2 दिसंबर 2017 को है कार्तिगाई दीपम,जानिए व्रत कथा एवं इतिहास

devotional Karthigai Deepam history




तमिल पंचांग के अनुसार वर्ष के प्रत्येक माह में मासिक कार्तिगाई मनाया जाता है। तदनुसार, दिसंबर माह में शनिवार 2 दिसंबर 2017 को कार्तिगाई दीपम मनाया जाएगा। कार्तिगाई दीपम पर्व को दक्षिण भारत के तमिलनाडु राज्य में हिन्दू धर्म के लोग मनाते है। यह पर्व दक्षिण भारत में मनाये जाने वाले पर्वों में सबसे पुराना पर्व है। कार्तिगाई दीपम वर्ष के प्रत्येक माह में मनाया जाता है। अतः इसे मासिक कार्तिगाई दीपम भी कहा जाता है। devotional Karthigai Deepam history 

कार्तिगाई दीपम पर्व को दक्षिण भारत के तमिलनाडु राज्य में हिन्दू धर्म के लोग मनाते है यह पर्व दक्षिण भारत में मनाये जाने वाले पर्व में सबसे पुराना पर्व है। कार्तिगाई दीपम वर्ष के प्रत्येक माह में मनाया जाता है। अतः इसे मासिक कार्तिगाई दीपम भी कहा जाता है। मासिक कार्तिगाई दीपम के दिन लोग शाम में घरो और आस-पास के जगहों में तिल तेल या घी के दीपक एक कतार बद्ध पक्ति में जलाते है। devotional Karthigai Deepam history 




शिव जी की पूजा कर उनसे सुख और शांति की प्रार्थना करते है।

कार्तिगाई दीपम का नाम कृत्तिका नक्षत्र के नाम पर रखा गया है क्योकि जिस दिन कृत्तिका नक्षत्र अति प्रबल होता है उसी दिन कार्तिगाई दीपम मनाया जाता है। भगवान शिव के सम्मान में कार्तिगाई दीपम मनाया जाता है। हिन्दू धार्मिक ग्रंथो के अनुसार इस दिन भगवान शिव ने भगवान विष्णु और ब्रह्मा को अपनी श्रेष्ठता सिद्ध करने के लिए स्वंय को प्रकाश ज्योत में समाहित कर लिया था। devotional Karthigai Deepam history 

हालांकि, मासिक कार्तिगाई दीपम वर्ष के प्रत्येक माह में मनाया जाता है लेकिन मुख्य कार्तिगाई दीपम पर्व कार्तिक माह में पड़ता है। तमिल पंचांग द्रिक, साल के सभी माह में कृत्तिका नक्षत्र के प्रबलता को सूचीबद्ध करता है। devotional Karthigai Deepam history 

मासिक दुर्गाष्टमी की कथा एवं इतिहास

तिरुवन्नामलई की पहाड़ी में कार्तिगाई दीपम का पर्व बहुत प्रसिद्ध है इस दिन पहाड़ी पर विशाल दीपक जलाया जाता है जो दूर तक दिखाई देता है इस दीपक को भक्त गण महादीपम् कहते है इस दिन तिरुवन्नामलई की पहाड़ी पर बड़े तादात में भक्तगण आते है और भगवान शिव जी की पूजा कर उनसे सुख और शांति की प्रार्थना करते है।  devotional Karthigai Deepam history 
( प्रवीण कुमार )

loading…


You may also like...