13 मार्च  2018 को है पापमोचनी एकादशी,जानिए कथा एवं इतिहास

devotional papmochani ekadashi history




वेदों, पुराणों एवम शास्त्रों के अनुसार चैत्र माह की कृष्ण पक्ष एकादशी को पापमोचनी एकादशी मनाई जाती है। तदानुसार, शुक्रवार  13 मार्च 2018 को पापमोचनी एकादशी मनाया जायेगा। पाप का अर्थ अधर्म तथा मोचनी का अर्थ मुक्ति पाना है अर्थात पापमोचनी एकादशी समस्त पापों का नाश करने वाला एकादशी है। एकादशी के दिन भगवान विष्णु जी की पूजा करने से अति शुभ फलों की प्राप्ति होती है। devotional papmochani ekadashi history

पापमोचनी एकादशी व्रत कथा devotional papmochani ekadashi history

प्राचीन समय में चित्ररथ नाम का एक वन था। जिस वन में गन्धर्व कन्याएं तथा देवता सभी विहार किया करते थे। एक बार इस वन में मेधावी नामक ऋषि तपस्या कर रहा था तभी मंजुघोषा नामक अप्सरा ऋषि को देख कर उन पर मोहित हो गई। तदोपरांत मंजुघोषा नामक अप्सरा ने नृत्य एवम रंग-रूप से ऋषि मेधावी को मोहित करने का प्रयास करने लगी। इस प्रयास से ऋषि मेधावी की तपस्या भंग हो गई और वो मंजुघोषा के मोह में बांध गए। कुछ वर्षो के पश्चात जब ऋषि मेधावी का मोहभंग हुआ, तो उसे स्मरण हुआ कि वो तो भगवान शिव की तपस्या कर रहे थे। devotional papmochani ekadashi history

रामनवमी की कथा एवम इतिहास

ऋषि मेधावी ने इस अवस्था का कारण अप्सरा मंजुघोषा को मानते हुए, इस कार्य के लिए ऋषि ने अप्सरा मंजुघोषा को प्रेत योनि का श्राप दे दिया। तब अप्सरा ऋषि से क्षमा याचना करते हुए बोली, महर्षि इस श्राप से मुक्त होने का उपाय बताएं। तत्पश्चात ऋषि मेधावी ने मंजुघोषा को पापमोचनी एकादशी व्रत करने के लिए कहा तथा स्वंय ऋषि मेधावी भी पाप का प्रायश्चित करने के लिए व्रत करने लगे। कुछ समय पश्चात दोनों भगवान विष्णु जी की कृपा से श्राप मुक्त हो गए। उस समय से पापमोचनी एकादशी व्रत करने की प्रथा चली आ रही है। पापमोचनी एकादशी सभी जाने-अनजाने में किये गए पापों से मुक्ति दिलाता है। devotional papmochani ekadashi history




पापमोचनी एकादशी पूजा विधि devotional papmochani ekadashi history

पापमोचनी एकादशी के दिन भगवान विष्णु के चतुर्भुज रूप की पूजा की जाती है। एकादशी व्रत के दिन सूर्योदय काल में उठे, स्नान-ध्यान से निवृत होकर व्रत का संकल्प ले। संकल्प लेने के पश्चात भगवान विष्णु की पूजा विधि पूर्वक करना चाहिए। इस दिन भगवत गीता का पाठ करें। एकादशी व्रत की अवधि 24 घंटो की होती है। अतः एकादशी के रात्रि में भी जागरण करना चाहिए। इससे कई गुणा फल की प्राप्ति होती है। द्वादशी के दिन पूजा सम्पन्न करने के पश्चात ब्राह्मणों को भोजन कराकर व्रत का समापन करें। devotional papmochani ekadashi history

एकादशी व्रत की महिमा devotional papmochani ekadashi history

नारद पुराण में भगवान श्री कृष्ण ने स्वंय एकादशी व्रत का बखान किया है
अश्वमेधसहस्राणि राजसूयशतानि च ।
एकादश्युपवासस्य कलां नार्हन्ति शोडशीम् ।।
तात्पर्य एकादशी व्रत को करने से हजारो अश्वमेध यज्ञों से भी अधिक फल की प्राप्ति होती है। अतः एकादशी का व्रत विधि-विधान पूर्वक करना चाहिए। भगवान विष्णु व्रती के समस्त पापों को हर लेते है एवम मनोवांछित फल प्रदान करते है। इस तरह पापमोचनी की कथा सम्पन्न हुई, प्रेम से बोलिए भगवान विष्णु जी की जय। devotional papmochani ekadashi history
( प्रवीण कुमार )

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