18 अप्रैल 2018 को परशुराम जयंती मनाई जाएगी,जानिए कथा एवम इतिहास

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हिन्दू धर्म में वैशाख माह में शुक्ल पक्ष की तृतीया को परशुराम जयंती मनाई जाती है। तदनुसार इस वर्ष शुक्रवार 18 अप्रैल  2018 ई को परशुराम जयंती मनाई जाएगी। पुराणो क अनुसार इस तिथि को भगवान विष्णु जी परशुराम के रूप में पृथ्वी लोक पर अवतरित हुए थे। इसलिए प्रत्येक वर्ष को इस तिथि में परशुराम जयंती मनाई जाती है। यह पर्व पुरे देश में हर्षोउल्लास के साथ मनाया जाता है। इस दिन परशुराम जी की शोभा यात्रा निकाली जाती है। devotional parshuram jayanti story 




परशुराम जन्म कथा devotional parshuram jayanti story 

हिन्दू धार्मिक पुराणो के अनुसार पौराणिक काल में महिष्मती नगर में हैयतवंशी क्षत्रिय नरेश सहस्त्रबाहु का शासन था। राजा सहस्त्रबाहु अत्यंत क्रूर तथा अत्याचारी था जिससे आम जनता हमेशा कुंठित रहता था। जब राजा का अत्याचार बहुत बढ़ गया तब माता पृथ्वी भगवान विष्णु जी के पास गई तथा उनसे राजा सहस्त्रबाहु के अत्याचारों को नाश करने का आग्रह किया। devotional parshuram jayanti story 

जानिए अक्षय तृतीया की कथा एवम इतिहास

तत्पश्चात भगवान विष्णु जी ने माता पृथ्वी को वचन दिया की जब-जब धर्म का पतन होता है तो मैं अवश्य प्रकट होता हूँ। अतः धर्म कि स्थापना के लिए मैं महर्षि जमदगिन के पुत्र रूप में अवतार लेकर अत्याचारियो का सर्वनाश करूंगा। कुछ समय पश्चात भगवान विष्णु जी परशुराम रूप में अवतरित होते है और पृथ्वी लोक को पापियो के पापो से मुक्त करते है। devotional parshuram jayanti story 

भगवान परशुराम ने क्षत्रिय के नरेश सहस्त्रबाहु का वध किया तथा पृथ्वी को इक्कीस बार क्षत्रिय से मुक्त किया। भगवान परशुराम जी के क्रोध को महर्षि ऋचीक ने शांत किया तथा उनसे दान में पृथ्वी मांग लिया। भगवान परशुराम जी वचनानुसार मह्रिषी ऋचीक को दान में पृथ्वी देकर स्वंय महेंद्र पर्वत पर निवास करने चले गए। devotional parshuram jayanti story 

भगवान परशुराम जयंती महत्व devotional parshuram jayanti story 

भगवान परशुराम जी शास्त्र एवम शस्त्र विद्या के पंडित थे तथा प्राणी मात्र का हित करना ही उनका परम लक्ष्य रहा है। उनकी उपासना से दुखियो, शोषितो, तथा पीड़ितों को हर प्रकार से मुक्ति मिलती है। भगवान परशुराम जी का जन्म अक्षय तृतीया को हुआ था। अतः इस दिन किया गया कोई भी शुभ कार्य फलदायक होता है। धार्मिक पंचांग में इस दिन को अति शुभ माना गया है। अतः इस दिन योग के बिना भी शुभ कार्य कर सकते है। devotional parshuram jayanti story 

भगवान परशुराम पूजन विधि parshuram ji worship

इस तिथि को सूर्योंदय काल में उठे, स्नान-ध्यान से निवृत होकर व्रत का संकल्प ले। तत्पश्चात भगवान विष्णु जी की पूजा करे। इस दिन व्रती को निराहार रहना चाहिए। संध्या काल में आरती-अर्चना करने के पश्चात फलाहार करे। अगले दिन पूजा-पाठ के पश्चात भोजन ग्रहण करें। इस प्रकार भगवान परशुराम जयंती की कथा सम्पन्न हुई। प्रेम से बोलिए भगवान परशुराम जी की जय। devotional parshuram jayanti story
( प्रवीण कुमार )

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