26 फरवरी 2018  को है आमलकी एकादशी,जानिए व्रत की कथा एवं इतिहास

devotional aamlaki ekadashi vrat katha




हिन्दी धर्म के अनुसार एकादशी व्रत का अति महत्वपूर्ण स्थान है तथा प्रत्येक वर्ष में 24 एकादशी होता है जबकि अधिकमास में 26 एकादशी पड़ता है। वर्ष के प्रत्येक माह में 2 एकादशी व्रत मनाया जाता है। एक कृष्ण पक्ष में दूसरा शुक्ल पक्ष में पड़ता है। फाल्गुन माह के कृष्ण पक्ष की एकादशी को विजया एकादशी कहते है जबकि शुक्ल पक्ष की एकादशी को आमलकी एकादशी कहते है। इस वर्ष फाल्गुन माह में शुक्ल पक्ष की आमलकी एकादशी सोमवार 26 फरवरी 2018  को मनाई जाएगी। devotional aamlaki ekadashi vrat katha

आमलकी एकादशी की कथा

युधिष्ठिर ने भगवान श्रीकृष्ण से कहा, हे प्रभु। विजया एकादशी के बारे में तो आपने बताया। अब कृपा कर फाल्गुन माह में शुक्ल पक्ष की एकादशी को किया कहते है तथा इसकी कथा और व्रत विधि के बारे में बताये। भगवान श्रीकृष्ण बोले, फाल्गुन माह में शुक्ल पक्ष की एकादशी को आमलकी एकादशी कहते है। एक बार भगवान विष्णु ने जब अवज्ञा प्रकट किया तो उससे चन्द्रमा के समान कांतिमान एक बिंदु धरा पर प्रकट हुआ। devotional aamlaki ekadashi vrat katha

इससे ही आंवला वृक्ष उतपन्न हुआ। इसी समय भगवान विष्णु ने प्रजा की सृष्टि के लिए भगवान ब्रह्मा जी की उत्पत्ति किया तथा ब्रह्मा जी ने देवता, गन्धर्व, यक्ष, राक्षस, दानव आदि की उत्पत्ति किया। ऋषि तथा देवता गण उस वृक्ष के पास आये। सभी उस वृक्ष को देखकर आश्ध्र्य चकित हो गए क्योकि उन्होंने अभी तक इस प्रकार के वृक्ष के बारे में नही जानते थे। तभी आकाशवाणी हुई ” महर्षियो यह वृक्षों में सर्वश्रेष्ठ वृक्ष आमलक है, जो विष्णु को अति प्रिय है। इसके स्मरण मात्र से गोदान का फल प्राप्त होता है जबकि स्पर्श करने से दुगुना एवम फल का स्वादन करने से तिगुना फल की प्राप्ति होती है। devotional aamlaki ekadashi vrat katha

प्रेम से बोलिये भगवान् श्री हरि विष्णु की जय

यह वैष्णव वृक्ष पापो को हरने वाला है। इसके मूल में विष्णु, ब्रह्मा तथा भगवान शंकर है, शाखाओ में मुनि, टहनियों में देवता, पत्तो में वसु, फूलो में मरुद्गण तथा फलो में समस्त प्रजापति वास करते है। अतः यह आमलक वृक्ष विष्णु भक्त के लिए पूजनीय है। ऋषि गण बोले, आप कौन है ? आकाशवाणी हुई, जो भूतो के ज्ञाता तथा वर्तमान एवम भविष्य का कर्ता है। जो अदृश्य अवस्था में सर्व व्याप्त है। मैं वो सब हूँ। मैं सनातन विष्णु हूँ। devotional aamlaki ekadashi vrat katha




मासिक दुर्गाष्टमी की कथा एवं इतिहास

तत्पश्चात, ऋषिगण भगवान विष्णु की स्तुति करने लगे। भगवान विष्णु प्रसन्न होकर बोले, ऋषियों आपको किया वरदान चाहिए। ऋषि गण बोले, भगवन। यदि आप प्रसन्न है तो हम लोगो के हिट के लिए ऐसा कोई उपाय बताइये जिसके करने से स्वर्ग और मोक्ष की प्राप्ति हो। भगवन विष्णु बोले फाल्गुन माह में शुक्ल पक्ष के एकादशी को आमलकी एकादशी का व्रत जो कोई करेगा। उसे मनोवांछित फ की प्राप्ति होगी। ऋषिगण बोले, भगवान इस व्रत को करने का विधि भी बताये। devotional aamlaki ekadashi vrat katha

आमलकी एकादशी पूजन विधि

भगवान विष्णु जी ने कहा, इस दिन प्रातः काल उठकर स्नान आदि से निवृत होकर सर्वप्रथम संकल्प ले। हे अच्युत। हे हरि। मैं आमलकी एकादशी व्रत को निराहार रहकर दूसरे दिन भोजन ग्रहण करूंगा। आप मुझे अपने शरण में रखे। तत्पश्चात, आवला वृक्ष स्थल को गंगाजल, गोबर आदि से शुद्ध करे। आवला वृक्ष के निचे भगवान विष्णु की पूजा फल, फूल, धुप, दीप पंचमेवा आदि से करे। पूजा समाप्ति के पश्चात भगवान विष्णु से सुख, शांति और मंगल की कामना करे। भगवान विष्णु की कृपा से व्रती को समस्त पापो से मुक्ति मिलती है। devotional aamlaki ekadashi vrat katha

आमलकी एकादशी का महत्व

आमलकी एकादशी अर्थात आंवला को शास्त्रो में उसी प्रकार श्रेष्ठ स्थान प्राप्त है जैसे गंगा को नदियों में प्राप्त है। वेदो, पुराणो एवम शास्त्रो के अनुसार जब भगवान विष्णु ने ब्रह्माण्ड की उत्पत्ति की तो उन्होंने एक आंवला वृक्ष को भी प्रतिष्ठित किया है। अतः आंवला के हर अंग में प्रभु का अंश माना गया है। भगवान श्री हरि विष्णु जी ने कहा है जो प्राणी स्वर्ग एवम मोक्ष की कामना करता है उसे फाल्गुन माह में शुक्ल पक्ष की आमलकी एकादशी का व्रत करना चाहिए। devotional aamlaki ekadashi vrat katha

( प्रवीण कुमार )

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