20 मार्च 2018 को मनाया जाएगा गौरी पूजन,जानिए कथा एवम इतिहास

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हिन्दू धर्म के अनुसार गौरी पूजन प्रत्येक मंगलवार को किया जाता है। हिंदी पंचांग के अनुसार वर्ष का प्रथम गौरी पूजन गुरुवार 20 मार्च 2018 को मनाया जाएगा। माँ गौरी का यह व्रत मंगला गौरी के नाम से विख्यात है। स्त्रियां अपने पति की लम्बी आयु के लिए मंगला गौरी का व्रत करती है। devotional gauri puja history 

गौरी पूजा की कथा devotional gauri puja history 

प्राचीन काल में आनंद नगर में धर्मपाल नामक एक सेठ अपनी पत्नी के साथ सुख पूर्वक जीवन-यापन करता था। धर्मपाल के जीवन में धन, वैभव की कोई कमी नही थी, किन्तु उसे केवल एक बात की दुःख हमेशा सताती थी कि उनकी कोई संतान नही थी। सेठ धर्मपाल नियमित पूजा-पाठ तथा दान-पुण्य किया करते थे। कुछ समय पश्चात पूजा-पाठ तथा अच्छे कार्यो से सेठ को पुत्र की प्राप्ति होती है। devotional gauri puja history 

जब सेठ धर्मपाल को पुत्र की आयु के सम्बन्ध में ज्ञात होता है कि उसका पुत्र अल्पायु है तो उसे अपने किस्मत पर बड़ा दुःख होता है। सेठ धर्मपाल व्यथित हो जाता है तब सेठ की पत्नी बोलती है भाग्य को कैसे बदला जा सकता है। अतः प्रभु की इच्छा में अपनी इच्छा निहित है। जो करेंगे प्रभु अच्छा ही करेंगे। कुछ समय पश्चात सेठ धर्मपाल अपने पुत्र का विवाह एक योग्य एवम संस्कारी कन्या से कर देता है। कन्या बचपन से ही माता गौरी का व्रत किया करती थी। अतः इस प्रभाव से कन्या को माता गौरी से अखंड सौभाग्यवती होने का आशीर्वाद प्राप्त होता है जिससे सेठ धर्मपाल का पुत्र दीर्घायु हो गया। devotional gauri puja history 




मंगलागौरी पूजन विधि

मंगला गौरी पूजा का प्रारम्भ सावन माह के प्रथम मंगलवार से करना चाहिए तथा इसे प्रत्येक महीने की हर मंगलवार को करना चाहिए। पॉंच वर्ष पूरा होने के पश्चात इसका उद्यापन कर दे। मंगला गौरी पूजा के दिन स्नान-ध्यान से पवित्र होकर मंगला गौरी की मूर्ति या चित्र को लाल रंग के कपड़े से लिपट कर पूजा की चौकी पर रखे। तत्पश्चात, गेंहू के आटे से एक दीप बनाकर उसे प्रज्वलित करें और सर्वप्रथम भगवान श्री गणेश जी की पूजा करें। devotional gauri puja history 

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माता गौरी की पूजा जल, चन्दन, सिंदूर, सुपारी, लौंग, फल, फूल, इलायची, बेलपत्र, तथा मेवा आदि से करें। माता गौरी को मेहँदी और चूड़ियाँ चढ़ावा मे रखे। अंत में माता गौरी की व्रत कथा सुनें। गेहू की बने दिए से माता गौरी की आरती उतारें । पूजा सम्पन्न होने के पश्चात माता गौरी से सौभाग्यवती, सुख, वैभव, मंगल एवम शांति के लिए कामना करें। माता गौरी अपने सभी व्रती की मनोकामना को अवश्य पूर्ण करती है। इस तरह माता गौरी की व्रत कथा सम्पन्न हुई। प्रेम से बोलिए माता गौरी की जय।  devotional gauri puja history 
( प्रवीण कुमार )

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