23 अक्टूबर 2018 को है कोजागरा व्रत एवम शरद पूर्णिमा,जानिए व्रत की कथा एवम इतिहास

devotional Kojagara Puja history



धार्मिक ग्रंथों के अनुसार आश्विन माह की पूर्णिमा को कोजागरा व्रत मनाई जाती है। इसे लक्ष्मी पूजा भी कहते है। कोजागरा व्रत पूर्णिमा तिथि को मनाई जाती है। तदनुसार इस वर्ष गुरुवार 23 अक्टूबर 2018 को कोजागरा व्रत मनाया जाएगा। devotional Kojagara Puja history 

पूर्णिमा के दिन चाँद तो खूबसूरत दिखता ही है। किन्तु आश्विन माह की पूर्णिमा अर्थात कोजागरा व्रत के दिन चाँद की खूबसूरती देखते ही बनती है। पुराणों एवम शास्त्रों में आश्विन और कार्तिक माह को पुण्य माह कहा गया है। इस ऋतू में हर तरफ नयापन दिखता है। devotional Kojagara Puja history 

कोजागरा महात्मय devotional Kojagara Puja history 

हिन्दू धर्म शास्त्रों के अनुसार आश्विन माह की पूर्णिमा रात को चाँद से अमृत की वर्षा होती है। कोजागरा व्रत की रात्रि में दमकते चाँद से दूधिया रोशनी पृथ्वी पर पड़ती है। जिससे पृथ्वी का सौंदर्य यूं निखरता है कि देव गण भी पृथ्वी पर आनंद की प्राप्ति हेतु चले जाते है। devotional Kojagara Puja history 

कोजागरा व्रत की अनुपम सुंदरता देखते ही बनती है। इस तिथि का विशेष महत्व है। धर्म शास्त्रों के अनुसार आश्विन माह की पूर्णिमा की रात्रि में सम्पूर्ण जगत की अधिष्ठात्री माँ लक्ष्मी कमल आसन पर आसीन होकर धरती पर आती है। माँ लक्ष्मी जब वैकुण्ठ लोक से पृथ्वी पर आते समय देखती है कि उनका भक्त जागरण कर उनकी प्रतीक्षा करता है या सो गया है। इसी कारण रात्रि जाग्रति को कोजागरा कहा गया है। devotional Kojagara Puja history 




मिथिला कोजागरा devotional Kojagara Puja history 

देश के विभिन्न भागों में कोजागरा व्रत अलग-अलग रूप में मनाया जाता है। कोजागरा व्रत बिहार राज्य के मिथिला क्षेत्र में बड़े ही हर्षोउल्लास पूर्वक मनाया जाता है। इस दिन मिथिला क्षेत्र में विशेष रस्म-रिवाज का विधान है। devotional Kojagara Puja history 

पापाकुंशा एकादशी की कथा एवं इतिहास

जिनका विवाह तत्काल वर्ष में हुआ होता है। उस दूल्हे और दुल्हन को चुमाया जाता है। दूल्हे को चुमाने के बाद पान, मखान और मिठाइयां बांटी जाती है। इस अवसर पर लोग अपने रिश्तेदारों और पडोसी को रात्रि भोजन कराते है। कोजागरा व्रत रात्रि जागरण का व्रत है। अतः मिथिला क्षेत्र वासी इस रात्रि में जागरण करते है। जीजा और साले मिलकर कौड़ी, लूडो, शतरंज खेलते है। देश के अन्य भाग में कुछ इस तरह ही कोजागरा व्रत मनाया जाता है। devotional Kojagara Puja history 

कोजागरा पूजा devotional Kojagara Puja history 

ऐसी मान्यता है कि कोजागरा व्रत की पूजा रात्रि में करना चाहिए। माँ लक्ष्मी की पूजा करने से पहले सर्वप्रथम पूज्य भगवान श्री गणेश जी की पूजा करें। तत्पश्चात माँ लक्ष्मी की पूजा करें। माँ की पूजा फल, फूल, धुप, दीप आदि से करनी चाहिए। माँ को प्रसाद के रूप में नैवैद्य, मखाना, सिंघाड़ा और लड्डू का भोग लगाएं। devotional Kojagara Puja history 

धार्मिक मान्यता अनुसार कोजागरा व्रत की रात्रि में जागरण कर लक्ष्मी जी का भजन-कीर्तन करना चाहिए। जो प्राणी शुद्ध मन से माँ लक्ष्मी जी की पूजा करता है उन्हें माँ लक्ष्मी जी का आशीर्वाद प्राप्त होता है। उनकी कृपा से व्रती के गृह में धन का आगमन होता है। devotional Kojagara Puja history 

व्रत रखने वाले इस दिन संध्या में भगवान गणपति जी और माँ लक्ष्मी जी की पूजा करके अन्न ग्रहण करना चाहिए। इस प्रकार कोजागरा व्रत की कथा सम्पन्न हुई। प्रेम से बोलिए माँ लक्ष्मी जी और भगवान श्री गणेश जी की जय।  devotional Kojagara Puja history 
(प्रवीण कुमार)

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