13 दिसंबर 2017 को है सफला एकादशी,जानिए व्रत की कथा एवं इतिहास

devotional safala ekadashi history




पौष मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी को सफला एकादशी कहा जाता है तदनुसार इस वर्ष बुधवार 13 दिसंबर 2017 को सफला एकादशी मनाई जाएगी । सफला एकादशी के बारे में कहा जाता है कि व्यक्ति को सहस्त्र वर्ष की तपस्या से जो पुण्य की प्राप्ति होती है वह पुण्य सफला एकादशी व्रत करने से मिलता है। वर्ष के प्रत्येक महीने में 2 एकादशी पड़ता है। एकादशी व्रत के करने से व्रती के समस्त पाप का नाश होता है।  devotional safala ekadashi history 

सफला एकादशी की कथा  devotional safala ekadashi history 

भगवान श्री कृष्ण जी ने एकादशी व्रत की कथा सर्वप्रथम धर्मराज युधिष्ठिर को बताया था। चम्पावती नगर में महिष्मान नाम का एक राजा रहता था जिसके चार पुत्र थे। सबसे बड़े पुत्र का नाम लुम्पक था जो बुरे प्रवृति का था जगह-जगह भगवान के विषय में अनुचित बात करता रहता था। पिता के धन को व्यर्थ में लुटाता रहता था।  devotional safala ekadashi history 

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जिस कारण राजा महिष्मान ने उसे राज्य से निकाल दिया। लुम्पक पास के वन में रहने लगा था। दिन में लुम्पक वन में रहता और रात्रि के समय पिता के राज्य में चोरी कर अपना जीवन-यापन करने लगा था। एक बार पौष माह की शर्द हवा से लुम्पक मूर्छित हो गया और अगले दिन लुम्पक को होश आया। लुम्पक शुक्ल पक्ष के एकादशी के दिन पीपल वृक्ष के नीचे वन से फल बटोर कर रखा पर अस्वस्थ होने के कारण कुछ खा ना सका। devotional safala ekadashi history 

ठण्ड और बीमार होने के कारण लुम्पक उस रात में सो भी नही पाया और पूरी रात जागकर भगवान श्री हरी विष्णु का नाम लेता रहा। अगले दिन लुम्पक पूरी तरह से स्वस्थ हो गया।  तब भगवान विष्णु ने दिव्य शक्ति से लुम्पक को सफला एकादशी के बारे में बताया। लुम्पक अति प्रसन्न हो भगवान विष्णु को प्रणाम किया। उस दिन से लुम्पक ने बुरे कार्य करना छोड़ दिया तथा हरी भक्त बन गया। तत्पश्चात,लुम्पक अपने पिता महिष्मान के पास जाकर उनसे क्षमा-याचना किया। महिष्मान ने लुम्पक को माफ़ कर राज्य का भागीदार बना दिया। devotional safala ekadashi history 




सफला एकादशी पूजन विधि। devotional safala ekadashi history 

सफला एकादशी के दिन भगवान श्री विष्णु जी का पूजन किया जाता है, जो व्यक्ति सफला एकादशी का व्रत आरम्भ करना चाहता है वो इस व्रत के नियम का पौष माह की कृष्ण पक्ष की दशमी से पालन करे। सफला एकादशी के दिन स्नान आदि से निवृत होकर व्रत का संकल्प भगवान विष्णु जी के समक्ष लेकर उनकी पूजा धुप,दीप,फल और फूल आदि से करे। devotional safala ekadashi history 

सफला एकादशी की रात्रि में भगवान विष्णु जी का भजन-कीर्तन करते हुए जागरण करना चाहिए। द्वादशी तिथि को स्नान करने के बाद पूजा करके ब्राह्मणो को दान करे। तत्पश्चात, भोजन करे। सफला एकादशी के करने से भक्त गण के सारे प्रयोजन सफल होता है। इस तरह सफला एकादशी की कथा और पूजन विधि समाप्त हुयी। प्रेम से बोलिए भगवान श्री नारायण हरि विष्णु जी और माँ लक्ष्मी की जय।  devotional safala ekadashi history 

( प्रवीण कुमार )

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