विठोबा का इतिहासिक महत्व history-of-vithoba-importance

vithoba-imageविठोबा, विट्ठल, और पांडुरंग, तीन नामों से पुकारे जाने वाले भगवान विट्ठल महाराष्ट्र, कर्नाटक, गोवा, तेलंगाना और आंध्र प्रदेश के भारतीय राज्यों में मुख्य रूप से पूजे जाते हैं, भगवान विट्ठल, को आम तौर से भगवान विष्णु या उनके अवतार (अवतार) कृष्ण की एक मिसाल कहा गया है। विठोबा को महाराष्ट्र के अद्वैतवादी, गैर ब्राह्मण संप्रदाय और कर्नाटक के हरिदशा संप्रदाय के लोग अधिक पूजते हैं. कर्नाटक सीमा के पास महाराष्ट्र में पंढरपुर में उनके मुख्य मंदिर देखने को मिलते हैं.

पांडुरंग की प्रसिद्धि का श्रेय उनके एक भक्त पंडालिक को जाता है जो उन्हें पंधरपुर लाया था.. वरकारी आस्था के कवि-संतों के लिए विठोबा की भूमिका एक उद्धारकर्ता के रूप में रही है.. ये संत कवि अपने भक्ति रस के लिेए प्रख्यात है और अभंग जो उनकी स्तुति में गाये गये छन्दों को कहते हैं, मराठी भाषा में रचे गए.विठोबा के लिए समर्पित अन्य भक्ति साहित्य हरिदशा की कन्नड़ भजन, और सामान्य हिंदू आरती गाने के मराठी संस्करण भी शामिल हैं

अशाध माह के देवशयनी एकादशी और देव प्रबोधिनी एकादशी कार्तिक महीने में विठोबा के सबसे महत्वपूर्ण त्यौहारों हिंदू चंद्र महीने के एकादशी पर आयोजित की जाती हैं। विठोबा का इतिहास लेखन,धर्म, यहां तक की उनके नाम को लेकर आज भी काफी बहस छिड़ी हुई है…भारतीय उपमहाद्वीप की भाषाओं, ग्रन्थों, इतिहास, एवं संस्कृति का अध्ययन करने वाले कई भारतविद्यार्थियों का मानना है कि विभिन्न श्रद्धालुओं के लिए विभिन्न समय पर एक नायक पत्थर,शिव का स्वरूप, एक जैन संत, पहले से था जहां विठोबा पूजा के लिए एक प्रागितिहास का प्रस्ताव किया है।
अपने पंथ और उनके मुख्य मंदिर दोनों ही बारे में मूलरूप से बहस कर रहे हैं, जबकि ये सब पहले से ही 13 वीं सदी से ही अस्तित्व में है जिनका स्पष्ट सबूत भी है.
विठोबा पहले चरवाहो के भगवान के रूप में पूजे जाते थे .. विष्णु, कृष्,और बुद्ध के साथ उनको सम्मिलित किया जाता है…विठोबा एक शंकु के आकार का मुकुट पहनते हैं जो कि शिव लिंग का प्रतीक है। उनको एक सुंदर मुद्रा में दर्शाया गया है जहां एक श्यामल व्यक्ति ईंट पर अपनी कमर पर हाथ रख कर हथियारों के साथ खड़ा है, जिसके गले में तुलसी मोती का बना हार है, मछली के आकार की कानों में बालियां हैं, बाएं हाथ में शंख तथा दाहिने हाथ में एक कमल का फूल है..”विठोबा” शब्द दो शब्दों विट्ठा और ला को जोड़कर बनाया है, विट्ठा का अर्थ होता है अज्ञानता और ला का अर्थ है स्वीकार करना जिसका मतलब हुआ वह व्यक्ति जो अबोध लोगों को स्वीकार करता हो…अन्य सिद्धांत के तहत विट्ठू, विष्णु शब्द से उत्पन्न है तथा ला शब्द जिसका आशाय है पिता … एक और सिद्धांत के अनुसार विट का अभिप्राय है ईंट और थाल का अर्थ होता है खड़ा हुआ मतलब ईंट पर खड़ा हुआ… ईंट शस्त्र साधारण ग्रामीण जीवन का प्रतिनिधित्व करता है और विठोबा अक्सर गरीबों के रक्षक रहे हैं.

