26 अगस्त 2017 को है ऋषि पंचमी जानिए वर्त की कथा एवम इतिहास

devotional rishi panchami history



वेदों, पुराणों एवम शास्त्रों के अनुसार भाद्रपद माह में शुक्ल पक्ष की पंचमी को ऋषि पंचमी मनाई जाती है। तदनुसार इस वर्ष मंगलवार 26 अगस्त 2017 को ऋषि पंचमी मनाई जाएगी। यह व्रत विशेषकर महिलाएं करती है। इस व्रत के करने से समस्त पापों का नाश होता है तथा जीवन में सत्य और शुद्धता का आगमन होता है।  devotional rishi panchami history

ऋषि पंचमी की कथा devotional rishi panchami history

प्राचीन काल में दशरथपुर नामक एक गाँव में सदाचारी ब्राह्मण अपने परिवार के साथ रहता था। ब्राह्मण की पत्नी प्रत्येक अमावस्या को साधु-संतों को भोजन कराया करती थी। एक बार जब ब्राह्मणी भोजन पका रही थी तो गलती से उसमें छिपकली गिर गयी। devotional rishi panchami history

किंतु ब्राह्मणी को इस बात का पता नही चला, ब्राह्मणी ने अति उत्साह से साधु-संतों को भोजन कराया। भोजन करने के पश्चात कुछ साधु मूर्छित हो गए। यह देखकर अन्य साधु लोग क्रोधित हो गए। उन्हें संदेह हो गया कि ब्राह्मणी ने भोजन में कुछ मिला दिया है जिस कारण सभी मूर्छित हो रहे है। devotional rishi panchami history

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तदोपरांत साधु-संतों ने ब्राह्मण-ब्राह्मणी को श्राप दे दिया कि अगले जन्म में तुम दोनों का कुत्ता और बैल की योनि में जन्म होगा। ब्राह्मणी क्षमा-याचना करने लगी किन्तु साधु-संत का क्रोध शांत नही हुआ। साधु-संत वहां से भोजन ग्रहण किये बिना प्रस्थान कर गए। devotional rishi panchami history

तत्पश्चात ब्राह्मण और ब्राह्मणी एक ऋषि के पास पहुंचा, उनसे अपने श्राप के सम्बन्ध में बताया। ऋषि ने कहा, हे देवी आप भाद्रपद की शुक्ल पक्ष की ऋषि पंचमी व्रत को विधि-विधान से करें। इस व्रत के प्रभाव से आपको श्राप से मुक्ति मिलेगी। ऋषि द्वारा बताये गए व्रत को ब्राह्मणी ने विधिवत किया। व्रत के प्रभाव से दोनों को इस श्राप से मुक्ति मिल गयी। devotional rishi panchami history




ऋषि पंचमी महत्व devotional rishi panchami history

ऋषि पंचमी का शास्त्रों में विशेष महत्व है। इस व्रत के प्रभाव से जन्म-जन्म के पापों एवम श्रापों से मुक्ति मिलती है। यह व्रत खासकर महिलाओं के लिए फलदायी होती है। मान्यता है की जो महिलाएं दूर हो जाती है अथवा गलती से दूर होने पर भी मंदिर में चली जाती है। वो महिलाएं को ऋषि पंचमी का व्रत अवश्य करना चाहिए। devotional rishi panchami history

ऋषि पंचमी पूजा विधि devotional rishi panchami history

इस दिन प्रातः काल उठें, दैनिक कार्य से निवृत होकर घर की साफ-सफाई करना चाहिए। तत्पश्चात स्नान कर व्रत का संकल्प करना चाहिए। ऋषि पंचमी के दिन ऋषि की गुरु करने का विधान है। अतः ऋषि गुरु के निमित मात्र व्रत करें, पूजा करने के पश्चात 11 अथवा 21 ब्राह्मणों को भोजन कराना चाहिए। इस दिन निराहार रहें, रात्रि में संध्या-आरती के पश्चात फलाहार करना चाहिए। इस तरह ऋषि पंचमी कथा सम्पन्न हुई। प्रेम से बोलिए ऋषि गुरु की जय।  devotional rishi panchami history
( प्रवीण कुमार )

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