2 सितम्बर 2018 को है कृष्ण जन्माष्टमी जानिए वर्त की कथा एवम इतिहास

devotional krishna janmashtami history



पौराणिक धर्म ग्रंथो के अनुसार भगवान श्री कृष्ण जी का जन्म भाद्रपद की कृष्ण पक्ष में अष्टमी की अर्धरात्रि को रोहिणी नक्षत्र में देवकी तथा वासुदेव जी के पुत्ररूप में हुआ था। इसी उपलक्ष्य में प्रत्येक वर्ष भगवान श्री कृष्ण जी की जन्म जयंती मनाई जाती है। devotional krishna janmashtami history  

तदनुसार इस वर्ष सोमवार 2 सितम्बर 2018 को मनाई जाएगी। यह त्यौहार समस्त भारत वर्ष में अति उत्साह एवम उमंग से मनाया जाता है। पौराणिक संदर्भ के दृष्टि से भगवान श्री कृष्ण जी ने द्वापर युग में समस्त पापो का नाश एवम धर्म की स्थापना करने के लिए स्वंय अवतरित हुए थे। devotional krishna janmashtami history  

जन्माष्टमी व्रत कथा devotional krishna janmashtami history  

स्कन्द पुराण के अनुसार राजा उग्रसेन द्वापर युग में मथुरा राज्य में राज करते थे। राजा उग्रसेन को उनके पुत्र कंश ने उन्हें राजगद्दी से हटाकर स्वंय मथुरा राज्य का राजा बन गया। कंस को बहन देवकी से अपार स्नेह था इसके लिए कंस ने बहन देवकी का विवाह यदुवंशी सरदार वासुदेव से करा दिया। devotional krishna janmashtami history  




जब कंस अपनी बहन तथा वासुदेव जी को रथ हांकता हुआ ससुराल विदा करने के लिए गया तभी एक आकाशवाणी हुई। जिस देवकी को तुम अति स्नेह से विदा करने जा रहा हो उसका आठवां पुत्र ही तेरा संहार करेगा। devotional krishna janmashtami history  

आकाशवाणी सुन कंस क्रोधित हो उठा तथा क्रोध में कंस ने सोचा यदि देवकी को मार दू तो इसे पुत्र ही नही होगा फिर मैं अजर-अमर हो जाऊंगा। किन्तु बहन देवकी का वध कैसे करू। कंस को क्रोधित देख वासुदेव जी भी युद्ध की स्थिति के लिए तैयार हो गए। किन्तु वासुदेव जी युद्ध के पक्ष में नही थे।  devotional krishna janmashtami history

तदोपरांत वासुदेव जी ने कंस से बोले, तुम्हें देवकी से डरने की कोई जरुरत नही है। वक्त आने पर मैं स्वंय देवकी के आठवीं संतान को तुम्हें सौप दूंगा। वासुदेव जी के समझाने के पश्चात कंस का क्रोध शांत हुआ। क्योंकि कंस जानता था की यदुवंशी वासुदेव जी कभी झूठ नही बोलते थे। तत्पश्चात कंस ने वासुदेव जी एवम देवकी को कारागार में बंद कर दिया तथा कारागार पर सख्त पहरा लगवा दिया। devotional krishna janmashtami history  

कजरी तीज की कथा एवम इतिहास

वासुदेव जी वचनानुसार अपनी संतान को कंस को सौप देते थे तथा क्रूर कंस ने एक-एक कर देवकी के सातों संतानो का वध कर दिया। किन्तु जब आठवें संतान का समय आया तो कंस ने देवकी तथा वासुदेव जी पर कड़ा पहरा लगा दिया।

भाद्रपद माह में कृष्ण पक्ष की अष्टमी की अर्धरात्रि में को भगवान श्री कृष्ण जी का जन्म माता देवकी के गर्भ से हुआ। संयोग वस यशोदा के गर्भ से भी उसी दिन एक कन्या का जन्म हुआ, जो कुछ नहीं सिर्फ ‘माया’ थी। devotional krishna janmashtami history 

