27 जनवरी 2018  को है जया एकादशी,जानिए व्रत की कथा एवं इतिहास

devotional jaya ekadashi vrat katha




माघ माह में शुक्ल पक्ष की एकादशी को जया एकादशी मनाई जाती है । तदानुसार, शनिवार 27 जनवरी 2018  को जया एकादशी मनाई जाएगी। वर्ष के प्रत्येक माह में 2 एकादशी व्रत मनाया जाता है। जया एकादशी व्रत करने से व्रती को घोर पापो से मुक्ति मिलती है। जया एकादशी व्रत को पद्म पुराण में उल्लेखित किया गया है। इस व्रत के करने से मनुष्य जाति को अधम योनि से मुक्ति मिलती है। devotional jaya ekadashi vrat katha 

जया एकादशी व्रत की कथा devotional jaya ekadashi vrat katha 

एक बार की बात है। स्वर्ग में निहित नंदन वन में उत्स्व मनाया जा रहा था। इस अवसर समस्त देवगण, सिद्धसंत तथा दिव्य पुरुष उपस्थित थे। नंदन वन में उस समय गायन तथा नृत्य कार्यक्रम गन्धर्व और गन्धर्व कन्याएं प्रस्तुत कर रही थी। उत्स्व के गायन तथा नृत्य कार्यक्रम के अवधि में नृतका पुष्यवती की नजर ज्यो माल्यवान पर पड़ी। पुष्यवती उस पर मोहित हो गयी। devotional jaya ekadashi vrat katha 

तत्पश्चात, पुष्यवती सभा तथा उत्स्व की मर्यादा को भूलकर ऐसा नृत्य करने लगी की माल्यवान भी उस पर मोहित हो गया और अपनी सुध खोकर बेसुरा गाने लगे। जिससे सभा की मर्यादा भंग हो गयी। गन्धर्व के इस कार्य से स्वर्ग के स्वामी अति क्रोधित हो उठे और उन्होंने दोनों को तत्काल ही स्वर्ग से वंचित कर दिया। इंद्र देव ने कहा, आप दोनों को अधम नीच योनि प्राप्त हो। devotional jaya ekadashi vrat katha 

स्वर्ग के स्वामी इंद्र देव के शाप से दोनों पिशाच बन गए और हिमालय पर्वत पर निवास करने लगे। यहाँ दोनों को अत्यंत कष्ट भोगना पड़ता था। जिससे दोनों काफी दुखी हो उठे। एक बार माघ माह में शुक्ल पक्ष की एकादशी को दोनों इस दुःख से कुछ भी नही खाया तथा दिन भर भूखे-प्यासे वृक्ष की शाखा पर बैठा रहा। रात्रि काल में उन्होंने फल खाया परन्तु स्वर्ग के सुख और शांति के लिए दोनों ही लालायित थे जिस कारण रात्रि में भी दोनों जागते रहे तथा श्री हरी विष्णु का स्मरण करते रहे। इस तरह उन दोनों ने विधि-विधान से जया एकादशी का व्रत किया जिससे भगवान श्री हरि विष्णु अति प्रसन्न होकर दोनों को पिसाच योनि से मुक्त कर दिया। devotional jaya ekadashi vrat katha 



जया एकादशी का महत्व devotional jaya ekadashi vrat katha 

भगवान श्री कृष्ण जी ने सर्वप्रथम जया एकादशी के महत्व को धर्मराज युधिष्ठिर से बताया था। भगवान श्री कृष्ण जी कहते है की इस व्रत को करने से व्यक्ति अधम योनि अर्थात भुत, प्रेत, पिसाच आदि योनि से मुक्त हो जाता है। devotional jaya ekadashi vrat katha

जया एकादशी व्रत विधि devotional jaya ekadashi vrat katha 

व्रती को माघ माह में शुक्ल पक्ष की दशमी को एक समय आहार करना चाहिए। इस दिन लहसन, प्याज, तामसी भोजन का त्याग करना चाहिए। जया एकादशी के दिन स्नान आदि से निवृत होकर भगवान श्री हरि विष्णु का ध्यान करते हुए संकल्प ले। तत्पश्चात धुप, दीप, चन्दन, फूल, फल, तिल एवम पंचामृत से भगवान की पूजा करे। devotional jaya ekadashi vrat katha 

मासिक कार्तिगाई की कथा एवं इतिहास

पुरे दिन निराहार व्रत रखे तथा रात्रि में फलाहार कर संभव हो सके तो जागरण करे। भगवान विष्णु की कीर्तन-भजन करे। द्वादशी के दिन ब्राह्मणो को दान दे। भगवान विष्णु की कृपा व्रती पर रहती है तथा व्रती को ना केवल पिसाच योनि से मुक्ति मिलती है बल्कि उनकी सारी मनोकामनाएँ पूर्ण होती है। इस तरह जया एकादशी व्रत की कथा तथा महत्व की महिमा सम्पन्न हुआ। प्रेम से बोलिए भगवान श्री हरी विष्णु जी की जय।  devotional jaya ekadashi vrat katha 
( प्रवीण कुमार )

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