6 सितंबर 2018 को है पद्मा एकादशी, जानिए वर्त की कथा एवम इतिहास

devotional padma ekadashi history

हिन्दू धार्मिक ग्रंथों के अनुसार भाद्रपद माह की शुक्ल पक्ष की एकादशी को पद्मा एकादशी कहा जाता है। इस वर्ष शनिवार 6  सितंबर 2018 को पद्मा एकादशी मनाई जाएगी। इस व्रत को करने से व्रती को सुख, सौभाग्य की प्राप्ति होती है। इस एकादशी को जलझूलनी एकादशी भी कहा जाता है। devotional padma ekadashi history 




पद्मा एकादशी की कथा devotional padma ekadashi history 

धार्मिक कथानुासर एक बार की बात है जब राजा इंद्र को दैत्यराज बलि की इच्छा का ज्ञान होता है कि दैत्यराज बलि सौ यज्ञ पूरा करने के पश्चात स्वर्ग को प्राप्त करने में सक्षम हो जाएगा।तदोपरांत स्वर्ग के राजा इंद्र भगवान विष्णु की शरण में जाते है। भगवान विष्णु समस्त देवता गण की सहायता करने का आश्वासन देते है तथा उनको भविष्य में उनके वामन रूप से अवगत कराते है।

भगवान विष्णु ने कहा की माता अदिति के गर्भ से वामन रूप में मैं अवतार लूंगा। भाद्र माह में शुक्ल पक्ष की द्वादशी को भगवान विष्णु माता अदिति के गर्भ से अवतार लेते है तथा बाल्यकाल से ब्रह्मचारी ब्राह्मण रूप को धारण कर लेते है। devotional padma ekadashi history 

गौरी पूजा की कथा एवम इतिहास

भगवान विष्णु के वामन रूप का उनके पिता महर्षि कश्यप ने उपनयन संस्कार किया। पिता से आज्ञा लेकर ब्राह्मण वामन राजा बलि के पास नर्मदा के उत्तर-तट पर पहुँचते है जहाँ दैत्यराज बलि अंतिम यज्ञ कर रहे थे।वामन अवतार भगवान विष्णु, राजा बलि से भिक्षा-याचना करते है। राजा बलि वामन ब्राह्मण को देख उन्हें भिक्षा देने का आशवासन देता है। भगवान वामन उनसे तीन पग भूमि दान में देने की याचना करते है जिसे दैत्यराज बलि शंककराचार्य के विरोध करने के बाबजूद दान में देने का वचन देते है। devotional padma ekadashi history 



म से बोलिए भगवान श्री हरि विष्णु जी की जय

भगवान वामन एक पग में स्वर्ग को, दूसरे पग में पृथ्वी को नाप लेते है। अब तीसरा पग रखने का कोई स्थान नही रह जाता है। इस स्थिति में राजा बलि के समक्ष संकट उतपन्न हो जाता है की ब्राह्मण वामन को तीसरा पैर रखने के लिए स्थान कहाँ से लाये। devotional padma ekadashi history 

आख़िरकार, अपने कर्तव्यो का पालन करने के लिए राजा बलि अपना मस्तक भगवान के आगे कर देता है। राजा बलि कहता है, हे ब्राह्मण देव तीसरा पग मेरे मस्तक पर रख दीजिये। भगवान वामन ठीक वैसा ही करते है तथा दैत्यराज बलि को पाताल लोक में रहने का आदेश देते है। devotional padma ekadashi history 

परन्तु दैत्यराज बलि की दान तथा भक्ति से प्रभु प्रसन्न होते है। भगवान विष्णु राजा बलि से वर मांगने को कहता है। तत्पश्चात, राजा बलि उनसे साथ में रहने की वचन माँगता है। भगवान विष्णु अपने वचन का पालन करते हुए पाताल लोक में राजा बलि का द्वारपाल बनना स्वीकार करते है। devotional padma ekadashi history 

पद्मा एकादशी का महत्व devotional padma ekadashi history 

पद्मा एकादशी के दिन भगवान विष्णु जी की शोभा यात्रा निकाली जाती है। मंदिरो में भजन-कीर्तन का आयोजन किया जाता है। इस व्रत को करने से वाजपेय यज्ञ का फल प्राप्त होता है। यह व्रत समस्त पापों को नाश करने वाला होता है। devotional padma ekadashi history 

भगवान ने कहा है कि जो कोई इस व्रत को विधि पूर्वक करता है। उसकी हर मनोकामनाएं पूर्ण होती है। जो मनुष्य मोक्ष की अभिलाषा करता है। उसे पद्मा एकादशी का व्रत अवश्य करना चाहिए। devotional padma ekadashi history 

व्रत विधि devotional padma ekadashi history 

पद्मा एकादशी के दिन जो व्यक्ति व्रत करता है, उसे भूमि दान, गौ दान के समान फल प्राप्त होता है। व्रती को प्रातः काल उठना चाहिए। स्नान आदि से निवृत होकर पद्मा एकादशी का व्रत संकल्प लें। devotional padma ekadashi history 

भगवान विष्णु जी की पूजा विधि पूर्वक करना चाहिए। भगवान श्री हरि विष्णु जी की पूजा फल, फूल, धुप-दीप, नैवेद्य आदि से करना चाहिए। पूजा सम्पन्न होने पर भगवान विष्णु जी से परिवार के लिए सुख, शांति, मंगल की कामना करना चाहिए। devotional padma ekadashi history 

इस दिन निराहार उपवास रखें। संध्या आरती के पश्चात फलाहार करें। द्वादशी के दिन पूजा करने के पश्चात व्रत को तोड़ें। इस प्रकार पद्मा एकादशी की कथा सम्पन्न हुई। प्रेम से बोलिए भगवान श्री हरि विष्णु जी की जय।  devotional padma ekadashi history 
( प्रवीण कुमार )

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