26 अगस्त 2018 को है रक्षा बंधन जानिए की कथा एवम इतिहास

devotional raksha bandhan history




हिन्दू धर्म में प्रत्येक वर्ष श्रावण माह की पूर्णिमा को रक्षाबंधन का त्यौहार बड़े ही धूमधाम एवम उत्साह में मनाया जाता है। तदनुसार इस वर्ष गुरुवार 26 अगस्त 2018 को रक्षाबंधन का त्यौहार मनाया जायेगा। भारतीय परम्परा के अनुसार यह पर्व भाई-बहन के स्नेह के साथ सामाजिक बंधन का प्रतीक है। devotional raksha bandhan history 

रक्षाबंधन की कथा devotional raksha bandhan history 

पौराणिक कथानुसार रक्षाबंधन का प्रारम्भ द्वापर युग से माना जाता है। द्वापर युग में भगवान कृष्ण जी ने दुष्ट राजा शिशुपाल का वध किया था। इस युद्ध में भगवान श्री कृष्ण जी के बाएँ हाथ की ऊँगली से खून बह रहा था। इसे देखकर द्रौपदी बेहद दुखी हुई। devotional raksha bandhan history 

तत्पश्चात द्रुपदी ने अपने साड़ी का टुकड़ा चीरकर भगवान श्री कृष्ण जी की ऊँगली पर पट्टी बांधी थी जिससे खून बहना बंद हो गया था। उसी क्षण भगवान श्री कृष्ण जी द्रौपदी को अपनी बहन स्वीकार कर लिया था। devotional raksha bandhan history 

श्रावण पूर्णिमा की कथा एवम इतिहास





अतः इस दिन से रक्षाबंधन पर्व का प्रारम्भ हुआ। कई वर्षों के पश्चात जब पांडव द्रौपदी को जुए में हार जाता है तो उस समय भरी सभा में द्रौपदी का चिर हरण होता है। तब भगवान श्री कृष्ण जी ने द्रौपदी को वस्त्र देकर द्रौपदी की लाज बचायी थी। devotional raksha bandhan history 

रक्षाबंधन का महत्व devotional raksha bandhan history 

रक्षाबंधन पर्व के महत्व को समझने के लिए सबसे पहले इसके आशय का अर्थ समझना होगा। रक्षाबंधन दो शब्दों से मिलकर बना है। इस बंधन के जरिये बहन अपने भाई से रक्षा का वचन लेती है। आज समय के साथ इस पर्व के शुभता में कोई कमी नही आई है। अपितु इस पर्व का महत्व और बढ़ गया है। devotional raksha bandhan history 

यह सौहार्द का पर्व है जो समाज में लोगों को एक दूसरे के करीब लाता है। भाई-बहन के बीच मतभेद को दूर करता है। आधुनिकता की दौर में रिश्ते में दूरियां आ गयी है। जिसे रक्षाबंधन पर्व दूर करता है। यह धर्म पर्व नही बल्कि आपसी सद्भाव का पर्व है। devotional raksha bandhan history 

रक्षाबंधन पर्व devotional raksha bandhan history 

इस दिन बहन पूजा की थाली में चन्दन, राखी, दीप, मिठाई आदि लेकर भाई की पूजा करते है। पहले चन्दन का टिका लगाती है। उसके बाद भाई की आरती उतारती है। फिर राखी बांधकर मिठाई खिलाती है।

आधुनिक समय में भाई अपने बहन को पैसे या उपहार प्रदान करता है। किन्तु पर्व तो बहन द्वारा भाई से रक्षा का वचन लेना होता है। इस प्रकार रक्षा बंधन की कथा सम्पन्न हुई। devotional raksha bandhan history 
( प्रवीण कुमार )

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