• 5/6 वीं शताब्दी में पुंडालिक नाम का एक व्यक्ति हुआ जो विष्णु भगवान की पूजा करता था और दांडीवाना नामक एक जंगल में अपने माता-पिता के साथ ही रहा करता था..वह विष्णु भगवान का भक्त होने के साथ साथ एक बहुत अच्छा पुत्र भी था जो अपने माता-पिता का बहुत ख़्याल रखता था..पर जब उसका विवाह हो गया तब उसने अपने माता-पिता को अनदेखा करना शुरू कर दिया और पत्नी पर उसका ध्यान ज्यादा केंद्रित रहने लगा..पुत्र के दुर्व्यवहार से शिथिल होकर माता-पिता तीर्थ यात्रा पर काशी पौदल निकल पड़े…जब पुंडालिक और उसकी पत्नी को पता चला तो वे दोनों तीर्थस्थान पर जाने का फैसला करते हैं.

तीर्थस्थान पर पहुंचने के बाद उसकी भेंट माता पिता से होती है जिनसे वह अपने घोड़ों की सेवा तथा अन्य कार्य करने को कहता है.. जिससे वे बहुत अप्रसन्न होते हैं ..जब भी रात को काफिला रुकता.. उनसे कठिन कार्य करवाता था…एक दिन काफिला भारत के कुकुट्स्वामि आश्रम पहुंचा जो कि एक समय में अपनी विचारशीलता के लिए उत्कृष्ट था….लंबी यात्रा के चलते यात्री काफी थक गए थे तो उन्होंने सोचा कि क्यों ना दो रातें कुकुट्स्वामि आश्रम में ही बिता ली जाए…सब लोग रात को वहीं ठहर गए…सारे लोग सो गए पर पुंडालिक को नींद नहीं आ रही थी…कुछ ही समय में वो देखता है कि मिट्टी से मैले कपड़ों में एक बहुत ही सुंदर कान्याओं की टोली आ रही है.

यह कन्याएं फर्श धोती हैं, संत के वस्त्र साफ करती हैं ये सारे कार्यों से निबटने के बाद पूजा कक्ष में जाती हैं …कुछ समय के बाद जब वे पूजा कक्ष से बाहर आती हैॆं तो उनके वस्त्र एकदम साफ सुथरे और बिना धब्बोॆ के प्रतीत होते हैं …उसके बाद शीघ्र ही वे सभी वहां से बिना किसी स्पष्टीकरण के ओझल हो जाती हैं …पुंडालिक इन कन्याओं से सम्मोहित हो जाता है और उनके बारे में अधिक जानने की कोशिश करता है..अगली बार जब वे स्त्रियां आती हैं तो पुंडालिक उनसे पूछता है कि कौन है वो .

वे स्त्रियां उसे बताती हैं कि वो गंगा यमुना नदियों का स्वरुप हैं जहां तीर्थयात्री अपने अपने पाप धोते हैं ..साथ ही उसको ये भी बताया कि वह दुनिया का सबसे बड़ा पापी है क्योंकि वह अपने माता पिता के साथ खराब बर्ताव करता है. उनकी टिप्पणी से पुंडालिक दंग रह गया और उसके बाद उसमें परिवर्तनकारी बदलाव आ गया । और वह एक बार फिर से एक समर्पित पुत्र बन जाता है और अपने माता पिता को लेकर वापस दांडीवाना जंगल पहुंच जाता है. तआ आजीवन उनका सेवा करता है. विठोबा के बारे में अनुश्रुति है कि उनकी भूमिका आमतौर पर अपने भक्त पुंडालिक या वरखारी आस्था के कवि-संतों के लिए एक उद्धारकर्ता के रूप में केंद्रित है. विठोबा का इतिहासिक महत्व history-of-vithoba-importance

You may also like...

Leave a Reply