जानिए बैशाखी का महत्व एवम इतिहास

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वैसाखी का पर्व पंजाब सहित उत्तर एवम पूर्व भारत में बड़े ही उत्साह और उमंग से मनाया जाता है। इस समय रबी की फसल पकने से किसानो के चेहरे की चमक देखने लायक होती है। पृथ्वी से अच्छी फसल का तैयार होना कुदरत की देंन है। किसान अच्छी फसल की पैदावार होने के लिए कुदरत का धन्यवाद नाच-गान के जरिये करते है और इस खुशियो को लोग एक दूसरे के घर जाकर बांटते है। हर वर्ष बैसाखी 13 अप्रैल को मनाया जाता है। devotional baishakhi history

बैसाखी की कथा

इतिहास में वैशाखी पर्व का विशेष महत्व है। पौराणिक कथाओ के अनुसार ब्रह्मा जी ने सृष्टि की रचना इसी दिन की थी। त्रेता युग के मर्यादा पुरषोत्तम राम का राज्याभिषेक बैशाखी के दिन हुआ था अतः बैशाखी पर्व को महापर्व कहा जाता है। इतिहास के पन्नो में इसी दिन महाराजा विक्रमादित्य ने श्री विक्रमी सवंत का शुभारम्भ किया था जबकि सिखो के दूसरे गुरु अंगद देव का जन्म बैशाखी के दिन ही हुआ था। devotional baishakhi history 

क्यों मनाया जाता है बैसाखी पर्व devotional baishakhi history 

यह पर्व फसल के तैयार होने के ख़ुशी में मनाया जाता है। रबी फसल जैसे गेंहू, दलहन, तिलहन, तथा गन्ने की फसल इस मौसम में किसानो को प्राप्त होती है। उत्तर भारत तथा पूर्व भारत में बैशाखी पर्व का विशेष महत्व है। किसान फसल को देखकर अपने उत्साह और उमंग को रोक नही पाते है और नाचने-गाने लगते है। बैसाखी के दिन किसान सर्वप्रथम फसल को अग्नि देव को अर्पित करते है फिर इस फसल से पके भोजन को ग्रहण करते है. devotional baishakhi history 

बैसाखी पर्व – नये साल की शुरुआत का दिन devotional baishakhi history 

बैशाखी के दिन सूर्य मेष राशि में प्रवेश करते है। इस दिन से हिंदी नववर्ष का शुभारम्भ होता है। लोग इस दिन नये साल के रूप में मनाते है। बैशाखी के दिन उत्तर भारत में माँ दुर्गा तथा भगवान शिव जी की पूजा की जाती है।

चैत्र अमावस्या का महत्व एवम इतिहास

सार्वजनिक जगहों पर नृत्य गान और लोकसंगीत के कार्यक्रम विभिन्न कलाकारों द्वारा प्रस्तुत किया जाता है। बैशाखी के दिन लोग नए वस्त्र पहनते है तथा घरो में विशेष पकवान पकाया जाता है। लोग एक दूसरे को नववर्ष की शुभकामनाएँ देते है और मिठाइयाँ बांटते है। इस तरह बैशाखी पर्व की महिमा एवम कथा सम्पन्न हुई। प्रेम से बोलिए भगवान गौरी पति महेश की जय।  devotional baishakhi history 
( प्रवीण कुमार )




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