प्रेम से बोलिए भगवान श्री कृष्ण जी की जय

बालक कृष्ण जी के जन्मो उपरांत कारागार में अचानक तेज प्रकाश प्रज्वलित हुआ। इस प्रकाश से भगवान विष्णु जी प्रकट हुए, उन्होनें वासुदेव जी से कहा कि मैं ही बाल्यरूप में आपके संतान के रूप में जन्म लिया हूँ। आप अभी तत्काल अपने मित्र नंदजी के घर वृन्दावन में कृष्ण जी को छोड़ आइए तथा उनके यहाँ जो कन्या जन्मी है, उसे लाकर कंस को दे दीजिए।  devotional krishna janmashtami history  

भगवान विष्णु जी के आदेशानुसार वासुदेव जी नवजात शिशु को सूप में रखकर कारागृह से निकल पड़े। वासुदेव जी चमत्कार देख दंग हो गए। वासुदेव जी जैसे ही बाहर निकले, पहरेदार सब सोया हुआ था। यमुना नदी की उफनती नदी भी शांत हो गयी। यमुना नदी पर कर वासुदेव जी शिशु को यशोदा के समक्ष भगवान कृष्ण जो को सुला कन्या को लेकर मथुरा आ गए।  devotional krishna janmashtami history  

जब कंस को देवकी के आठवें पुत्र के बारे में सुचना मिली कि वासुदेव-देवकी को आठवें संतान की प्राप्ति हुई है तब कंस ने कारागार में जाकर देवकी के हाथ से कन्या को छीनकर पृथ्वी पर पटकना चाहा। किन्तु कन्या आकाश में उड़ गई और बोली, अरे मुर्ख, मुझे मारने से तुम्हें क्या प्राप्त होगा ? तुझे जल्द ही तेरे पापों का दंड मिलेगा। devotional krishna janmashtami history  

यह सुनकर कंस बहुत क्रोधित हुआ। कंस ने बालक कृष्ण जी का वध करने का बहुत प्रयास किया, लेकिन कंस ऐसा नही कर पाया, युवावस्था में भगवान श्री कृष्ण जी ने अपने मामा कंस का वध किया। devotional krishna janmashtami history  

जन्माष्टमी व्रत पूजा महत्व devotional krishna janmashtami history  

वेदों, पुराणों एवम शास्त्रों के अनुसार इस व्रत का पालन करने से व्रती को मोक्ष की प्राप्ति होती है। यह व्रत कामनाओां को पूर्ण करने वाला होता है। भगवान श्री कृष्ण जी को समर्पित यह व्रत भक्तों को भाव-विभोर कर देता है। devotional krishna janmashtami history  

जन्माष्टमी का पर्व बड़े ही धूमधाम से पुरे देश में मनाया जाता है। इस दिन कँही होली होती है, कंही दही हांड़ी फोड़ने का आयोजन किया जाता है। मंदिरो को विशेष रूप से सजाया जाता है। झांकियां एवम झूला सजाया जाता है तथा भगवान श्री कृष्ण जी को झूला झुलाया जाता है।

जन्माष्टमी व्रत पूजन विधि devotional krishna janmashtami history  

इस दिन ब्रह्म मुहूर्त में उठें, दैनिक कार्य से निवृत होकर घर की साफ-सफाई करें। घर को गंगा जल से शुद्ध कर लेना चाहिए। इस दिन घर में स्थित पूजा गृह को फूलों आदि से सजाये। भगवान श्री कृष्ण जी का जन्म अर्धरात्रि में हुई। अतः इस दिन निराहार रहें, एवम संध्याकाल में स्नान-ध्यान करके व्रत संकल्प लें। devotional krishna janmashtami history  

अर्धरात्रि में 12 बजे भगवान श्री कृष्ण जी के जन्म के पश्चात भगवान का विग्रह दूध, दही, माखन, मिश्री, पंचामृत से करें। तत्पश्चात भगवान श्री कृष्ण जी की पूजा फल, फूल, धुप, दीप, दूर्वा, अक्षत आदि से विधि पूर्वक करें। आरती-अर्चना करने के पश्चात पूजा सम्पन्न करें।  devotional krishna janmashtami history 

पूजा सम्पन्न होने के पश्चात फलाहार करना चाहिए। नवमी के दिन स्नान-ध्यान एवम पूजा करने के बाद व्रत को खोलें। इस प्रकार जन्माष्टमी की कथा सम्पन्न हुई। प्रेम से बोलिए भगवान श्री कृष्ण जी की जय।  devotional krishna janmashtami history  
(प्रवीण कुमार )

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