जानिए कांवड़ यात्रा की कथा एवम इतिहास

devotional kanwad yatra story



वेदों, पुराणों एवम शास्त्रों के अनुसार सावन का महीना भगवान शिव जी को समर्पित है। भगवान शिव जी सावन के महीने में अपने निवास स्थान कैलाश पर्वत का त्याग कर शिवालयों में विराजमान होते है। devotional kanwad yatra story 

ग्रंथों में ऐसा वर्णित है कि माँ पार्वती शिव जी को प्रसन्न करने हेतु सावन महीने में व्रत किया करती थी। अतः सावन महीने में शिव जी के भक्ति और सेवा करने से व्रती को मनोवांछित फल प्राप्त होता है। विशेषकर अविवाहित स्त्री के लिए सावन महीना अति महत्वपूर्ण है। devotional kanwad yatra story 

शास्त्रों के अनुसार सावन के महीने में शिव जी की पूजा करने से व्रती के सभी प्रकार का कष्ट दूर हो जाता है। विवाहित स्त्री अपने सौभाग्य और सुखी जीवन के लिए ये व्रत करती है, तथा अविवाहित स्त्री कुशल और गुणवान पति के लिए सोमवार का व्रत करती है।

हिन्दू धर्म में सावन के महीने में कांवड़ यात्रा भी की जाती है। ये परम्परा सदियों पुरानी है। मान्यता है की जब भगवान शिव जी कैलाश त्याग कर शिवालयों में विराजमान होते है। उस समय में कावड़ यात्रा की जाती है। देश भर के सभी प्रसिद्ध ज्योतिर्लिंग के अतिरिक्त शिव मंदिरों में कावड़ यात्रा की जाती है। devotional kanwad yatra story 

कांवड़ यात्रा जीवन के यात्रा के स्वरूप को दर्शाता है, कांवड़ शब्द की उतपत्ति संस्कृत भाषा के ‘कांवारथी’ से हुई है। जो बांस की फट्टी की बनी होती है। जिसे बहंगी भी कहते है। बहंगी में जब गंगाजल का भार और वैदिन अनुष्ठान को जोड़ा जाता है। ततपश्चात ये कावड़ कहलाती है। भक्तगण अपने कावड़ को फूलमाला, घुंघरू और घंटियों से सजाते है। जिससे कावड़ अति सुन्दर दिखती है। devotional kanwad yatra story 

शास्त्रों के अनुसार कांवड़ यात्रा की शुरुआत त्रेता युग में लंकाधिपति राजा रावण ने की थी। जिसके पश्चात मर्यादा पुरषोत्तम राम जी ने कावंड़ यात्रा की थी। कांवड़ यात्रा के दौरान व्रती को कठिन व्रत विधि तथा नियमों का पालन करना होता है। devotional kanwad yatra story 




सावन का महीना भगवान शिव जी को समर्पित है। devotional kanwad yatra story 

यात्रा के दौरान व्रती को वैराग्य जीवन व्यतीत करना होता है। व्रती को ब्रह्मचर्य जीवन, अंतरात्मा को शुद्ध रखना, सात्विक आहार लेना और नैसर्गिक दिनचर्या का पालन करना पड़ता है।

कांवड़ यात्रा कई प्रकार की होती है
सामान्य कांवड़िया
डाक कांवड़िया
खड़ी कांवड़िया
दांडी कांवड़िया
सामान्य कांवड़िया -ये वो कांवड़िया होते है जो अपनी यात्रा के दौरान आराम भी कर सकते है। कांवरिया आराम करने के समय अपने कांवड़ को किसी ऊँची चीज़ से बांध कर रखते है, ताकि कांवड़ जमीन को स्पर्श न करें।

शिव मंदिरों में कावड़ यात्रा की जाती है। devotional kanwad yatra story 

डाक कांवड़िया – डाक कांवड़ यात्रा में कांवड़िया को यात्रा की शुरुवात से जलाभिषेक तक लगातार चलना पड़ता है। इसके अतिरिक्त कांवरिया को एक निश्चित अवधि में जलाभिषेक करना होता है। यात्रा के दौरान व्रती को शरीर से उत्सर्जन क्रियाएं तक वर्जित होती हैं। devotional kanwad yatra story 

सावन सोमवारी व्रत की कथा एवम इतिहास

खड़ी कांवड़िया -कुछ कांवड़िया खड़ी कांवड़ लेकर चलते है। यात्रा में उनकी मदद के लिए सहयोगी उनके साथ चलते है। जो यात्रा में सहयोग करता है। जब खड़ी कांवड़िया आराम करते है, उस वक्त ये सहयोगी अपने कंधे पर कांवड़ लेकर गति मुद्रा में रहते है। devotional kanwad yatra story 

दांडी कांवड़ – ये वो कांवड़िया होते है जो नदी तट से शिवालय तक की यात्रा दंड देते हुए पूरी करते है। दांडी कांवड़ का तात्पर्य है ये भक्त यात्रा के दौरान अपने शरीर की लंबाई से लेटकर नापते हुए दुरी को पूरी करते है। यह यात्रा अत्यधिक कठिन है, इसे पूर्ण करने में एक महीने का समय भी लग जाता है। devotional kanwad yatra story 

शिवालय पहुँच कर व्रती भगवान शिव जी का जलाभिषेक करते है। कांवड़ यात्रा जीवन के यात्रा के स्वरूप को दर्शाता है, जिसका उद्देश्य जीवन में अनुशासन, वैराग्य और सात्विकता के साथ ईश्वर के पास पंहुचना है। devotional kanwad yatra story 
( प्रवीण कुमार )

loading…


You may also like...