शनि त्रयोदशी की कथा एवं इतिहास

devotional Shani Trayodashi vrat katha



धार्मिक मान्यताओ के अनुसार कार्तिक माह में कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी को शनि त्रयोदशी मनाई जाती है। तदनुसार इस वर्ष कार्तिक माह में 12 नवंबर 2016 को शनि त्रयोदशी मनाई जाएगी। पुराणो के अनुसार सूर्य पुत्र शनि देव का जन्म ज्येष्ठ माह में अमावस्या के दिन हुई थी। devotional Shani Trayodashi vrat katha 

शनि जन्म कथा devotional Shani Trayodashi vrat katha 

पौराणिक कथा अनुसार शनि देव, सूर्य देव के पुत्र है तथा उनकी माता का नाम छाया है। सूर्य देव का विवाह प्रजापति दक्ष की पुत्री संज्ञा से हुआ था। विवाह के पश्चात कुछ समय तक दोनों साथ में रहें, जिससे उन्हें तीन संतान की प्राप्ति हुई। devotional Shani Trayodashi vrat katha 

भगवान सूर्य देव की तीन संतान मनु, यम तथा यमुना है। परन्तु सूर्य देव की तेज को संज्ञा ज्यादा दिन सहन ना कर सकी। जिस कारण एक दिन संज्ञा ने अपनी छाया को पति सूर्य देव की सेवा में छोड़कर सूर्यलोक से चली गयी। उत्तरार्ध में छाया के गर्भ से भगवान शनि देव का जन्म हुआ। devotional Shani Trayodashi vrat katha 

शनि त्रयोदशी का महत्व devotional Shani Trayodashi vrat katha 

शनि जयंती के दिन शनि मंदिरो में श्रधालुओ की भीड़ उमड़ती है। इस दिन उपासक शनि देव की पूजा विधि पूर्वक करते है तथा उनसे पीड़ा, दुःख, क्लेश से मुक्ति की प्रार्थना करते है। शनि देव का वर्ण काला है इसलिए इन्हे काला रंग अधिक पसंद है। शनि देव समस्त राशियों का स्वामी है तथा ग्रहो में सबसे बड़ा ग्रह है। अतः मनुष्य को आराध्य शनि देव की पूजा निष्काम भाव से करना चाहिए। भगवान शनि देव की कृपा से समस्त लोको के प्राणी का कल्याण होता है। devotional Shani Trayodashi vrat katha 

शनि त्रयोदशी पूजा devotional Shani Trayodashi vrat katha 

शनि जयंती के दिन पर शनि देव के निम्मित विधि-विधान से पूजा-पाठ एवम व्रत करें। शनि जयंती के दिन प्रातः काल उठे, स्नान आदि से निवृत होकर नवग्रहों को प्रणाम करें। तत्पश्चात शनि देव की लोहे की प्रति मूर्ति स्थापित करें। शनि देव की प्रतिमा को सरसो अथवा तिल के तेल से स्नान कराएं। तत्पश्चात तेल के दीपक जलाएं, शनि चालीसा का पाठ करें एवम शनि मन्त्र का उच्चारण करें। devotional Shani Trayodashi vrat katha 

प्रदोष व्रत की कथा एवं इतिहास

पूजा सम्पन्न होने के पश्चात काले कपडे, तिल, लोहा आदि वस्तुओं का शनि देव के निम्मित दान करें। व्रती पर शनि देव की कृपा अवश्य बरसती है। इस प्रकार शनि त्रयोदशी की कथा सम्पन्न हुई। प्रेम से बोलिए भगवान शनि देव की जय।  devotional Shani Trayodashi vrat katha 
( प्रवीण कुमार )




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