7 फरवरी 20018 को नृसिंह द्वादशी, जानिए कथा एवं महत्व

devotional Narasimha Dwadashi story




वेदों, पुराणों एवं शास्त्रों के अनुसार फाल्गुन माह में शुक्ल पक्ष की द्वादशी को नृसिंह द्वादशी मनाई जाती है। तदानुसार, इस वर्ष 27 फरवरी 20018 को नृसिंह मनाई जाएगी।  devotional Narasimha Dwadashi story 

नृसिंह कथा

भगवान विष्णु के बारह अवतार में से एक अवतार भगवान नरसिंह का है। नृसिंह अवतार में भगवन श्री हरि विष्णु जी आधा मनुष्य तथा आधा शेर का रूप धारण करके दैत्यों के राजा हिरण्यकशिपु का वध किया है। धार्मिक ग्रंथो के अनुसार प्राचीन काल में कश्यप नामक ऋषि रहते थे। ऋषि कश्यप  के पत्नी का नाम दिति था तथा उनकी दो संतान थी। ऋषि कश्यप ने प्रथम पुत्र का नाम ‘हरिण्याक्ष’  तथा दूसरे पुत्र का नाम ‘हिरण्यकशिपु’ रखा था। परंतु ऋषि के दोनों संतान असुर प्रवृति का होगा। devotional Narasimha Dwadashi story 

आसुरी प्रवृति के होने के कारण भगवान विष्णु जी के वराह रूप ने पृथ्वी की रक्षा हेतु ऋषि कश्यप के पुत्र ‘हरिण्याक्ष का वष कर दिया था। अपने भाई की मृत्यु से दुखी तथा क्रोधित होकर हिरण्यकशिपु ने अपने भाई की मृत्यु का प्रतिशोध लेने के लिए अजेय होने का संकल्प लिया। हिरण्यकशिपु ने भगवान ब्रह्मा जी का कठोर तप किया। उसकी तपस्या से प्रसन्न होकर भगवान ब्रह्मा जी  हिरण्यकशिपु को अजेय होने का वरदान दिया। devotional Narasimha Dwadashi story 

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वरदान पाने के पश्चात  हिरण्यकशिपु ने स्वर्ग पर अधिपत्य स्थापित कर लिया तथा स्वर्ग के देवो को मारकर भगा दिया। तीनो लोको में त्राहि माम् मच गया। अजेय वर प्राप्त करने के कारण हिरण्यकशिपु तीनो लोको का स्वामी बन गया। देवता गण उनसे युद्ध में पराजित हो जाते थे। हिरण्यकशिपु  को अपने शक्ति पर अत्यधिक अहंकार हो गया। जिस कारण  हिरण्यकशिपु प्रजा पर भी अत्याचार करने लगा। इस दौरान  हिरण्यकशिपु की पत्नी कयाधु ने एक पुत्र को जन्म दिया। जिसका नाम प्रह्लाद रखा गया। परन्तु प्रह्लाद पिता के स्वभाव से पूर्णतः विपरीत स्वभाव का था। devotional Narasimha Dwadashi story 

भक्त प्रह्लाद बचपन से ही संत प्रवृति का था तथा भक्त प्रह्लाद अपने बाल्यकाल से ही भगवान विष्णु जी का भक्त बन गया। भक्त प्रह्लाद अपने पिता के कार्यो का विरोध करता था। भगवान-भक्ति से प्रह्लाद का मन हटाने के लिए  हिरण्यकशिपु ने बहुत प्रयाश किया। परन्तु भक्त प्रह्लाद इससे कभी विचलित नही हुए। अंततः  हिरण्यकशिपु ने अनीति का सहारा लिया तथा अपने पुत्र की हत्या के लिए उसे पर्वत से धकेला गया, होलिका दहन में जलाया गया। परन्तु हर बार भगवन विष्णु की कृपा से भक्त प्रह्लाद बच जाता था। भगवान के इस चमत्कार ने प्रजा जन भी भगवान विष्णु की पूजा तथा गुणगान करने लगे। devotional Narasimha Dwadashi story 

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इस घटना से  हिरण्यकशिपु क्रोधित हो गया। भक्त प्रह्लाद को कटु शब्द में बोला, कहाँ है तेरा भगवान। सामने बुला। प्रह्लाद ने कहा, प्रभु तो सर्वशक्तिमान है। वो तो कण-कण में व्याप्त है। यहाँ भी है, वहाँ भी है। क्रोधित हिरण्यकशिपु ने क्रोधित होकर इस खम्बे में तेरा भगवान छिपा है ? भक्त प्रह्लाद ने कहा, हाँ। यह सुनकर  हिरण्यकशिपु ने खम्बे पर अपने गदे से प्रहार किया। तभी खम्बे को चीरकर भगवान नृसिंह ने  हिरण्यकशिपु को अपने जांघो पर उसकी छाती को नखो से फाड़ कर उसका वध कर डाला। भगवान नरसिंह ने भक्त प्रहलाद को वरदान दिया। जो कोई आज के दिन भगवान नृसिंह का स्मरण, व्रत तथा पूजा-अर्चना करेगा। उसकी मनोकामनाएँ अवश्य पूर्ण होगी।  devotional Narasimha Dwadashi story

नृसिंह द्वादशी पूजन विधि

नृसिंह द्वादशी के दिन व्रत-उपवास एवम पूजा-अर्चना की जाती है। नृसिंह जयंती के दिन प्रातः काल ब्रह्म मुहर्त में उठकर स्नान आदिसे निवृत होकर स्वच्छ वस्त्र धारण करना चाहिए एवम भगवान नृसिंह की पूजा विधि-विधान से करे। भगवान नृसिंह पूजा फल, फूल, धुप, दीप, अगरबत्ती, पंचमेवा, कुमकुम, केसर, नारियल, अक्षत एवम पीतांबर से करे। भगवान नृसिंह को प्रसन्न करने हेतु निम्न मन्त्र का जाप करे

ॐ उग्रं वीरं महाविष्णुं ज्वलन्तं सर्वतोमुखम्।

नृसिंहं भीषणं भद्रं मृत्यु मृत्युं नमाम्यहम्॥

इन मंत्रो के जाप करने से समस्त प्रकार के दुखो का निवारण होता है तथा भगवान नृसिंह की कृपा से जीवन में मंगल ही मंगल होता है। भगवान नृसिंह अपने भक्तो की सदैव रक्षा करते है। इस तरह नृसिंह द्वादशी की कथा सम्पन्न हुई।  प्रेम से बोलिए भगवान विष्णु रूप नृसिंह देव की जय। devotional Narasimha Dwadashi story 

( प्रवीण कुमार )




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