22 अगस्त  2018 को है श्रावण पुत्रदा एकादशी जानिए वर्त की कथा एवम इतिहास

devotional shravana putrada ekadashi history



सनातन धर्म में एकादशी व्रत का विशेष महत्व है, साल में 24 एकादशी होती है । श्रावण माह में शुक्ल पक्ष की एकादशी को पुत्रदा एकादशी कहते है। तदनुसार इस वर्ष गुरूवार 22 अगस्त  2018 को श्रावण एकादशी मनाई जाएगी। devotional shravana putrada ekadashi history 

इस व्रत कथा के स्मरण से वाजपेय यज्ञ का फल मिलता है। पुत्रदा एकादशी के दिन दीप-दान का भी विधान है यह संध्याकाल में किया जाता है। ‘रात को वैष्णव पुरुषों के साथ जागरण कर भगवान विष्णु जी का भजन-कीर्तन करना चाहिए। यह सब पापों को हरनेवाला तथा संतान प्राप्ति का व्रत है। devotional shravana putrada ekadashi history 

पुत्रदा एकादशी की कथा devotional shravana putrada ekadashi history 

एक समय की बात है भद्रावतीपुरी राज्य में राजा सुकेतुमान और रानी चंपा राज्य किया करते थे। राजा की कोई संतान न थी जिस कारण राजा-रानी सदा शोक और चिंता में डूबे रहते थे। राजा हमेशा यह सोचता रहता था कि मेरे बाद इस राज-पाट का कौन वारिश बनेगा और पितरों को तर्पण कौन करेगा devotional shravana putrada ekadashi history 

यह सब सोच-सोच कर राजा सुकेतुमान हमेशा चिंतित रहते थे। एक दिन राजा सुकेतुमान घोड़े पर सवार हो वन में भर्मण करने निकले और वन में दूर निकल गए और इस बात की खबर किसी को न थी। राजा सुकेतुमान घने जंगल में भर्मण करने लगे। राह में जंगली जीव उनके इर्द -गिर्द घूम रहे थे, राजा सुकेतुमान वन की शोभा देखने में मग्न हो गए इतने में दोपहर का वक्त हो गया अब राजा सुकेतुमान को भूख और प्यास सताने लगी। devotional shravana putrada ekadashi history 

राजा सुकेतुमान जल और भोजन की खोज में इधर-उधर भटकने लगे तभी उन्हें एक उत्तम जलाशय दिखाई दी जिसके समीप मुनियो के ढेर सारा आश्रम था। राजा सुकेतुमान ने उस आश्रम के समीप पंहुचा तो देखा वहां पर कई ऋषि मुनि गण थे तभी राजा सुकेतुमान का दाहिना नेत्र और दाहिना हाथ फड़कने लगा जो शुभ समय की सुचना दे रहा था। devotional shravana putrada ekadashi history 




आज श्रावण पुत्रदा एकादशी है devotional shravana putrada ekadashi history 

उस जलाशय के समीप ढेर सरे ऋषि गण वेद का पाठ कर रहे थे यह देखकर राजा सुकेतुमान को बड़ा हर्ष हुआ। यह सब देख राजा सुकेतुमान घोड़े से उतर कर बारी-बारी से ऋषि गण को नमस्कार किया तब मुनि बोले, तथास्तु राजन। devotional shravana putrada ekadashi history 

राजा सुकेतुमान बोले, आप लोग कौन है और किस उद्देश्य से आपलोग इस जलाशय के समीप एकत्र हुए है ? मुनि बोले, हमलोग विश्वदेव है तथा आज श्रावण पुत्रदा एकादशी है। इसलिए हम सभी इस जलाशय के समीप स्नान एवम पूजा हेतु इकठ्ठा हुए है। इस व्रत के करने से पिता को पुत्र की प्राप्ति होती है। devotional shravana putrada ekadashi history 

राजा सुकेतुमान ने मुनियो से इस व्रत के करने की विधि के बारे में पूछा। मुनि बोले, इस व्रत को करने से भगवान केशव प्रसन्न होते है और केशव भक्ति से प्रसन्न हो आपको अवश्य पुत्र प्राप्ति का वर देंगे। devotional shravana putrada ekadashi history 

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इस प्रकार राजा सुकेतुमान ने मुनियो को प्रणाम कर अपने राज्य वापस लौट आये और ऋषियों के कथानुसार विधिपूर्वक पुत्रदा एकादशी का अनुष्ठान किया और द्वादशी को पारण कर व्रत को समाप्त किया। एक साल के उपरांत राजा सुकेतुमान के घर में एक नन्हे से राजकुमार का आगमन हुआ जो आगे चलकर भद्रावतीपुरी राज्य का राजा बना। devotional shravana putrada ekadashi history 

पौष पुत्रदा एकादशी की पूजा विधि और महत्व devotional shravana putrada ekadashi history 

भगवान कृष्ण ने श्रावण पुत्रदा एकादशी के महत्व को बताया है की इस व्रत के देवता नारायण हरि श्री विष्णु जी है जिस व्यक्ति को संतान सुख की इच्छा रहती है उसे श्रावण पुत्रदा एकादशी का व्रत करना चाहिए। व्रती को एक दिन पूर्व अर्थात शुक्ल पक्ष की दशमी के दिन लहसुन,प्याज से रहित भोजन ग्रहण करना चाहिए। devotional shravana putrada ekadashi history 

एकादशी के दिन स्नान आदि से निवृत होकर विधि-विधान से पूजा करना चाहिए तथा संध्याकाल में दीप दान करना चाहिए इससे श्रेष्ठ संतान की प्राप्ति होती है। जो व्रती इस व्रत को करते है उन्हें दिन भर निराहार रहना चाहिए तथा संध्याकाल में चाहे तो फलाहार कर सकते है। इस तरह पौष पुत्रदा एकादशी की कथा सम्पन्न हुई। भक्तगण प्रेम से बोलिए भगवान श्री हरी विष्णु जी की जय। devotional shravana putrada ekadashi history 
(प्रवीण कुमार )

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