सिंदूर, फल आदि से करें। इस दिन निराहार उपवास रखें। सूर्य अस्त के पश्चात माँ भुवनेश्वरी की आरती-अर्चना करने के पश्चात फलाहार करें। इस प्रकार माँ भुवनेश्वरी की कथा सम्पन्न हुई। प्रेम से बोलिए माँ भुवनेश्वरी की जय।  devotional bhuvaneshwari jayanti history 
( प्रवीण कुमार )

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