22 अप्रैल 2018 को है वरुथिनी एकादशी ,जानिए व्रत की कथा एवं इतिहास

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हिन्दू धर्म के अनुसार वैशाख माह में कृष्ण पक्ष की एकादशी को बरूथनी एकादशी मनाई जानी जाती है। तदानुसार इस वर्ष शनिवार 22 अप्रैल 2018 को वरुथिनी एकादशी मनाई जाएगी। यह व्रत सुख व् सौभाग्य का प्रतीक है। इस दिन सामर्थ्य अनुसार ब्राह्मणों एवम जरूरतमंद गरीबो को दान देने से करोड़ वर्षो के तपों एवम कन्यादान के फल से कई गुना अधिक फल प्राप्त होता है। devotional varuthani ekadashi hitory 

वरुथिनी एकादशी व्रत कथा devotional varuthani ekadashi hitory 

प्राचीन समय की बात है नर्मदा नदी के तट पर मान्धाता नामक राजा राज करते थे। राजा मान्धाता अत्यंत दानशील एवम तपस्वी थे । एक दिन जब राजा मान्धाता तपस्या कर रहे थे उस समय एक जंगली भालू आकर राजा मान्धाता के पैर को चबाने लगा। इससे राजा मान्धाता का ध्यान भंग हो गया। भालू को देखकर राजा मान्धाता डर गए। devotional varuthani ekadashi hitory 

तत्पश्चात राजा मान्धाता ने भगवान श्री विष्णु का ध्यान कर उनसे प्राण रक्षा की प्रार्थना करने लगे। उसी क्षण भगवान विष्णु प्रकट हुए और उन्होंने अपने सुदर्शन चक्र से जंगली भालू को मार डाला। परन्तु इस कर्म में राजा मान्धाता का पैर पूरी तरह से घायल हो गया। इससे राजा मान्धाता बहुत शोकाकुल हो गए। devotional varuthani ekadashi hitory 

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तदोपरांत भगवान विष्णु ने कहा- हे वत्स, मथुरा में स्थित मेरी वाराह अवतार मूर्ति की पूजा वरुथिनी एकादशी का व्रत करके करो, व्रत के प्रभाव से तुम पुनः अंगो वाले हो जाओगे। तत्पश्चात भगवान विष्णु अंतर्ध्यान हो गए। राजा ने विधि-विधान से इस पर्व को किया जिससे राजा पुनः सुन्दर अंगो वाला हो गया। devotional varuthani ekadashi hitory 

वरुथिनी एकादशी व्रत महत्व

वरुथिनी एकादशी व्रत करने से व्रती को समस्त दुखो से मुक्ति मिलती है एवम स्वर्ग का मार्ग प्रशस्त होता है। इस व्रत को करने से सूर्य ग्रहण के समय दिए गए दान की तरह फल प्राप्त होता है। वरुथिनी एकादशी के करने से मनुष्य को समस्त लोको में सुख प्राप्त होता है। इस दिन तिल दान को सर्वश्रेष्ठ बताया गया है। devotional varuthani ekadashi hitory 

वरुथिनी एकादशी व्रत विधि

वरुथिनी एकादशी का व्रत करने वाले व्रती दशमी के दिन में सात्विक भोजन ग्रहण करे। इस दिन भोजन में मूंग दाल, चना, जौ, गेंहू एवम तामसी भोजन का प्रयोग नही करना चाहिए। एकादशी के दिन सूर्योदय काल में उठे, स्नान-ध्यान से निवृत होकर व्रत संकल्प ले। तत्पश्चात भगवान विष्णु जी की पूजा एवम आरती-अर्चना करे। एकादशी के रात्रि में भगवान का भजन-कीर्तन करे एवम रात्रि जागरण करे। द्वादशी के दिन पूजा दान के पश्चात उपवास को तोड़े। इस प्रकार वरुथिनी एकादशी की कथा सम्पन्न हुई। प्रेम से बोलिए भगवान विष्णु जी की जय।  devotional varuthani ekadashi hitory 
( प्रवीण कुमार )



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