18 जुलाई 2017 को है मंगलागौरी,जानिए व्रत की कथा एवम इतिहास

devotional mangala gauri history



हिन्दू धर्म के अनुसार गौरी पूजन प्रत्येक मंगलवार को किया जाता है। गौरी पूजन सौभाग्यवती स्त्रियों के लिए अखंड सौभाग्य का वरदान देता है। हिंदी पंचांग के मंगलवार  18 जुलाई 2017 को मंगला गौरी व्रत मनाया जाएग। माँ गौरी का यह व्रत मंगला गौरी के नाम से विख्यात है। स्त्री अपने पति की लम्बी आयु के लिए मंगला गौरी का व्रत करती है। devotional mangala gauri history 

गौरी पूजा की कथा devotional mangala gauri history 

प्राचीन काल में आनंद नगर में धर्मपाल नामक एक सेठ अपनी पत्नी के साथ सुख पूर्वक जीवन-यापन करता था। धर्मपाल के जीवन में धन, वैभव की कोई कमी नही थी, किन्तु उसे केवल एक बात की दुःख हमेशा सताती थी। जो सेठ धर्मपाल के दुःख का कारण बनती थी की उसकी कोई संतान नही थी। devotional mangala gauri history 

सेठ धर्मपाल खूब पूजा-पाठ तथा दान-पुण्य किया करता था। उसके पूजा-पथ तथा अच्छे कार्यो की कृपा से एक पुत्र प्राप्त हुआ, परन्तु पुत्र की आयु अधिक नही थी। ज्योतिषियों के अनुसार सेठ धर्मपाल के पुत्र की मृत्यु जन्म के सोलहवे वर्ष में साँप डसने के कारण हो जायेगा।  devotional mangala gauri history 

कल्कि जयंती की कथा एवम इतिहास

सेठ धर्मपाल अपने पुत्र की कम आयु को जाना तो उसे अपने किस्मत पर बड़ा दुःख हुआ। सेठ धर्मपाल ने सोचा की भाग्य को कैसे बदला जा सकता है। अतः प्रभु की इच्छा में मेरी इच्छा निहित है। devotional mangala gauri history 

कुछ समय पश्चात सेठ धर्मपाल ने अपने पुत्र का विवाह एक योग्य एवम संस्कारी कन्या से कर दिया। कन्या बचपन से ही माता गौरी का व्रत किया करती थी। अतः इस प्रभाव से कन्या को माता गौरी से अखंड सौभाग्यवती होने का आशीर्वाद प्राप्त था जिसके अनुसार सेठ धर्मपाल का पुत्र दीर्घायु हो गया।  devotional mangala gauri history 




मंगला गौरी पूजन विधि  devotional mangala gauri history

मंगला गौरी पूजा का प्रारम्भ सावन माह के प्रथम मंगलवार से करना चाहिए तथा इसे प्रत्येक महीने की हर मंगलवार को करना चाहिए। व्रती चाहे तो पॉंच वर्ष पूरा होने के पश्चात इस व्रत का उद्यापन कर सकती है। devotional mangala gauri history 

इस दिन स्नान-ध्यान से पवित्र होकर मंगला गौरी की मूर्ति या चित्र को लाल रंग के कपड़े से लिपट कर पूजा की चौकी पर रखे। तत्पश्चात, गेंहू के आटे से एक दिया बनाये। सबसे पहले भगवान श्री गणेश क पूजा करे। माता गौरी की पूजा जल, चन्दन, सिंदूर, सुपारी, लौंग, फल, फूल, इलायची, बेलपत्र, तथा मेवा से करे। माता गौरी को मेहँदी और चूड़ियाँ चढ़ावा मे रखे। devotional mangala gauri history 

अंत में माता गौरी की व्रत कथा सुने। गेहू के बने दिए से माता गौरी की आरती उतारे। पूजा समाप्ति के पश्चात माता गौरी से सौभाग्यवती, सुख, वैभव तथा मंगल एवम शांति के लिए कामना करे। माता गौरी व्रती के सारी मनोकामनाएं पूर्ण करती है। इस तरह माता गौरी की व्रत कथा सम्पन्न हुई। प्रेम से बोलिए माता गौरी की जय। devotional mangala gauri history 
( प्रवीण कुमार )

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