19 मार्च  2018 को है झूलेलाल जयंती,जानिए कथा एवम इतिहास

story-and-history-of-jhulelal-jayanti



झूलेलाल जयंती चैत्र माह में शुक्ल पक्ष की द्वितीया को मनाया जाता है। इस वर्ष झूलेलाल जयंती बुधवार 19 मार्च  2018 को मनाया जायेगा। झूलेलाल जयंती सिंधी समाज का सबसे बड़ा पर्व है। झूलेलाल भगवान वरुण देव का अवतार रूप है। झूलेलाल उत्स्व चेटीचंड का पर्व सिंधी समाज वैदिक काल से मनाता आ रहा है। झूलेलाल के अन्य नाम हिन्दू धर्म में भगवान झूलेलाल के अन्य नाम उदेरोलाल, ललसाई, अमरपाल, जिन्दपीर, लालशाह आदि है। झूलेलाल को जल का देवता माना जाता है। devotioanl jhulelal jayanti history 




झूलेलाल की कथा

एक बार की बात है सिंध प्रदेश में राजा मिरक नामक राजा राज करता था। राजा मिरक बड़ा ही दम्भी तथा अहंकारी था। स्वभाव के अनुसार राजा सदैव अपने प्रजा पर अत्याचार करता रहता था। पूरा सिंध प्रदेश राजा मिराक के अत्याचार से त्रस्त था। परन्तु उन्हें इससे मुक्ति पाने का कोई मार्ग प्रशस्त नही हो रहा था। अंततः सिंध प्रदेश के लोगो ने देवता की शरण ली। devotioanl jhulelal jayanti history 

जब समस्त सिंधु प्रदेश के त्रस्त लोग सिंधु नदी के तट पर पूजा कर रहे थे उस समय समुद्र में से मत्स्य पर सवार होकर जल देव अर्थात वरुण देव ने लोगो को दर्शन देकर कहा निकट भविष्य में मैं नसरपुर की ठाकुर भाई रतनराय के घर माता देवकी के गर्भ से जन्म लूँगा। तत्पश्चात आप लोगो को राजा मिरक के अत्याचार से मुक्ति मिलेगी। वरुण देव के कथानुसार चैत्र माह में शुक्ल पक्ष को शक संवत 1007 में झूलेलाल का जन्म हुआ। इनके पिता ने इनका नाम उदेरोलाल रखा। कुछ समय पश्चात जब राजा मिरक को इस बात की खबर हुई तो उसने अपने सैनिको को झूलेलाल की हत्या करने के लिए भेजा। devotioanl jhulelal jayanti history 

परन्तु झूलेलाल ने अपने दिव्य शक्ति से राजा के सैनिको को परास्त कर दिया तथा राजा मिरक के महल में आग लगा दी। तत्पश्चात राजा मिरक झूलेलाल की महिमा जान कर उनके चरणो में आकर गिर पड़े। झूलेलाल ने राजा मिरक को माफ़ कर दिया। इस दिन से ही राजा मिरक झूलेलाल का शिष्य बन गया। राजा मिरक ने कुरुक्षेत्र में झूलेलाल का एक भव्य मंदिर बनबाया जो आधुनिक काल में भी अवस्थित है। devotioanl jhulelal jayanti history 

भगवान झूलेलाल की पूजन विधि तथा महत्व devotioanl jhulelal jayanti history 

भगवान झूलेलाल को जल एवम ज्योति का अवतार माना गया है। अतः इस दिन लोग काष्ठ का एक मंदिर बनाकर उसमें एक लोटी से जल तथा ज्योति प्रज्वलित की जाती है। झूलेलाल जयंती के दिन श्रद्धालु इस मंदिर को सिर पर उठाकर भगवान वरुण देव का स्तुति गान करते है। devotioanl jhulelal jayanti history 

कामदा एकादशी की कथा एवम इतिहास

सिंधी समुदाय को भगवान झूलेलाल में अत्यधिक विस्वास है। ऐसा माना जाता है कि झूलेलाल जयंती के दिन से लगातार 4 दिन तक जो भक्त भगवान झूलेलाल की पूजा विधि-विधान पूर्वक करता है उसके सारे कष्ट दूर हो जाते है तथा उसके जीवन में सुख का आगमन होता है। इस तरह भगवान झूलेलाल की कथा सम्पन्न हुई। प्रेम से बोलिए भगवान वरुण देव के रूप झूलेलाल की जय।  devotioanl jhulelal jayanti history 
( प्रवीण कुमार )

loading…


You may also like...