6 सितम्बर 2018 को है अजा एकादशी जानिए व्रत की कथा एवम इतिहास

devotional aja ekadashi history


हिन्दू धर्म में एकादशी व्रत का विशेष महत्व है। एकादशी व्रत प्रत्येक माह के दोनों पक्षों में मनाई जाती है। भाद्रपद माह में कृष्ण पक्ष की एकादशी को अजा एकादशी कहा जाता है। तदनुसार शुक्रवार 6 सितम्बर 2018  को अजा एकादशी मनाई जाएगी। एकादशी व्रत के करने से मनुष्य के सभी पापों का नाश होता है। devotional aja ekadashi history 

अजा एकादशी कथा devotional aja ekadashi history 

अजा एकादशी की कथा सतयुग के महान सत्यवादी व्यक्ति राजा हरिश्चंद्र से जुडी हुई है। राजा हरिश्चंद्र अत्यंत वीर प्रतापी एवम सत्यवादी राजा थे। राजा अपनी सत्यता एवम वचन बद्धता हेतु पत्नी एवम पुत्र को बेच देते है तथा स्वंय भी चांडाल का सेवक बन जाता है।

एक दिन जब राजा हरिश्चंद्र श्मशान में अर्धरात्रि के समय पहरा दे रहे थे उस समय एक अबला औरत अपने पुत्र के शवदाह के लिए आती है। राजा उससे शवदाह के लिए “कर” देने को कहते है। किन्तु अबला औरत के पास धन नही होता है इस कारण वह “कर” अदा नही कर पाती है। devotional aja ekadashi history 

राजा हरिश्चंद्र कहते है, हे नारी जब तक “कर” नही अदा करते तब तक शवदाह नही किया जायेगा। यह सुनकर नारी रोने लगती है। तभी आकाशीय बिजली चमकती है। इस रोशनी में जब राजा हरिश्चंद्र अपने पुत्र रोहित एवम पत्नी तारामती को देखते है तो उनके आँखों से आंसू झलकने लगते है। devotional aja ekadashi history 

आकाश की तरफ देखकर राजा हरिश्चंद्र कहते है अब और कितना परीक्षाएं लेंगे। भावुकता के भॅवर में राजा हरिश्चंद्र को कर्तव्य पालन की याद आती है। राजा हरिश्चंद्र उसी क्षण अपनी पत्नी तारामती को “कर” अदायगी के लिए कहता है।

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तत्पश्चात रानी तारामती अपने शरीर से लिपटी हुई आधी साड़ी में से चीरकर एक टुकड़ा शवदाह के कफ़न के लिए कर में देती है। तभी भगवान विष्णु जी प्रकट होकर बोले, हरिश्चंद्र तुमने सत्य को अपने जीवन में धारण करके उच्चतम आदर्श को प्रस्तुत किया है। devotional aja ekadashi history 

अजा एकादशी के दिन तुमने विधि पूर्वक इस व्रत को किया है। तुम धन्य हो, तुम्हारा नाम इतिहास में युगों-युगों तक रहेगा। मैं तुम्हारी भक्ति और सत्यता से प्रसन्न हूँ। तदोपरांत हरिश्चंद्र बोलें, प्रभु यदि आप मेरी सत्यता तथा भक्ति से प्रसन्न है तो कृपा कर इस नारी के पुत्र को जीवित कर दें। भगवान विष्णु जी तथास्तु कहकर अंतर्ध्यान हो गए। राजा हरिश्चंद्र का पुत्र जीवित हो उठा। विश्वामित्र जी ने भी समस्त राज-पाट राजा हरिश्चनद्र को लौटा दिया। devotional aja ekadashi history 




अजा एकादशी व्रत का महत्व devotional aja ekadashi history 

समस्त उपवासों में एकादशी व्रत को श्रेष्ठ माना गया है। अजा एकादशी के दिन व्रती को अपने चित, इन्द्रियों, आहार तथा व्यवहार पर सयंम रखना पड़ता है। एकादशी का व्रत मनुष्य को अर्थ-काम से उठकर मोक्ष तथा धर्म मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है। devotional aja ekadashi history 

पौराणिक मान्यता के अनुसार व्रत के प्रभाव से व्रती को अश्वमेघ यज्ञ, कठिन तप, तीर्थो में स्नान-दान आदि से मिलने वाले फलों से अधिक फल-पुण्य की प्राप्ति होती है। इस उपवास से मन निर्मल, ह्रदय शुद्ध तथा सदमार्ग की ओर मनुष्य प्रेरित होता है। devotional aja ekadashi history 

अजा एकादशी व्रत पूजा devotional aja ekadashi history 

अजा एकादशी करने वाले व्रती को दशमी तिथि से व्रत के नियम का पालन करना पड़ता है। दशमी तिथि को चना, करोंदा, मसूर की दाल, शाक, शहद आदि नही खाना चाहिए। इस दिन से अजा एकादशी के लिए ब्रह्मचर्य नियम का पालन करना चाहिए। devotional aja ekadashi history 

एकादशी के दिन सूर्योदय से पूर्व उठें, उठने के बाद नित्यक्रिया से मुक्त होने के बाद, घर की सफाई करें, घर को गंगाजल से शुद्ध कर लेना चाहिए। तत्पश्चात स्नान करने के बाद हस्त में पुष्प तथा अक्षत लेकर अजा एकादशी व्रत का संकल्प करना चाहिए।

भगवान विष्णु जी प्रतिमा को पूजा स्थल पर स्थापित कर उनकी पूजा धुप, दीप, अक्षत, दूर्वा, अक्षत, फल, फूल आदि से करना चाहिए। व्रत के दिन व्रती को निराहार रहना चाहिए। संध्या काल में पूजा-आरती करने के पश्चात फलाहार करें। devotional aja ekadashi history 

द्वादशी के दिन पूजा-दान करने के पश्चात व्रत को तोड़े। भगवान विष्णु जी की कृपा से व्रती के जीवन में सुख,शांति एवम मंगल आगमन होता है। इस प्रकार अजा एकादशी की कथा सम्पन्न हुई। प्रेम से बोलिए भगवान विष्णु जी की जय।  devotional aja ekadashi history 
( प्रवीण कुमार )

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