2 नवंबर 2017 को है नरक चतुर्दशी,जानिए व्रत की कथा एवं इतिहास

devotional Narak Chaturdashi history




धार्मिक ग्रंथों के अनुसार कार्तिक माह में कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को नरक चतुर्दशी या वैकुंठ चतुर्दशी मनाई जाती है। तदनुसार इस वर्ष गुरुवार 2 नवंबर 2017 को नरक चतुर्दशी मनाई जाएगी। devotional Narak Chaturdashi history

इस तिथि को द्वापर युग में भगवान श्री कृष्ण जी ने नरकासुर नामक राक्षस का वध किया था इसी कारण कार्तिक माह की कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को नरक चतुर्दशी कहा जाता है। इसे छोटी दिवाली भी कहा जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार नरक चतुर्दशी को मुक्ति का पर्व माना जाता है। devotional Narak Chaturdashi history

कथा devotional Narak Chaturdashi history

वेदों, पुराणों एवम शास्त्रों के अनुसार प्राग्ज्योतिषपुर नगर में राजा नरकासुर नामक दैत्य था। राजा ने अपने शक्ति से स्वर्ग नरेश इंद्र, जल देव वरुण, वायु देव और अग्नि देव सहित सभी देवताओं को पराजित कर दिया था।

राजा नरकासुर का प्रकोप इतना बढ़ गया कि वह महिलाओं पर भी अत्याचार करने लगा। उसने सम्पूर्ण जगत के 16 हजार महिलाओं को बंदी बना लिया । जब राजा नरकासुर का अत्याचार अत्यधिक बढ़ गया तो देवता व ऋषि-मुनि सभी भगवान श्री कृष्ण जी की शरण में गए तथा उन्हें नरकासुर के आतंक से अवगत कराया। devotional Narak Chaturdashi history

प्रदोष व्रत की कथा एवं इतिहास

देवताओं और ऋषियों की विनती सुनने के पश्चात भगवान श्री कृष्ण जी ने उन्हें नरकासुर से मुक्ति दिलाने का आश्वासन दिया। किन्तु नरकासुर ने त्रिदेव से महिला के हाथों मरने का वर मांग लिया था। क्योंकि नरकासुर को ऐसा प्रतीत होता था कि महिला कमजोर होती है और महिला नरकासुर जैसे दैत्य का वध नहीं कर सकती है।

इसीलिए भगवान श्री कृष्ण जी ने अपनी पत्नी सत्यभामा को अपना सारथी बनाया तथा सत्य भामा की सहायता से भगवान श्री कृष्ण जी ने दैत्य नरकासुर का वध कर लोगों और बंदी बनी 16 हजार महिलाओं को मुक्ति दिलाई। devotional Narak Chaturdashi history

जिस दिन दैत्य नरकासुर का वध हुआ था उस दिन कार्तिक माह की कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी थी। अतः इस दिन नरक चतुर्दशी मनाई जाती है। नरक चतुर्दशी के अगले दिन लोगों ने दीप जलाकर दीपावली मनाई। devotional Narak Chaturdashi history




नरक चतुर्दशी पूजन विधि devotional Narak Chaturdashi history

इस दिन व्रती को प्रातः काल बर्ह्म मुहूर्त में उठना चाहिए। दैनिक कार्य से निवृत होकर स्नान हेतु पवित्र नदियों अथवा सरोवर में तिल का तेल लगाकर स्नान करना चाहिए। स्नान करने के पश्चात भगवान सूर्य देव को अर्घ्य अर्पित करें। तत्पश्चात ॐ पवित्राय नमः का उच्चारण कर स्वंय को शुद्ध करें। devotional Narak Chaturdashi history

तदोपरांत, हस्त में पुष्प व् अक्षत लेकर व्रत का संकल्प करें। व्रत संकल्प लेने के पश्चात सर्वप्रथम एक कलश स्थापित करें। इस कलश में जल रखकर उसके ऊपर आम का पल्लों विराजित करें। अब एक चौकी पर भगवान श्री कृष्ण और सत्यभामा जी की प्रतिमा स्थापित करें। devotional Narak Chaturdashi history

प्रतिमा स्थापित करने के पश्चात भगवान की पूजा जल, पुष्प, दूर्वा, अक्षत, चन्दन, अगरबत्ती आदि से करें। प्रसाद रूप में भगवान को माखन और लड्डू अर्पित करें। घी के दीप प्रज्वालित कर भगवान बांके बिहारी लाल की आरती उतारें। ततपश्चात भगवान के अनुभूति कर पूजा सम्पन्न करें। दिन भर निराहार उपवास करें। संध्या आरती के पश्चात फलाहार करें। अमावश्या के दिन व्रत को खोलें। devotional Narak Chaturdashi history

विधि पूर्वक नरक चतुर्दशी व्रत को करने से व्रती को मोक्ष की प्राप्ति होती है। इस व्रत के प्रभाव से व्रती को मनोवांछित फल प्राप्त होता है। इस प्रकार नरक चतुर्दशी की कथा सम्पन्न हुई। प्रेम से बोलिए भगवान श्री कृष्ण जी और माँ सत्य भमा की जय।  devotional Narak Chaturdashi history
( प्रवीण कुमार )

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