23 सितंबर 2018 को है अनंत चतुर्दशी जानिए व्रत की कथा एवं इतिहास

devotional anant chaturdashi history



वेदों, पुराणों एवम शास्त्रों के अनुसार भाद्रपद मास के शुक्लपक्ष की चतुर्दशी को अनन्त चतुर्दशी मनाई जाती है। तदनुसार इस वर्ष मंगलवार 23 सितंबर 2018 को अनंत चतुर्दशी का मनाई जाएगी। इस दिन गणपति विसर्जन भी किया जाता है। देश भर में आज के दिन अनंत चतुर्दशी बड़े हो हर्षोउल्लास के साथ मनाई जाती है। devotional anant chaturdashi history 

अनंत चतुर्दशी की कथा devotional anant chaturdashi history 

इस दिन भगवान विष्णु के निम्मित अनंत देव की पूजा करके संकटों से रक्षा करने वाला अनन्तसूत्र अर्थात अनंत धागा बांधा जाता है। ऐसा माना जाता है कि जब पाण्डव जुए में कौरव से अपना सारा राज-पाट हारकर वन में वनवास भोग रहे थे, उस समय भगवान श्रीकृष्ण जी ने पांडवों को अनन्तचतुर्दशी का व्रत करने की सलाह दी थी। devotional anant chaturdashi history 

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भगवान् श्रीकृष्ण जी के वचनानुसार धर्मराज युधिष्ठिर ने समस्त पांडव परिवार के साथ विधि-विधान से यह व्रत कर अनन्तसूत्रधारण किया। पांडव द्वारा किये गए अनन्तचतुर्दशी-व्रत प्रभाव से पाण्डव सब संकटों से मुक्त हो गए। devotional anant chaturdashi history 




विधि devotional anant chaturdashi history 

इस दिन प्रातःकाल ब्रह्म मुहूर्त में उठें, उठने के पश्चात स्नान ध्यान से निवृत होकर व्रत का संकल्प करें। शास्त्रों में व्रत का संकल्प एवं पूजा करने का प्रावधान किसी पवित्र नदी या सरोवर के तट पर है, तथापि वर्तमान में ऐसा संभव नहीं है। devotional anant chaturdashi history 

अतः घर में पूजागृह की स्वच्छ भूमि पर कलश स्थापित कर कलश पर शेषनाग की शैय्यापर लेटे भगवान विष्णु जी की मूर्ति को स्थापित करें। तत्पश्चात, भगवान् श्री हरि विष्णु की पूजा पत्र, पुष्प, धुप, सुगन्ध, फल, दूर्वा आदि से करें, तथा पूजा स्थल के समक्ष चौदह ग्रंथियों (गांठों) से युक्त अनन्तसूत्र (डोरा) रखें। devotional anant chaturdashi history 

तदोउपरांत ॐ अनन्तायनम: मंत्र से भगवान विष्णु तथा अनंतसूत्रकी षोडशोपचार का जाप करें। पूजनोपरांत अनन्तसूत्र को निम्न मंत्र पढकर पुरुष अपने दाहिने हाथ में और स्त्री अपने बाएं हाथ में धारण करें
अनंन्तसागरमहासमुद्रेमग्नान्समभ्युद्धरवासुदेव।
अनंतरूपेविनियोजितात्माह्यनन्तरूपायनमोनमस्ते॥

अनंतसूत्रबांध लेने के पश्चात ब्राह्मण को भोजन ग्रहण कराएं, भोजन कराने के पश्चात उन्हें दान दक्षिणा देकर आशीर्वाद ले। तदोउपरांत, प्रसाद और भोजन ग्रहण करें। भगवान् श्री हरि विष्णु जी सच्चे दिल से पूजा करने वाले की सारी मनोकामनाएं पूर्ण होती है। इस प्रकार अनन्त चतुर्दशी की कथा सम्पन्न हुई, प्रेम से बोलिये भगवान् श्री हरि विष्णु जी की जय। devotional anant chaturdashi history 
( प्रवीण कुमार )

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