मासिक कार्तिगाई की कथा एवम इतिहास

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तमिल पंचांग के अनुसार वर्ष के प्रत्येक माह में मासिक कार्तिगाई मनाया जाता है। तदनुसार, जून माह में 3 जून 2016 को मासिक कार्तिगाई मनाया जाएगा। कार्तिगाई दीपम पर्व को दक्षिण भारत के तमिलनाडु राज्य में हिन्दू धर्म के लोग मनाते है यह पर्व दक्षिण भारत में मनाये जाने वाले पर्वों में सबसे पुराना पर्व है। कार्तिगाई दीपम वर्ष के प्रत्येक माह में मनाया जाता है। अतः इसे मासिक कार्तिगाई दीपम भी कहा जाता है। devotional masik karthigai history 

वट सावित्री की कथा एवम इतिहास

मासिक कार्तिगाई दीपम के अवसर पर लोग शाम में घरो और आस-पास के जगहों पर तिल के तेल या घी के दीपक एक कतार बद्ध पंक्ति में जलाते है। कार्तिगाई दीपम का नाम कृत्तिका नक्षत्र के नाम पर रखा गया है क्योकि जिस दिन कृत्तिका नक्षत्र अति प्रबल होता है उसी दिन कार्तिगाई दीपम मनाया जाता है। devotional masik karthigai history 

भगवान शिव के सम्मान में कार्तिगाई दीपम का पर्व दक्षिण भारत में मनाया जाता है। हिन्दू धार्मिक ग्रंथो के अनुसार इस दिन भगवान शिव ने भगवान विष्णु और ब्रह्मा के समक्ष अपनी श्रेष्ठता सिद्ध करने के लिए स्वंय को प्रकाश की ज्योत में बदल लिया था devotional masik karthigai history 

कार्तिगाई दीपम का पर्व बहुत प्रसिद्ध है

हालांकि, मासिक कार्तिगाई दीपम वर्ष के प्रत्येक माह में मनाया जाता है लेकिन मुख्य कार्तिगाई दीपम पर्व कार्तिक माह में पड़ता है। तमिल पंचांग द्रिक, साल के सभी माह में कृत्तिका नक्षत्र के प्रबलता को सूचीबद्ध करता है। devotional masik karthigai history 

तिरुवन्नामलई की पहाड़ी में कार्तिगाई दीपम का पर्व बहुत प्रसिद्ध है इस दिन पहाड़ी पर विशाल दीपक जलाया जाता है जो दूर तक दिखाई देता है इस दीपक को भक्त गण महादीपम् कहते है। इस दिन तिरुवन्नामलई की पहाड़ी पर बड़े तादात में भक्तगण आते है और भगवान शिव जी की पूजा कर उनसे सुख और शांति की प्रार्थना करते है। भगवान शिवजी की कृपा से व्रती की मनोकामनाएं पूर्ण होती है। इस प्रकार मासिक कार्तिगाई की कथा सम्पन्न हुई। प्रेम से बोलिए भगवान शिव जी की जय। devotional masik karthigai history 
( प्रवीण कुमार )




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