12 अक्टूबर 2017 को है अहोई अष्टमी, जानिए व्रत की कथा एवं इतिहास

devotional Ahoi Ashtami history



हिन्दू धार्मिक ग्रंथों के अनुसार कार्तिक माह की कृष्ण पक्ष की अष्टमी को अहोई अष्टमी मनाई जाती है। तदनुसार इस वर्ष गुरुवार 12 अक्टूबर 2017 को अहोई अष्टमी मनाई जाएगी। अहोई व्रत को अहोई आठे व्रत के नाम से भी जाना जाता है। महिलाएं इस व्रत को संतान की लम्बी आयु की कामना के लिए करती है। इस व्रत को विधि-पूर्वक करने से संतान की प्राप्ति होती है। devotional Ahoi Ashtami history 

अहोई अष्टमी व्रत कथा devotional Ahoi Ashtami history 

धार्मिक कथा अनुसार प्राचीन काल में किसी नगर में एक साहूकार रहता था। साहूकार को सात लड़के थे। एक बार साहूकार का पूरा परिवार दीपावली के लिए घर की साफ-सफाई कार्य में जुटे थे। घर की लीपा-पोती के लिए साहूकार की पत्नी नदी के पास खदान से मिट्टी लेने गई। खदान में एक सेह की मांद थी। साहूकार की पत्नी के कुदाल लगने से सेह के बच्चे की मृत्यु हो गई। devotional Ahoi Ashtami history 

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यह देखकर साहूकार की पत्नी दुखी हो गई। शोकाकुल होकर वह घर लौट आई। सेह के श्राप से साहूकार के बड़े बेटे का निधन हो गया। कुछ दिनों के बाद दूसरे बेटे की मृत्यु हो जाती है। एक-एक कर साहूकार के सातों संतान की मौत हो जाती है। इस कारण साहूकार और साहूकार की पत्नी दुखी रहने लगे। devotional Ahoi Ashtami history 

एक दिन उसने साहूकार की पत्नी रोते हुए अपनी दुःख भरी कथा पास-पड़ोस कि महिलाओं को बताती है। यह सुनकर पड़ोस की एक वृद्ध महिला ने उसे ढांढस दिलाया कि तुमने जो पाप किया है उसका आधा पाप नष्ट हो गया है। तुम माता अहोई अष्टमी के दिन माता भगवती की शरण में सेह और सेह के बच्चों का चित्र बनाकर उनकी पूजा-अर्चना करों और उनसे क्षमा याचना करों। devotional Ahoi Ashtami history 

माँ भगवती की कृपा से तुम्हारा कल्याण होगा। साहूकार की पत्नी ने वृद्ध महिला की आदेशानुसार कार्तिक माह में कृष्ण पक्ष की अष्टमी को विधि पूर्वक अहोई व्रत करती है। साहूकार की पत्नी नियमित रूप से अहोई व्रत करती है। समय के साथ साहूकार की पत्नी को सात पुत्र की प्राप्ति हुई। तब से अहोई व्रत की परम्परा प्रारम्भ हुई। devotional Ahoi Ashtami history  




अहोई अष्टमी व्रत विधि devotional Ahoi Ashtami history 

अहोई व्रत के दिन प्रातः काल उठें, स्नान आदि से निवृत होकर व्रत का संकल्प करें। तत्पश्चात माँ भगवती की प्रतिमा को स्नान कराकर लाल वस्त्र पहनाएं। माँ भगवती का श्रृंगार कर माता की प्रतिमा को एक चौकी पर स्थापित करें। ततपश्चात एक कलश स्थापित कर माँ भगवती की पूजा प्रारम्भ करें। devotional Ahoi Ashtami history 

माँ की पूजा फल, फूल, दूर्वा, चन्दन, सिंदूर, धुप, दीप आदि से करें। पूजा सम्पन्न होने पर माता अहोई से पुत्र की दीर्घाय और सुखमय जीवन हेतु कामना करें। माता से प्रार्थना करें, हे माँ- मैं पानी संतान की शुभता, उनत्ति और आयु वृद्धि के लिए कामना कर रही हूँ। माँ मुझे शक्ति दें ताकि मैं यूं ही आपकी पूजा-भक्ति करती रहू। devotional Ahoi Ashtami history 

इस दिन निराहार उपवास रखें। उपवास के दौरान क्रोध ना करें। व्रत के दिन दिन में सोना नहीं चाहिए। संध्या काल में अहोई माता की पूजा-आरती करने के पश्चात अपने सास-ससुर और बड़ों को पैर छूकर आशीर्वाद लें। ततपश्चात तारों को दर्शन कर व्रत का समापन करें। व्रत समापन के समय अपने पुत्र से जल ग्रहण कर भोजन करें। इस प्रक़र अहोई व्रत की कथा सम्पन्न हुई। प्रेम से बोलिए माँ भगवती की जय।  devotional Ahoi Ashtami history 
( प्रवीण कुमार )

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