13 अगस्त 2017 को है बलराम जयंती जानिए वर्त की कथा एवम इतिहास

devotional balram jayanti history



हिन्दू धार्मिक ग्रंथो के अनुसार भाद्रपद माह में कृष्ण पक्ष की षष्ठी को बलराम जयंती मनाई जाती है। तदनुसार इस वर्ष रविवार 13 अगस्त 2017 को बलराम जयंती मनाई जाएगी। इस व्रत को करने से समस्त मनोकामनाएं पूर्ण होती है। बलराम जयंती प्रत्येक वर्ष बड़े ही धूमधाम से मनाया जाता है। devotional balram jayanti history 

बलराम जयंती की कथा devotional balram jayanti history 

पुराणों के अनुसार एक बार शेषनाग किसी बात को लेकर भगवान विष्णु जी से रुष्ट हो गए। तत्पश्चात भगवान विष्णु जी ने शेषनाग से रुष्ट होने का वजह पूछा कि क्यों आप रुष्ट है ? शेषनाग ने कहा, हे प्रभु सदैव आपके चरणों में स्थित रहता हूँ एक पल के लिए भी मुझे विश्राम का अवसर प्राप्त नहीं होता है। devotional balram jayanti history 

तदोपरांत भगवान विष्णु जी बोले, कर्म क्षेत्र से सभी प्राणी बंधा हुआ है। मैं भी अपने कर्म से बंधा हूँ। शेषनाग कर्म क्षेत्र से कोई विमुक्त नही हो सकता है। कर्म ही प्रधान है। अतः इसमें कैसा संकोच है। शेषनाग जी बोले, प्रभु आपकी महिमा अपरम्पार है। devotional balram jayanti history 

जितिया व्रत की कथा एवं इतिहास

आप चाहे तो राई को पर्वत तथा पर्वत को राई बना सकते है। शेषनाग जी के वचनों को सुनकर भगवान विष्णु जी बोलें, शेषनाग आपकी भावनाओं की मैं सम्मान करता हूँ और आपको वचन देता हूँ कि द्वापर युग में आप मेरे बड़े भाई के रूप में अवतरित होंगे। devotional balram jayanti history 

भगवान विष्णु जी के वचन को सुनकर शेषनाग प्रसन्न हो गए। भगवान विष्णु जी के वचनों अनुसार द्वापर युग में शेषनाग भगवान विष्णु जी का बड़े भाई के रूप में अवतरित हुए। इसी उपलक्ष्य में प्रत्येक वर्ष बलराम जयंती मनाई जाती है। devotional balram jayanti history 




बलराम जयंती महत्व devotional balram jayanti history 

बलराम जयंती किसानों के लिए विशेष पर्व होता है। बलराम जी कृष्ण जी के बड़े भाई थे तथा इनका शस्त्र हल था। अतः इन्हें हलधर भी कहा जाता है। इस दिन बलराम जी के साथ-साथ हल की भी पूजा की जाती है। इसलिए बलराम जयंती को किसानों का त्यौहार भी कहा जाता है। इस दिन बैल की भी पूजा की जाती है। devotional balram jayanti history 

बलराम जयंती पूजा विधि devotional balram jayanti history 

इस दिन प्रातः काल उठें, नित्य कार्यों से निवृत होकर व्रत का संकलप लेना चाहिए। यह व्रत पुत्रवती स्त्रियाँ ही करती है। अतः महिलाएं अपने पुत्र की रक्षा के यह व्रत बड़े ही उत्साह एवम विधि विधान पूर्वक करती है। व्रती बलराम जी एवम हल की पूजा करती है। इस दिन निराहार रहना चाहिए। devotional balram jayanti history 

संध्याकाळ में आरती-अर्चना करने के पश्चात फलाहार करना चाहिए। भगवान कृष्ण जी के बड़े भाई बलराम जी की कृपा से व्रती को धन, ऐश्वर्य आदि की प्राप्ति होती है। इस प्रकार बलराम जयंती की कथा सम्पन हुई। प्रेम से बोलिए बड़े ताऊ बलराम जी की जय।  devotional balram jayanti history 
(प्रवीण कुमार )

loading…


You may also like...