17 नवंबर 2018 को है जगद्धात्री पूजा,जानिए व्रत की कथा एवं इतिहास

devotional Jagaddhatri Puja vrat katha



वेदों, पुराणों एवम शास्त्रों के अनुसार कार्तिक माह की शुक्ल पक्ष की सप्तमी से लेकर नवमी तक जगद्धात्री पूजा मनाई जाती है। तदनुसार इस वर्ष शनिवार 17 नवंबर 2018 को मनाई जाएगी। माँ जगद्धात्री राजस एवम तामस का प्रतीक मानी जाती है। माँ काली और दुर्गा का एसटीवी रूप माँ जगद्धात्री है। माँ जगद्धात्री की कृपा से समस्त प्रकार की मनोकामनाएं पूर्ण होती है। माँ जगद्धात्री तंत्र विद्या की देवी है। devotional Jagaddhatri Puja vrat katha

माँ जगद्धात्री की कथा devotional Jagaddhatri Puja vrat katha 

पौराणिक कथा अनुसार माँ दुर्गा ने समस्त लोकों को महिषसुर के आतंक से मुक्त करने के लिए महिषासुर का वध कर देती है। जिसके बाद देवताओं को स्वर्ग का अधिपत्य पुनः प्राप्त हो जाता है। स्वर्ग की प्राप्ति के पश्चात देवताओं में घमंड का भाव आ जाता है। जिस कारण देवता गण स्वंय को सर्वश्रेष्ठ समझने लगते है। देवताओं के इस घमंड को तोड़ने के लिए यक्ष देव को पूज्य बनाया जाता है। जब यह बात देवताओं को पता चलता है तो देवता एक-एक करके यक्ष देव के पास जाते है। devotional Jagaddhatri Puja vrat katha 

अक्षय नवमी की कथा एवं इतिहास

इसी क्रम में यक्ष देव, वायु देव से प्रश्न करते है कि आप अपनी क्षमता अनुसार क्या-क्या कर सकते है। वायु देव घमंड में बोलते है मैं कितनी ही ऊँची पहाड़ को पार कर सकता हूँ। ब्रह्माण्ड की गति से तीव्र गति से ब्रह्माण्ड का परिक्रमा लगा सकता हूँ तत्पश्चात यक्ष देव अति सूक्ष्म रूप धारण कर कहते है। इसे नष्ट करके दिखाओ। किन्तु वायु देव यक्ष देव के अति सूक्ष्म रूप का कुछ नही बिगड़ पाते है। इसी प्रकार अन्य देव भी विफल हो जाते है। इस पराजय के पश्चात देवोँ को अपने घमंड का आभास होता है। तत्पश्चात यक्ष देव बोलते है कि जिस माँ ने आपको सम्राज्य दिलाया है। उसी माँ के शरण में जाकर क्षमा याचना करें। माँ की कृपा बनी रहेंगी। devotional Jagaddhatri Puja vrat katha 




माँ जगद्धात्री रूप वर्णन devotional Jagaddhatri Puja vrat katha 

माँ जगद्धात्री का रंग प्रातः काल के सूर्य की लालिमा के समान है। माँ की तीन आँखे व् चार हाथ है। जिनमें माँ जगद्धात्री ने शंख, तीर, धनुष व् चक्र धारण की है। माँ लाल वस्त्र, श्रृंगार व् नगजन्गोपवीता धारण करती है। माँ सिंह की सवारी करती है। माँ का रूप अति मोहक और सौंदर्य से पूर्ण है।

जगद्धात्री पूजा महत्व devotional Jagaddhatri Puja vrat katha 

माँ जगद्धात्री पूजा के उपलक्ष्य में कई जगहों पर मेले का आयोजन किया जाता है। मंदिरों को सजाया जाता है। मंदिरो में प्रातः काल पूजा की जाती है। जबकि संध्या में आरती-अर्चना उतारी जाती है। कई जगहों पर माँ की झांकी निकाली जाती है। माँ जगद्धात्री की पूजा बड़े ही हर्षोउल्लास के साथ मनाया जाता है। पश्चिम बंगाल का यह प्रमुख त्यौहार में से एक है। माँ ममता का रूप है। जिसकी कृपा समस्त मानव समाज पर बरसती है। किन्तु अत्याचारी और दुराचारी के लिए माँ काल भैरवी का रूप है। devotional Jagaddhatri Puja vrat katha 

जगद्धात्री पूजा विधि devotional Jagaddhatri Puja vrat katha 

इस दिन प्रातः काल उठें, स्नान आदि से निवृत होकर माँ जगद्धात्री के निम्मित व्रत का संकल्प करें। सर्वप्रथम माँ की प्रतिमा को स्नान कराकर लाल वस्त्र अर्पित करें। तत्पश्चात माँ का श्रृंगार करें। श्रृंगार करने के पश्चात माँ की प्रतिमा को चौकी पर स्थापित कर माँ की पूजा प्रारम्भ करें। माँ की पूजा लाल रंग पुष्प, चन्दन, सिंदूर, दूर्वा, जल से करें। माँ को मिष्ठान एवम फल का भोग लगाएं। माँ की आरती धुप-दीप, अगरबत्ती से करें। devotional Jagaddhatri Puja vrat katha 

पूजा सम्पन्न होने पर माँ से परिवार के सुख, शांति और समृद्धि की कामना करें। इस दिन निराहार रहें। संध्या आरती के पश्चात फलाहार करें। अगले दिन पूजा पाठ करने के पश्चात व्रत को खोलें। माँ जगद्धात्री की विधि पूर्वक पूजा करने से व्रती को मनोवांछित फल की प्राप्ति होती है तथा समस्त प्रकार की कष्टों से मुक्ति मिलती है। इस प्रकार माँ जगद्धात्री की कथा सम्पन्न हुई। प्रेम से बोलिए माँ जगद्धात्री की जय। devotional Jagaddhatri Puja vrat katha 
( प्रवीण कुमार )

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