शनि जयंती का इतिहास व कथा history and story of shanidev jayanti

Shani-Devशनिदेव की जयंती शनि अमावस्या के रूप में जाना जाता है। शनि देव सूर्यदेव केबेटा पुत्र हैं। हमारे देश में उत्तर भारत के लोग में शनि जयंती पुर्णिमा कैलेंडर के अनुसार ज्येष्ठ माह के दौरान अमावस्या तिथि को मनाया जाता है। जबकि दक्षिण भारतीय अमावस्या कैलेंडर के अनुसार शनि जयंती वैशाख माह के दौरान अमावस्या तिथि को मनाया जाता है। शनि जयंती उत्तर भारतीय राज्यों में ज्येष्ठ अमावस्या के दौरान मनाया जाता है, जो वट सावित्री व्रत के साथ मेल खाता है। शनि जयंती भक्तों व्रत रखने के लिए या उपवास करने के लिए , प्रभु शनि को संतुष्ट करना और भगवान शनिदेव का आशीर्वाद पाने के लिए शनि मंदिरों जाकर तेल तिल उड़द लोहा कला कपडा आदि दान करना चाहिए ।

भगवान शनिदेव कलयुग में भी निष्पक्ष न्याय में विश्वास कर ने वाले मनमाना जाते है और संतुष्ट होने पर अच्छी किस्मत और भाग्य के साथ अपने भक्त को हर मनोकामना पूर्ति का आशीर्वाद देते हैं । , शनि जयंती प्रभु शनि को खुश करने के लिए हवन और यज्ञ करने के लिए बहुत उपयुक्त दिन है। शनि तैलाभिषेकम और शनि शांति पूजा शनि जयंती के दौरान सबसे महत्वपूर्ण मन जाता है। इस दिन जिन जातक पर ढय्या साढ़े सटी का प्रकोप हो उसके लिए हवन पूजा बहुत ही लाभदायक माना जाता है। प्रेम से बोलिए भगवान शनिदेव जी की जय . शनि जयंती का इतिहास व कथा history and story of shanidev jayanti

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