कामदा एकादशी की कथा एवम इतिहास





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हिन्दू धर्म में एकादशी पर्व का अति पावन महत्व है। चैत्र माह में शुक्ल पक्ष की एकादशी को कामदा एकादशी कहा जाता है। पद्म पुराण में कहा गया है की कामदा एकादशी के दिन भगवान विष्णु का विधि-विधान पूर्वक पूजन करने से प्राणी को प्रेत योनि से मुक्ति मिलती है। तदनुसार शुक्रवार 7 अप्रैल 2017 को कामदा एकादशी का पर्व मनाया जाएगा। devotional kamada ekadashi history 

कामदा एकादशी की कथा devotional kamada ekadashi history 

प्राचीनकाल में भोगीपुर नामक नगर में अनेक ऐश्वर्यो से युक्त पुण्डरीक नाम का एक राजा राज्य करता था। भोगीपुर नगर में अनेक अप्सरा, किन्नर तथा गन्धर्व रहते थे। इसी नगर में ललिता तथा ललित नाम के स्त्री पुरुष भी निवास करते थे। उन दोनों में अत्यधिक स्नेह था। प्रेम का बंधन ऐसा बंधा थी की अगर वो दोनों कुछ क्षणों के लिए अलग होते थे तो दोनों व्याकुल हो जाते थे। devotional kamada ekadashi history 

एक दिन जब गन्धर्व ललित पुण्डरीक के दरबार में गायन कार्यक्रम प्रस्तुत कर रहे थे की अचानक उनको अपनी पत्नी की याद आ गई। इस कारण उनका स्वर, लय एवम ताल बिगड़ने लगा। इस त्रुटि को करकट नामक संगीत प्रेमी ने जान लिया तथा यह बात राजा को बता दिया। devotional kamada ekadashi history 

चैत्र पूर्णिमा का महत्व एवम इतिहास

राजा पुण्डरीक को गन्दर्भ पर बड़ा क्रोध आया तथा इस क्रोध में राजा ने गन्दर्भ ललित को प्रेत योनि का श्राप दे दिया। जब यह बात उसकी प्रियतमा ललिता को मालूम हुई तो उसे बहुत दुःख हुआ। ललित प्रेत योनि में कई वर्षो तक भटकता रहा। गंदर्भ ललिता अपने पति की इस हालत को देखकर श्रृंगी ऋषि के पास गई। ललिता विनीत भाव से ऋषि श्रृंगी से प्रार्थना करने लगी। तब ऋषि ने पूछा, हे नारी तुम कौन हो तथा इस स्थान पर किस उद्देश्य के लिए आई हो। devotional kamada ekadashi history 

तत्पश्चात ललिता ने ऋषि को अपने पति के प्रेत योनि के बारें में बताया। महर्षि, मेरे पति को प्रेत योनि से उद्धार का कोई उपाय बतलाए। ऋषि श्रृंगी ने कहा, चैत्र शुक्ल एकादशी आने वाली है जिसका नाम कामदा एकादशी है। इस व्रत के करने से मनुष्य के सब कार्य सिद्ध होता है। यदि कामदा एकादशी का व्रत कर उसके पुण्य का फल अपने पति को प्रदान करती हो तो शीघ्र ही तुम्हारा पति को प्रेत योनि से मुक्ति मिलेगी। ललिता ने ऋषि के आज्ञा का पालन करते हुए कामदा एकादशी व्रत को विधि-विधान पूर्वक सम्पन्न किया। व्रत के प्रभाव से गंदर्भ ललिता के पति को प्रेत योनि से मुक्ति मिल गयी। devotional kamada ekadashi history 

कामदा एकादशी व्रत विधि devotional kamada ekadashi history 

हिन्दू धर्म के अनुसार कामदा एकादशी के दिन स्नानादि से शुद्ध होकर व्रत संकल्प लेना चाहिए। इसके पश्चात भगवान विष्णु की पूजा फल, फूल, दूध, पंचामृत, तिल आदि से करे। हिन्दू धार्मिक ग्रंथो के अनुसार एकादशी की रात में सोना नही चाहिए। बल्कि भगवान विष्णु की भजन-कीर्तन करते हुए रात बितानी चाहिए। अगले दिन अर्थात पारण के दिन पुनः पूजन कर बाह्मणो को भोजन कराएं। ब्राह्मणो को विदा करने के पश्चात व्रत को खोले। devotional kamada ekadashi history 

कामदा एकादशी व्रत का महत्त्व

कामदा एकादशी का व्रत विधि पूर्वक करने से मनुष्य के सभी पाप दूर हो जाते है तथा परिवार एवम जीवन में सुख, शांति, मंगलयश की प्राप्ति होती है। इस तरह कामदा एकादशी की कथा सम्पन्न हुई। प्रेम से बोलिए भगवान विष्णु जी की जय।  devotional kamada ekadashi history 
( प्रवीण कुमार )




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