7 फरवरी 2018 को है शबरी जयंती,जानिए व्रत की कथा एवं इतिहास

devotional shabri jayanti history




त्रेतायुग के साक्ष्य अनुसार फाल्गुन माह में कृष्ण पक्ष की नवमी को शबरी जयंती मनई जाती है। तदनुसार, बुधवार 7 फरवरी 2018 को शबरी जयंती मनाई जाएगी। शबरी भगवान राम की जन्म से भक्त थी तथा भगवान राम ने शबरी के जूठे बेर को खाकर शबरी के भक्ति को पूर्ण किया था। शबरी जयंती इसलिए अति महत्वपूर्ण है क्योकि स्वयं भगवान राम ने इनके जूठे बेर को खाया था। devotional shabri jayanti history  

शबरी की कथा

श्रमणा का जन्म शबरी जाति के परिवार में हुआ था तथा बाल्यकाल से ही श्रमणा को भगवान राम से अगाध स्नेह तथा प्रेमाभक्ति थी। श्रमणा को जब कभी वक्त मिलता, श्रमणा भगवान राम की पूजा श्रद्धा-भाव से किया करती थी। जबकि उनके परिवार वाले श्रमणा के इस कार्य से खुश नही थे। devotional shabri jayanti history  

समय के साथ श्रमणा भी बड़ी हो गयी और उसके माता-पिता ने श्रमणा की शादी कर दी। परन्तु दुर्भाग्य से उसके अनुरूप उसे कुछ नही मिला। श्रमणा का पति राक्षसी प्रवृति का था। आसुरी प्रवृति के कारण समाज के लोग उससे भयभीत रहते थे। जिस कारण समाज के किसी वर्ग के लोग श्रमणा से बातचीत नही करता था तथा उससे दूर रहा करता था। devotional shabri jayanti history  

श्रमणा का उसके पति के साथ इस कारण अक्सर झगड़ा होता रहता था। श्रमणा जैसी सात्विक स्त्री का इस दूषित वातावरण में जीना दूभर हो गया। अतः श्रमणा ने जीवन में एक साहसी तथा अव्यवहारिक कदम उठाया। एक रात श्रमणा ने अपनी पति के द्वार का त्याग कर दिया। श्रमणा काफी सोच-विचार के पश्चात मातंग ऋषि के आश्रम पहुंची। devotional shabri jayanti history  

समाज में अछूत वर्ग से होने के कारण वह आश्रम के अंदर प्रवेश नही की तथा आश्रम के बाहर पर बैठ गयी। कुछ समय बीतने के बाद ऋषि मतंग बाहर आये तो उन्होंने श्रमणा को बाहर देखा। ऋषि मतंग ने उसके आने का आश्रय पूछा। तब श्रमणा ने अपनी व्यथा ऋषि मतंग को सुनाया। कुछ देर गहन चिंतन करने के पश्चात ऋषि मतंग ने श्रमणा को अपने आश्रम में पनाह दे दिया। devotional shabri jayanti history  

श्रमणा ने अपने नम्र भाव तथा कार्यकुशलता से आश्रम के प्रत्येक व्यक्ति प्रभावित किया। आश्रम में श्रमणा को पूजा-पाठ तथा भक्ति के लिए पर्याप्त समय मिलता था। श्रमणा के पति को जब इस बात की खबर मिली तो क्रोधित भाव में वह ऋषि मतंग के आश्रम आ पंहुचा तथा ऋषि मतंग को भला-बुरा कहने लगा। devotional shabri jayanti history  




तदोपरांत, ऋषि मतंग ने अपनी सिद्धि के जरिये श्रमणा के पति को माया के जाल-फाँस में बांध दिया परन्तु श्रमणा के पति के द्वारा क्षमा-याचना किये जाने पर उसे मुक्त कर दिया। इस घटना के पश्चात श्रमणा का पति दोबारा ऋषि मतंग के आश्रम नही आया। दिन गुजरते गए। जब भगवान राम 14 वर्ष का वनवास मिला था उस समय माता जानकी का हरण लंका पति रावण ने कर लिया था। devotional shabri jayanti history  

माता जानकी की खोज में भगवान राम ऋषि मतंग के आश्रम जा पहुंचे। ऋषि मतंग ने उन्हें पहचान लिया। ऋषि मतंग ने उनका आदर-सत्कार किया। तत्पश्चात, ऋषि मतंग जी श्रमणा से बोले, श्रमणा। जिस भगवान राम की तुम बाल्यकाल से भक्ति करती थी, वही भगवान राम आज तुम्हरे समक्ष खड़े है। जितनी सेवा करना है, कर लो। devotional shabri jayanti history  

श्रमणा ने प्रभु राम को नमस्कार किया। श्रमणा कंद-मूंद लेने की वन की और गयी तथा कुछ समय पश्चात कुछ फल अपने साथ लायी। श्रमणा ने फल में बेर भी लायी थी परन्तु भगवान राम को जूते बेर कैसे खिलाती। अतः श्रमणा पहले बेर को चखती थी फिर प्रभु को खाने देती थी ताकि कोई बेर खट्टे ना हो। श्रमणा ने निः संकोच भाव से प्रभु राम को जूते बेर दे रही थी तथा प्रभु राम उसकी सरलता पर मुग्ध होकर बेर को ग्रहण कर रहे थे। प्रभु राम की कृपा से शबरी का उद्धार हो गया। मृत्यु उपरांत शबरी को स्वर्ग की प्राप्ति हुई।  devotional shabri jayanti history  

शबरी जयंती महत्व

शबरी जयंती फाल्गुन माह में कृष्ण पक्ष की नवमी को शबरी जयंती पड़ता है जो भगवान राम के अनन्य भक्त थी। श्रमणा जिसने बचपन से प्रभु राम की पूजा-अर्चना किया परन्तु उनके जीवन में भी कई संकट आई। श्रमणा का विवाह भी आसुरी प्रवृति के व्यक्ति से हुआ जिस कारण उनका वैवाहिक जीवन भी संघर्ष में बीता। परन्तु उन्होंने अपने जीवन आदर्श भगवान राम की भक्ति का कभी त्याग नही किया। आज भी शबरी जीवन आदर्शो को समाज में माना जाता है। इस तरह शबरी जयंती की कथा सम्पन्न हुई। प्रेम से बोलिए प्रभु श्री राम जी की जय। devotional shabri jayanti history  
( प्रवीण कुमार )

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