नवरात्रि की कथा एवम इतिहास




हिन्दू धर्म में नवरात्रि एक अति पावन पर्व है जो चैत्र तथा अश्विन माह में मनाई जाती है। नवरात्रि एक संस्कृत शब्द है जिसका तात्पर्य नौ रातें होती है। नवरात्रि के नौ रातें तथा दस दिनों के दौरान माता शक्ति की पूजा की जाती है। devotional chaitra navratri history

जबकि दशमी दशहरा के नाम से प्रसिद्ध है। चैत्र तथा अश्विन नवरात्रि में तीन देवियाँ माता लक्ष्मी, माता सरस्वती तथा माता पार्वती के नौ स्वरूपों की पूजा की जाती है जिन्हें नवदुर्गा भी कहा जाता है। नवरात्रि पर्व पुरे भारत वर्ष में उत्साह एवम उमंग के साथ मनाई जाती है । अश्विन नवरात्रि की शुरुवात 21 सितंबर से है। devotional chaitra navratri history

नौ शक्ति के नौ रूपों की होने वाली पूजा तिथि

प्रतिपदा,21 सितंबर 2017 – माँ शैलपुत्री की पूजा।
द्वितीया, 22 सितंबर- माँ शैलपुत्री की पूजा।
तृतीया, 23 सितंबर – माँ ब्रह्मचारिणी की पूजा।
चतुर्थी, 24 सितंबर- माँ चंद्रघंटा की पूजा ।
पंचमी, 25 सितंबर – माँ कूष्माण्डा की पूजा ।
षष्ठी, 26 सितंबर – माँ स्कंदमाता की पूजा ।
सप्तमी, 27 सितंबर – माँ कात्यायनी की पूजा ।
अष्टमी, 28 सितंबर – कालरात्रि अर्थात माँ काली की पूजा।
नवमी, 29 सितंबर – माँ महागौरी की पूजा ।
दशमी 30 सितंबर 2017- दशहरा।

माँ दुर्गा नवरात्रि की कथा devotional ashvin navratri history

 कथानुसार, माँ दुर्गा ने भैंस रूपी असुर महिसासुर का वध किया था। महिषासुर ने कठिन तपस्या करके देवताओ से अजेय होने का वरदान प्राप्त कर लिया। वरदान प्राप्त करने के पश्चात महिषासुर ने समस्त लोक में अपने भय तथा आतंक के सम्राज्य को स्थापित कर लिया। इससे देवताओं को चिंता सताने लगी। devotional chaitra navratri history

मासिक दुर्गाष्टमी की कथा एवम इतिहास

असुर महिषासुर ने सूर्य, इंद्र, अग्नि, यम, वरुण, एवम अन्य देवताओं से उनके अधिकार को छीन लिया और महिषासुर स्वंय स्वर्ग का राजा बन गया। तत्पश्चात समस्त देव गण माता पार्वती की शरण में गए। devotional chaitra navratri history

माँ पार्वती समस्त लोकों को पापों तथा आसुरी सम्राज्य से मुक्ति दिलाने हेतु माँ दुर्गा के रूप में प्रकट हुई। माता दुर्गा को देख समस्त देवता प्रसन्न चित होकर माँ दुर्गा का अभिवादन किया एवम माँ दुर्गा को महिषासुर के वध के लिए अपने अस्त्र उन्हें प्रदान किया। नवरात्रि के दौरान माँ दुर्गा का महिषासुर से युद्ध हुआ और अंततः महिषासुर का वध करके माँ दुर्गा महिषासुर मर्दिनी कहलायी। devotional chaitra navratri history

नवरात्रि का महत्व devotional ashvin navratri history

चैत्र नवरात्रि उत्स्व देवी अम्बा का प्रतिनिधित्व है। चैत्र नवरात्रि में वसंत, शरद जलवायु एवम सूरज के प्रभावों का संगम होता है। चैत्र तथा अश्विन नवरात्रि का समय माँ दुर्गा की पूजा के लिए पवित्र माना जाता है। मान्यतानुसार नवरात्रि पूजा वैदिक काल से की जाती है। devotional chaitra navratri history

माँ दुर्गा की कृपा अपने भक्तों पर सदैव बनी रहती है। जब-जब माँ दुर्गा के भक्तो पर संकट की स्थिति आती है, माँ दुर्गा भिन्न-भिन्न रूप धारण कर अपने भक्तों को इस संकट से मुक्त करती है। माँ दुर्गा की कृपा से भक्तों को मनोवांछित फल प्राप्त होती है । devotional chaitra navratri history

नवरात्रि पूजन विधि devotional ashvin navratri history

चैत्र नवरात्रि के प्रथम दिन स्नान आदि से निवृत होकर स्वच्छ वस्त्र धारण करें। तत्पश्चात पूजन स्थल पर एक कलश की स्थापना करें। पूजा करने से पूर्व संकल्प ले की विधिवत माँ दुर्गा की पूजा नौ दिन यथा शक्ति करेंगे। devotional ashvin navratri history

पितृ पक्ष की कथा एवं इतिहास

तत्पश्चात माँ दुर्गा के प्रथम रूप शैलपुत्री का पूजन फल, फूल, अक्षत, दूर्वा, धुप-दीप आदि से करें। माँ दुर्गा चालीसा का पाठ करे एवम आरती उतारें। नवरात्रि के नौ दिन माँ दुर्गा के विभिन्न रूपों की पूजा की जाती है। devotional chaitra navratri history

दशमी के दिन हवन एवम पूजन सम्पन्न करने के पश्चात कलश को प्रवाहित जल-धारा में विसर्जित कर दे। इस तरह माँ दुर्गा एवम नवरात्रि की कथा सम्पन्न हुई। प्रेम से बोलिए माँ दुर्गा की जय। devotional chaitra navratri history
( प्रवीण कुमार )



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