नागेश्वर महादेव का इतिहास

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नागेश्वर महादेव के प्रांगण में बने इस कुण्ड के बारे में यहाँ जनश्रुतियों में एक कथा प्रचलित है की एक बार रेणुका देवी अपने पति के सेवा हेतु जल लेने के लिए भागीरथी के तट पर आई। उस समय यहां नदी में कुछ गन्धर्व जोड़े जल विहार कर रहे थे। उन्हें देखने से रेणुका को देर हो गई इससे जमदग्नि ऋषि को क्रोध आ गया उसने अपनी दिव्य दृष्टि से देखा तो पाया की रेणुका के मन में पाप आ गया था। नागेश्वर महादेव का इतिहास nageshwar mahadev history 

परशुराम भगवान विष्णु के एक अवतार माने जाते हैं

इससे ऋषि का क्रोध और भड़क गया उधर पतिव्रता रेणुका का ध्यान भग्न होने से शिर पर जो घड़ा था वह नीचे गिड़ गया जिससे यहाँ पर इस कुण्ड का निर्माण हो गया। देर से लौटने वह भी बिना जल के इसने काम ने ऋषि के क्रोधाग्नि को भड़काने के लिए आग में घी का काम किया। nageshwar mahadev history 

मिल गया खूबसूरती बढ़ाने का असली फार्मूला

क्रोधित ऋषि ने तुरंत अपने पुत्रों को बुलाया और अपनी माता रेणुका का गर्दन काटने का आदेश दिया। इस भयानक कर्म को करने के लिए जब कोई ऋषि पुत्र तैयार नही हुए तब परशुराम जो दशावतार में भगवान विष्णु के एक अवतार माने जाते हैं,उन्होंने अपनी फरसे से अपनी माता का गर्दन काटने के साथ साथ भाइयों का शिर भी धर से अलग अपने पिता के आदेश से कर दिया पितृ भक्ति से प्रशन्न जमदग्नि ऋषि ने परशुराम से वरदान मांगने को कहा तब उन्होंने पुनः अपनी माँ एवं भाइयों को जिन्दा करने का वर माँगा। ऋषि ने तथास्तु कह कर सबको जीवित कर दिया जिसका उन्हें बाद में स्मरण भी नहीं रहा। इस प्रकार इस नागेश्वर महादेव ने अपनी लीलाओं एवं चमत्कारों से आदि काल से लेकर आज तक अनगिनत चमत्कार किये हैं जिसकी अनुभूतियाँ यहाँ आने वाले भक्तों के मुख से सुनी और देखी जा सकती है। nageshwar mahadev history




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