28 जुलाई 2017 को है कल्कि जयंती,जानिए व्रत की कथा एवम इतिहास

devotional kalki jayanti history





वेदों, पुराणों एवम शास्त्रों के अनुसार कलयुग में भगवान विष्णु जी कल्कि रूप में अवतरित होंगे। भगवान विष्णु जी के कल्कि का अवतार सावन माह में शुक्ल पक्ष की पंचमी के दिन होगा। तदनुसार प्रत्येक वर्ष सावन माह में शुक्ल पक्ष को कल्कि जयंती मनाया जाता है। devotional kalki jayanti history 

अतः श्रावण माह के शुक्ल पक्ष की पंचमी को देश भर में बड़े ही धूमधाम से कल्कि जयंती मनाई जाती है। इस वर्ष शुक्रवार 28 जुलाई 2017 को कल्कि जयंती मनाई जाएगी। devotional kalki jayanti history 

कल्कि जयंती व्रत कथा devotional kalki jayanti history 

पुराणों के अनुसार भगवान भगवान कल्कि जी का जन्म कलयुग की समाप्ति तथा सतयुग के संधि काल में सावन माह के शुक्ल पक्ष की पंचमी को कश्मीर राज्य में विष्णुदत्त नामक व्यक्ति के घर पर होगा। विष्णुदत्त भगवान विष्णु जी का परम भक्त होगा। जबकि बारह वर्ष की उम्र में भगवान कल्कि का विवाह त्रिकोता नामक कन्या से होगा। devotional kalki jayanti history 

मंगला गौरी की कथा एवम इतिहास

भगवान कल्कि के अवतार के विषय में दक्षिण भारतीय पंडितों का कहना है कि भगवान कल्कि उस समय अवतरति होंगें जब चन्द्रमा धनिष्ठा नक्षत्र तथा राशि कुम्भ में होगा। स्कंध पुराण के अनुसार भगवान कल्कि जी का अवतार उत्तर प्रदेश में गंगा नदी के तट पर स्थित मुरादाबाद के संभल ग्राम में होगा। devotional kalki jayanti history 

कल्कि जयंती महत्व devotional kalki jayanti history 

भगवान श्री कृष्ण जी ने गीता उपदेश में अर्जुन से कहा है जब-जब धर्म का पतन होता है, मैं मनुष्य रूप में अवतरित होकर समस्त पापों का नाश कर पुनः धर्म की स्थापना करता हूँ। भगवान विष्णु जी के कल्कि का अवतार सावन माह में शुक्ल पक्ष की पंचमी को होगा। devotional kalki jayanti history 

अतः श्रावण माह के शुक्ल पक्ष की पंचमी को देश भर में बड़े ही धूमधाम से कल्कि जयंती मनाई जाती है। इस व्रत का विशेष महत्व है। सच्चे दिल से जो कोई भगवान कल्कि की पूजा-अर्चना करता है उसकी मनोकामनाएं अवश्य पूर्ण होती है।




कल्कि जयंती पूजा विधि.इस दिन ब्रह्म मुहूर्त काल में उठें, स्नान-ध्यान से निवृत होकर सर्वप्रथम व्रत का संकल्प करना चाहिए। तत्पश्चात भगवान कल्कि जी के प्रतिमूर्ति को गंगा स्नान कराना चाहिए। उन्हें वस्त्र पहनाएं। भगवान कल्कि जी को पूजा स्थल पर एक चौकी पर अवस्थित करें। devotional kalki jayanti history 

तत्पश्चात भगवान कल्कि जी को जल का अर्घ्य देकर पूजा प्रारम्भ करना चाहिए। भगवान कल्कि जी की पूजा फल, फूल, धुप, दीप, अगरबत्ती आदि से करना चाहिए। आरती-अर्चना करने के पश्चात पूजा सम्पन्न करना चाहिए।

पूजा सम्पन्न होने पर भगवान कल्कि जी से परिवार के सुख, शांति, वैभव की कामना करना चाहिए। इस प्रकार कल्कि जयंती की कथा सम्पन्न हुई। प्रेम से बोलिए भगवान श्री विष्णु जी की जय।  devotional kalki jayanti history 
( प्रवीण कुमार )

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