12 जून 2019 को मनाया जाएगा गंगा दशहरा,जानिए कथा एवं इतिहास

devotional ganga dussehra story




गंगा दशहरा हिन्दू धर्म का एक प्रमुख त्यौहार है। यह पर्व प्रत्येक वर्ष ज्येष्ठ माह में शुक्ल पक्ष की दशमी को मनाया जाता है। तदनुसार, इस वर्ष गंगा दशहरा 12 जून 2019 को मनाया जायेगा। devotional ganga dussehra story 

स्कन्द पुराण में वर्णित है कि ज्येष्ठ माह में शुक्ल पक्ष की दशमी के दिन पवित्र नदियों में स्नान एवम दान करने से महापातकों के बराबर पापो से मुक्ति मिलती है। वर्तमान समय में इस दिन हरिद्वार में गंगा नदी के घाटों पर पतंगबाजी का भी विशेष आयोजन देखा जा सकता है। devotional ganga dussehra story 

गंगा दशहरा की कथा devotional ganga dussehra story 

प्राचीन काल में अयोध्या में सगर नामक एक प्रतापी राजा रहता था। जिसने सात समुद्र को जीत लिया था। उनकी दो रानियाँ थी एक रानी से एक पुत्र तथा दूसरे रानी से 60 हजार पुत्र की प्राप्ति हुई थी। एक बार राजा सगर ने अश्वमेध यज्ञ किया तथा यज्ञ को सफल करने के लिए उन्होंने एक अश्व को छोड़ा। devotional ganga dussehra story 

किन्तु स्वर्ग के स्वामी ने इस यज्ञ को भंग करने के लिए उस अश्व का हरण कर लिया और अश्व को कपिल मुनि के आश्रम में बाँध आए। अश्व की खोज के लिए राजा सगर ने अपने 60 हजार पुत्रों को भेजा। जब राजा के पुत्रों ने पिता द्वारा छोड़े गए अश्व को कपिल मुनि के आश्रम में देखा तो सभी लोग चोर-चोर चिल्लाने लगे। devotional ganga dussehra story 

निर्जला एकादशी की कथा एवम इतिहास

इस कोताहल से कपिल मुनि की तपस्या भंग हो गयी। कपिल मुनि ने ज्यों हीं अपनी आँखें खोली तो सारा कुछ जलकर भष्म हो गया। तत्पश्चात राजा सगर के पौत्र ने गरुड़ देव से इस सन्दर्भ में जानकारी हासिल की।

गरुड़ जी ने कहा कि यदि अपने पूर्वजों की मुक्ति चाहते हो तो गंगा नदी को मृत्यु लोक में लाओ। तत्पश्चात राजा दिलीप के पुत्र भागीरथ ने कठिन तपस्या कर गंगा नदी को धरातल पर लाया।

जब गंगा नदी धरातल पर आई तो समस्त पृथ्वी लोक में हाहाकार मच गया। सब कुछ डूब गया। तत्पश्चात भगवान शिव जी ने गंगा माँ को अपनी जटाओं में समेट लिया। इस तरह भागीरथ के पूर्वजों को मृत्यु लोक से मुक्ति मिल गई।




गंगा दशहरा का महत्व devotional ganga dussehra story 

हिन्दू धर्म में माँ गंगा का विशेष महत्व है और माँ गंगा के अवतरण दिन को गंगा दशहरा के रूप में मनाया जाता है। गंगा दशहरा के दिन लाखों लोग गंगा नदी की पवित्र जलधारा में आस्था की डूबकी लगाते हैं। भविष्य पुराण में माँ गंगा के प्रादुर्भाव एवम महत्व का उल्लेख मिलता है।

इस पुराण के अनुसार जो मनुष्य गंगा दशहरा के दिन नदी में खड़ा होकर ॐ नमो भगवती हिलि-हिलि, मिलि-मिलि गंगे माँ पावय स्वाहा का मंत्रोच्चारण दस बार करके माँ गंगा को अर्घ्य देता है ना केवल उसके पापो का नाश होता है, अपितु उसके समस्त पितरों को भी मुक्ति मिलती है। गंगा दशहरा दस प्रकार के पापों का नाश करती है। और क्योंकि माँ गंगा का अवतरण ज्येष्ठ माह में शुक्ल पक्ष की दशमी को हुआ था अतः इसे गंगा दशहरा भी कहा जाता है। devotional ganga dussehra story 

गंगा दशहराdevotional ganga dussehra story 

गंगा दशहरा के दिन गंगा नदी में स्नान करें। स्नान के पश्चात भगवान सूर्य देव एवम माँ गंगा को अर्घ्य दें। इस दिन दान-पुण्य का भी महत्व है। अतः दान अवश्य करें। अपने सामर्थ्य अनुसार ब्राह्मणो एवम गरीबों को दान दें।

इस दिन पूजा-दान से दस प्रकार के पापों से मुक्ति मिलती है। माँ गंगा के स्मरण मात्र से पापों  से मुक्ति मिलती है। इस प्रकार गंगा दशहरा की कथा सम्पन्न हुई। प्रेम से बोलिए माँ गंगा की जय। devotional ganga dussehra story 

loading…


You may also like...