2 दिसंबर 2017 को है मार्गशीर्ष पूर्णिमा जानिए व्रत की कथा एवं महत्व

devotional Margashirsha Purnima history



गीता उपदेश में भगवान श्री कृष्ण जी ने कहा, महीनो में मैं पवित्र महीना मार्गशीर्ष हूँ। अतः मार्गशीर्ष या अगहन माह अति पावन माह है। मार्गशीर्ष माह की पूर्णिमा को मार्गशीर्ष पूर्णिमा मनाई जाती है। तदानुसार, इस वर्ष रविवार 2 दिसंबर 2017 को मार्गशीर्ष पूर्णिमा मनाई जाएगी। devotional Margashirsha Purnima history 

धार्मिक मान्यता है की कार्तिक पूर्णिमा की तरह मार्गशीर्ष पूर्णिमा का भी विशेष महत्व है। मार्गशीर्ष पूर्णिमा के दिन अनेक पवित्र स्थानो जैसे हरिद्वार, बनारस, मथुरा आदि जगह पर लोग आस्था की डुबकी पवित्र नदियों, सरोवर में लगाते है। मार्गशीर्ष पूर्णिमा के दिन स्नान-दान से अमोघ फल प्राप्त होता है। भगवान श्री कृष्ण जी के अनुसार, इस माह प्रतिदिन स्नान -दान पूजा पाठ करने से भक्तो के पाप कटते है एवं भक्त की सारी मनोकामनाएँ पूर्ण होती है। devotional Margashirsha Purnima history 




अगहन या मार्गशीर्ष पूर्णिमा का महत्व devotional Margashirsha Purnima history 

मार्गशीर्ष या अगहन का महीना श्रद्धा एवं भक्ति का महीना है।कार्तिक माह की तरह मार्गशीर्ष माह में भक्तगण प्रतिदिन पवित्र नदियों में डुबकी लगाते है।डुबकी लगाने के पश्चात पूजा-पाठ एवं भजन-कीर्तन करते है, गंगा के घाटो पर भक्त मंडलिया प्रतिदिन सुबह के समय भजन व् कीर्तन करते रहते है। devotional Margashirsha Purnima history 

सनातन धर्म के अनुसार सतयुग काल का प्रारम्भ देवताओ ने मार्गशीर्ष मास की प्रथम तिथि को ही किया था। अतः यह धर्म के लिए अति पावन महीना है। पुराणो क अनुसार मार्गशीर्ष माह में नदी-स्नान के लिए तुलसी जड़ की मिट्टी तथा तुलसी पत्ते का प्रयोग करने की बात कही गयी है, स्नान के समय भक्त गण को ॐ नमो नारायण या गायत्री मंत्र का जाप करना चाहिए। devotional Margashirsha Purnima history 

मार्गशीर्ष पूर्णिमा के दिन दान का भी उल्लेख धार्मिक ग्रंथो में किया गया है। अपने सामर्थ्य के अनुसार मार्गशीर्ष पूर्णिमा के दिन दान करने से बत्तीस गुना फल प्राप्त होता है। अतः मार्गशीर्ष पूर्णिमा को बत्तीसी पूर्णिमा या बतीसी पूनम भी कहा जाता है। devotional Margashirsha Purnima history 

मार्गशीर्ष पूर्णिमा पूजन devotional Margashirsha Purnima history 

मार्गशीर्ष पूर्णिमा के दिन मार्गशीर्ष पूर्णिमा का व्रत करते हुए भगवान श्री सत्यनारायण जी की पूजा-अर्चना और उनकी कथा की जाती है जो परम पुण्यकारी और फलदायी है। पूजा धुप, दीप अगरबत्ती के साथ चूरमा का भोग लगाया जाता है जो भगवान श्री हरी विष्णु जी को अतिप्रिय है। पूजा समापन के समय होम करने की विधि है होम समाप्ति के पश्चात भगवान श्री विष्णु जी से मंगल व् सुख की कामना करना चाहिए। devotional Margashirsha Purnima history 

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पूजा कार्य समाप्ति के पश्चात लोगो में प्रसाद वितरण करना चाहिए। मार्गशीर्ष पूर्णिमा के दिन ब्राह्मणो को अपने सामर्थ्य के अनुसार दान प्रदान करना चाहिए। श्री हरि विष्णु जी की कृपा से भक्त के सारे संकट दूर हो जाते है एवं हर मनोकामनाए पूर्ण होती है। इस तरह मार्गशीर्ष पूर्णिमा की महिमा व् पूजा विधि सम्पन्न होती है। प्रेम से बोलिए भगवान श्री हरि विष्णु जी की जय।  devotional Margashirsha Purnima history 
( प्रवीण कुमार )

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