29 अगस्त 2017 को है राधाष्टमी जानिए वर्त की कथा एवम इतिहास

devotional radha ashtami history




धार्मिक ग्रंथों के अनुसार भाद्रपद माह की शुक्ल पक्ष की अष्टमी को राधाष्टमी मनाई जाती है। तदनुसार इस वर्ष मंगलवार 29 अगस्त 2017 को राधाष्टमी मनाई जाएगी। धार्मिक मान्यता है कि इस व्रत के प्रभाव से व्रती को मनोवांछित फल की प्राप्ति होती है। devotional radha ashtami history   

इस दिन श्रद्धालु बरसाना की ऊँची पहाड़ी पर स्थित गहवर वन की परिक्रमा करते है। राधा अष्टमी के दिन जगह-जगह पर सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन किया जाता है। मंदिरों को सजाया जाता है तथा मंदिरों में राधा जी की पूजा-अर्चना की जाती है। devotional radha ashtami history   

राधाष्टमी कथा devotional radha ashtami history   

पद्म पुराण के अनुसार राधा जी राजा वृषभानु की पुत्री थीं एवं राधा जी के माता का नाम कीर्ति था। कथानुसार एक बार जब राजा वृषभानु यज्ञ के लिए भूमि की साफ-सफाई कर रहे थे तब उनको भूमि पर कन्या के रूप में राधा जी मिलीं थीं। devotional radha ashtami history   

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इसके बाद राजा वृषभानु कन्या को अपनी पुत्री मानकर लालन-पालन करने लगे। राधा जी जब बड़ी हुई तो उनका जीवन सर्वप्रथम कृष्ण जी के सानिध्य में बीता। किन्तु राधा जी का विवाह रापाण नामक व्यक्ति के साथ सम्पन्न हुआ था। पुराणों के अनुसार राधा जी माँ लक्ष्मी की अवतार थी। जब कृष्ण जी द्वापर युग में जन्म लिया तो माँ लक्ष्मी जी भी राधा रूप में प्रकट हुई थी। devotional radha ashtami history   




राधाष्टमी महत्व

वेदों, पुराणों एवं शास्त्रों में राधा जी को कृष्ण वल्लभा कहकर गुणगान किया गया है। राधाष्टमी के कथा श्रवण से व्रती एवम भक्त सुखी, धनी और सर्वगुणसम्पन्न बनता है। श्री राधा जी के जाप एवम स्मरण से मोक्ष की प्राप्ति होती है । devotional radha ashtami history   

मान्यता है कि यदि राधा जी का पूजा अथवा स्मरण नही किया जाता है तो भगवान श्री कृष्ण जी भी उस भक्त के द्वारा किये गए पूजा, जप-तप को स्वीकार नही करते है। श्री राधा रानी भगवान श्री कृष्ण जी के प्राणों की अधिष्ठात्री देवी मानी गई हैं। अतः कृष्ण जी के साथ श्री राधा रानी जी का भी पूजा विधि-पूर्वक करना चाहिए। devotional radha ashtami history   

राधाष्टमी पूजन devotional radha ashtami history   

राधाष्टमी के दिन प्रातः काल उठकर घर की साफ़-सफाई करना चाहिए। स्नान आदि से निवृत होकर शुद्ध मन से व्रत का संकल्प करना चाहिए। तत्पश्चात सर्वप्रथम श्री राधा रानी को पंचामृत से स्नान कराएं, स्नान करने के पश्चात उनका श्रृंगार करें। श्री राधा रानी की प्रतिमूर्ति को स्थापित करें। तदोपरांत श्री राधा रानी और भगवान श्री कृष्ण जी की पूजा धुप-दीप, फल, फूल आदि से करना चाहिए। devotional radha ashtami history   

आरती-अर्चना करने के पश्चात अंत में भोग लगाना चाहिए। इस दिन निराहार रहकर उपवास करना चाहिए। संध्या-आरती करने के पश्चात फलाहार करना चाहिए। इस प्रकार राधा अष्टमी की कथा सम्पन्न हुई। प्रेम से बोलिए राधा रानी और भगवन श्री कृष्ण जी की जय।  devotional radha ashtami history   
(प्रवीण कुमार)

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